राजधानी में सजेगा दुनिया का सबसे बड़ा कूटनीतिक मंच: 12-13 सितंबर को दिल्ली में जिनपिंग, पुतिन और पेज़ेश्कियान; ब्रिक्स में पीएम मोदी का नया विजन!
नई दिल्ली। भारत की राजधानी नई दिल्ली 12 और 13 सितंबर को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के भव्य आयोजन के लिए तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आमंत्रण पर दुनिया की तीन बड़ी ताकतों-रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान का दिल्ली आगमन हो रहा है। बहुपक्षीय कूटनीति, ऊर्जा सुरक्षा और बदलती वैश्विक व्यवस्था के बीच नई दिल्ली में होने जा रहा यह जमावड़ा अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है।
पुतिन, जिनपिंग और पेज़ेश्कियान के दौरे के कूटनीतिक मायने
यह सम्मेलन कई ऐतिहासिक पहलों और द्विपक्षीय समीकरणों का गवाह बनेगा:
रूस-भारत की अटूट साझेदारी: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन महज एक साल के भीतर दूसरी बार भारत आ रहे हैं, जो दोनों देशों के बीच गहरे रणनीतिक और व्यापारिक भरोसे को पुख्ता करता है।
भारत-चीन रिश्तों में नई शुरुआत: पूर्वी लद्दाख के गलवान तनाव के बाद चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का यह पहला भारत दौरा होगा। रूस के कज़ान में दोनों नेताओं की ऐतिहासिक मुलाकात और 2025 में पीएम मोदी की चीन यात्रा के बाद इस दौरे को सीमा विवाद सुलझाने और रिश्तों को सामान्य करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
ईरान का पहला उच्चस्तरीय दौरा: पश्चिम एशिया में तनाव शुरू होने के बाद से ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान का यह पहला भारत दौरा है, जहां ऊर्जा आपूर्ति और खाड़ी क्षेत्र की स्थिरता पर अहम चर्चा संभावित है।
इन देशों के शीर्ष नेतृत्व का भी होगा आगमन
सम्मेलन में रूस, चीन और ईरान के अलावा इंडोनेशिया, मिस्र (इजिप्ट), दक्षिण अफ्रीका और फिलीपींस के राष्ट्रपति शिरकत कर रहे हैं। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात (अबू धाबी) के क्राउन प्रिंस और सऊदी अरब के विदेश मंत्री भी अपने-अपने प्रतिनिधिमंडलों के साथ भारत पहुंचेंगे। इसके अलावा कई पार्टनर देशों, आउटरीच राष्ट्रों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख भी द्विपक्षीय बैठकों में हिस्सा लेंगे। लुटियंस दिल्ली के प्रमुख पांच सितारा होटलों को विदेशी मेहमानों के लिए तैयार कर चाक-चौबंद सुरक्षा घेरा बनाया गया है।
चौथी बार भारत के हाथ में कमान, जानिए थीम और विजन
भारत इससे पहले वर्ष 2012, 2016 और 2021 में ब्रिक्स की कमान संभाल चुका है और यह चौथा अवसर है जब भारत अध्यक्षता कर रहा है। इस बार सम्मेलन का मुख्य विषय ‘Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability’ रखा गया है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनकल्याण और समावेशी विकास के दर्शन को दर्शाता है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था का 40% हिस्सा ब्रिक्स के पास
2009 में गठित हुए इस समूह का दायरा अब काफी व्यापक हो चुका है। वर्तमान में इसके पूर्ण सदस्यों में भारत, ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब और यूएई शामिल हैं। वहीं 10 अन्य देश पार्टनर देशों के रूप में जुड़े हैं। यह समूह आज विश्व की कुल आबादी का 49 प्रतिशत और वैश्विक जीडीपी का 40 प्रतिशत हिस्सा कवर करता है।
भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान ब्रिक्स को महज राजनीतिक मंच न रखकर जन-सहभागिता से जोड़ा है। इसके तहत 35 मंत्री स्तरीय समूह और 100 से अधिक वर्किंग ग्रुप्स ने व्यापार, तकनीक, एआई, अंतरिक्ष, स्टार्टअप्स और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में 350 से ज्यादा बैठकें की हैं। आगामी 13 सितंबर को जारी होने वाले दिल्ली घोषणापत्र पर अब समूची दुनिया की टकटकी लगी है।

