Wed. Jul 1st, 2026

सिंधु जल विवाद पर भड़के बिलावल भुट्टो, भारत को परमाणु युद्ध की दी धमकी

इस्लामाबाद: पाकिस्तान में सिंधु जल संधि को लेकर हंगामा जारी है। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो-जरदारी ने भारत को एक बार फिर धमकी देते हुए सिंधु जल संधि को निलंबित करने की बात कही। उन्होंने इस्लामाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तान की परमाणु नीति का जिक्र किया। उन्होंने चेतावनी दी कि देश के जल अधिकारों को कमजोर करने के किसी भीकोशिश का ‘राष्ट्रीय स्तर पर कड़ा जवाब’ दिया जा सकता है।

इस्लामाबाद में आयोजित एक अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार में बोलते हुए बिलावल भुट्टो ने सिंधु जल संधि को निलंबित करने के भारत के फैसले को पाकिस्तान की परमाणु नीति से जोड़ा। भारत ने पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था। तब से पाकिस्तान में आक्रोश का माहौल है और वह अंतर्राष्ट्रीय समर्थन जुटाने के लिए इस्लामाबाद में एक सम्मेलन आयोजित कर रहा है।

बिलावल भुट्टो की परमाणु गीदड़भभकी क्या है?

पाकिस्तान ने मंगलवार को सिंधु जल संधि पर एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया जिसमे भुट्टो ने तर्क दिया कि इस विवाद को केवल पर्यावरणीय या कूटनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और अस्तित्व का मामला माना जाना चाहिए। पीपीपी अध्यक्ष ने कहा कि पाकिस्तान का परमाणु सिद्धांत कुछ विशेष चरम स्थितियों के लिए है, जिनमें उसकी अर्थव्यवस्था और जलमार्गों के लिए खतरे शामिल है, जिन्हें राष्ट्रीय अस्तित्व के मामलों के रूप में देखा जाता है। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान की परमाणु नीति का एक प्रमुख पहलू यह है कि देश की अर्थव्यवस्था को अवरुद्ध करने या उसके जलमार्गों को बाधित करने के प्रयास उन दुर्लभ परिस्थितियों में आते हैं जिनके बारे में पाकिस्तान ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वे परमाणु जवाबी कार्रवाई का कारण बन सकते हैं।” बिलावल भुट्टो ने कहा कि यदि पाकिस्तान की जल आपूर्ति को प्रतिबंधित करने से “परमाणु तबाही” जैसी स्थिति उत्पन्न होती है, तो इस्लामाबाद को इसे अस्तित्व के लिए खतरा समझना चाहिए जिसके लिए एक व्यापक प्रतिक्रिया की आवश्यकता है।

बिलावल भुट्टो जरदारी ने आगे और क्या कहा?

बिलावल ने कहा, “हम शांति चाहते हैं, लेकिन सम्मान के साथ। हम संवाद चाहते हैं, लेकिन कानून के दायरे में रहकर। हम साथ रहना चाहते हैं, लेकिन किसी के सामने झुककर नहीं।” उन्होंने दावा किया कि जो कोई भी यह सोचता है कि पाकिस्तान अपने जल अधिकारों को छोड़ देगा, वह पाकिस्तान की जनता को नहीं जानता।

पहलगाम हमले के बाद भारत ने लिया था एक्शन

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने अप्रैल 2025 में सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था। तब से पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को उठाता रहा है। पाकिस्तान की लगभग 80 प्रतिशत कृषि सिंधु नदी पर निर्भर है, इसलिए यह संधि वहां अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। बिलावल ने इस मुद्दे पर धमकी भरा बयान पहली बार नहीं दिया है। 2025 में भी उन्होंने कहा था कि “या तो सिंधु में हमारा पानी बहेगा या उनका खून।” अब एक बार फिर उन्होंने परमाणु सिद्धांत का हवाला देकर संकेत दिया है कि पाकिस्तान इस मुद्दे को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और अस्तित्व से जोड़कर देख रहा है।

पाकिस्तान की परमाणु नीति क्या है?

उन्होंने कहा, “यदि पाकिस्तान के जल स्रोतों को अवरुद्ध करने से परमाणु युद्ध जैसी स्थिति उत्पन्न होती है, तो पाकिस्तान को इसे केवल एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं बल्कि पाकिस्तान के अस्तित्व पर हमला समझना चाहिए, जिसके लिए एक समन्वित सैन्य प्रतिक्रिया की आवश्यकता है।”आपको बता दें कि पाकिस्तान की परमाणु नीति ‘विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोध’ पर आधारित है और अब यह ‘पूर्ण-स्पेक्ट्रम प्रतिरोध’ में बदल गई है जिसका मतलब है कि इसका मकसद सीमित संघर्षों से लेकर बड़े पैमाने पर होने वाले युद्धों तक हर स्तर पर खतरों को रोकना है।

सिंधु जल संधि पर कितना निर्भर है पाकिस्तान?

पाकिस्तान की लगभग 80 प्रतिशत कृषि भूमि और अर्थव्यवस्था सिंधु नदी प्रणाली के जल पर निर्भर है। संधि के अनुसार, पूर्वी नदियों (रावी, ब्यास, सतलुज) का जल भारत के स्वामित्व में है, जबकि पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम, चिनाब) का जल पाकिस्तान को प्राप्त है। पाकिस्तान का आरोप है कि भारत बांधों और नहरों का निर्माण करके और जलवैज्ञानिक डेटा साझा न करके उसके अधिकारों का उल्लंघन कर रहा है, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था और ऊर्जा क्षेत्र खतरे में पड़ रहे हैं।

पाकिस्तान की परमाणु क्षमता क्या है?

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (एसआईपीआरआई) के अनुसार, परमाणु हथियारों की संख्या के मामले में पाकिस्तान अब भारत (190 परमाणु हथियार) से आगे निकल चुका है। पाकिस्तान के पास लगभग 170 परमाणु हथियार हैं। उसके अधिकांश परमाणु हथियार उच्च संवर्धन वाले यूरेनियम (एचईयू) पर आधारित हैं, और वह प्लूटोनियम का उत्पादन तेजी से बढ़ा रहा है।

भारत की ‘पहले इस्तेमाल न करने’ की नीति के विपरीत, पाकिस्तान की कोई स्पष्ट लिखित नीति नहीं है। उसकी रणनीति ‘पहले इस्तेमाल’ की है, जिसका अर्थ है कि संकट या युद्ध की स्थिति में वह भारत पर पहले परमाणु हमला कर सकता है। पाकिस्तान मिराज-III/V और F-16 विमानों के जरिए परमाणु बम गिरा सकता है। इसके अलावा, उसकी शाहीन-III मिसाइल की मारक क्षमता 2,750 किलोमीटर तक है, जो पूरे भारत को कवर कर सकती है। गौरी और गजनवी मिसाइलें भी परमाणु क्षमता से लैस हैं।(एजेंसी)

 

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