मैरिज सर्टिफिकेट नहीं बनवाया तो भरना पड़ सकता है 25 हजार रुपये जुर्माना! जानिए नया नियम
Indian wedding hands with gold
23 सितंबर 2008 के बाद हुई शादी का एक साल के भीतर पंजीयन अनिवार्य होगा। तय समय में रजिस्ट्रेशन नहीं कराने पर कानूनी नोटिस और 25 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
Marriage Registration Rule in Madhya Pradesh: अगर आपकी शादी 23 सितंबर 2008 के बाद हुई है और अब तक विवाह पंजीकरण नहीं कराया है, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। मध्य प्रदेश सरकार के नए नियम के अनुसार अब तय समय सीमा के भीतर मैरिज रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। ऐसा नहीं करने पर संबंधित दंपति को कानूनी नोटिस के साथ 25 हजार रुपये तक का जुर्माना भी भरना पड़ सकता है।
नए प्रावधान के तहत 23 सितंबर 2008 के बाद हुई सभी शादियों का विवाह के एक वर्ष के भीतर पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। हालांकि 23 सितंबर 2008 से पहले हुई शादियों पर यह नियम अनिवार्य रूप से लागू नहीं होगा और ऐसे मामलों में विवाह पंजीकरण वैकल्पिक रहेगा।
सरकार के अनुसार यदि वर या वधु में से कोई एक मध्य प्रदेश का मूल निवासी है, तो यह नियम उस पर लागू होगा, चाहे वह पढ़ाई, नौकरी या व्यवसाय के लिए विदेश या किसी अन्य राज्य में ही क्यों न रह रहा हो। हालांकि मध्य प्रदेश की अनुसूचित जनजातियों को इस प्रावधान से छूट दी गई है।
यदि विवाह के बाद निर्धारित समय में पंजीयन नहीं कराया जाता है, तो रजिस्ट्रार संबंधित दंपति को कानूनी नोटिस जारी कर सकता है। नोटिस के बाद भी नियमों का पालन नहीं करने पर 25 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अब केवल शादी का कार्ड, फोटो या शपथ पत्र पर्याप्त नहीं होगा। सरकारी और निजी संस्थानों में जीवनसाथी का नाम सर्विस रिकॉर्ड, पीएफ, फैमिली पेंशन, बीमा, नॉमिनी और अन्य सरकारी दस्तावेजों में जोड़ने के लिए विवाह पंजीकरण प्रमाण पत्र आवश्यक होगा।
विवाह पंजीकरण के लिए दूल्हा-दुल्हन का जन्म प्रमाण पत्र, 10वीं की अंकसूची या पासपोर्ट, आधार कार्ड या वोटर आईडी, मध्य प्रदेश का मूल निवासी प्रमाण पत्र, शादी का कार्ड, विवाह की फोटो, दो गवाहों के पहचान पत्र और दोनों की पासपोर्ट साइज फोटो आवश्यक होंगे।
सरकार का कहना है कि विवाह पंजीकरण को अनिवार्य बनाने का उद्देश्य वैवाहिक रिकॉर्ड को कानूनी रूप से सुरक्षित करना और भविष्य में संपत्ति, उत्तराधिकार, सामाजिक सुरक्षा तथा सरकारी लाभ से जुड़े विवादों को कम करना है।

