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ट्विशा शर्मा केस CBI कोर्ट ट्रांसफर, सास गिरीबाला की याचिका पर सुनवाई टली

Twisha Sharma case : बहुचर्चित ट्विशा शर्मा मामले में जेल में बंद भोपाल की पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला की जमानत याचिका में अड़चन आ गई है। दो महिला न्यायाधीशों ने निजी कारणों से इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। इसके बाद भोपाल के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार श्रीवास्तव ने याचिका को सुनवाई के लिए सीबीआई की विशेष अदालत में स्थानांतरित कर दिया है।प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय ने मंगलवार देर शाम याचिका को सीबीआई अदालत में भेजने का आदेश दिया। हालांकि, सीबीआई के विशेष न्यायाधीश के अवकाश पर होने के कारण यह अनिश्चित है कि पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला की जमानत याचिका पर बुधवार को सुनवाई होगी या नहीं।

दो महिला जजों ने खुद को सुनवाई से किया अलग

यह सारा कानूनी नाटक तब शुरू हुआ जब गिरिबाला सिंह के वकील ने प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार श्रीवास्तव की अदालत में जमानत याचिका दायर की। इस पर संज्ञान लेते हुए अदालत ने जांच एजेंसी सीबीआई को केस डायरी पेश करने का निर्देश दिया। सीबीआई द्वारा केस डायरी प्रस्तुत करने के बाद, न्यायाधीश मनोज कुमार श्रीवास्तव ने मामले की सुनवाई के लिए इसे एक महिला न्यायाधीश को सौंप दिया।लेकिन संबंधित महिला न्यायाधीश ने आरोपी गिरिबाला के पारिवारिक समारोह में उपस्थित होने का हवाला देते हुए याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। इसके बाद मामला दूसरी महिला न्यायाधीश को सौंप दिया गया, लेकिन उन्होंने भी खुद को इस मामले से अलग कर लिया। लगातार दो महिला न्यायाधीशों द्वारा मामले की सुनवाई से हटने के बाद, जिला न्यायालय ने अंततः मामले को सीबीआई की विशेष अदालत को सौंपने का फैसला किया।

बुजुर्ग मां की सेहत और उम्र का हवाला देकर मांगी जमानत

गौरतलब है कि जमानत याचिका में, जेल में बंद आरोपी गिरिबाला ने अपनी बढ़ती उम्र, खराब स्वास्थ्य और अपनी बुजुर्ग मां की देखभाल की आवश्यकता का हवाला दिया था। उन्होंने यह भी दावा किया था कि उनके और उनकी दिवंगत बहू ट्विशा शर्मा के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध थे, इसलिए उन्हें राहत मिलनी चाहिए।

ट्विशा के परिवार ने किया जमानत का विरोध

दूसरी ओर, मृतक ट्विशा शर्मा के परिवार ने गिरिबाला की जमानत याचिका का कड़ा विरोध करने का फैसला किया है। परिवार का कहना है कि वे गिरिबाला की जमानत रद्द करने के पिछले उच्च न्यायालय के फैसले से संबंधित सभी महत्वपूर्ण तथ्यों, दस्तावेजों और सबूतों को निचली अदालत के समक्ष मजबूती से पेश करेंगे। परिवार किसी भी कीमत पर आरोपी को जमानत दिए जाने के पक्ष में नहीं है और उनका स्पष्ट मत है कि इस मामले में न्याय के लिए आरोपी को जेल में ही रहना चाहिए।(एजेंसी)

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