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राजस्थान में लिव-इन रिलेशनशिप पर भजनलाल सरकार सख्त, नियम तोड़ने पर 3 माह की जेल

Live-in Relationship Rules In India: अनुसूचित जनजाति परिवारों को छोड़कर, अब सभी धर्मों के परिवारों के लिए तलाक वैध होगा। पुनर्विवाह की प्रथा वाले किसी भी धर्म पर प्रतिबंध रहेगा। राज्य सरकार लिव-इन रिलेशनशिप से संबंधित शिकायतों को कम करने के लिए कड़े प्रावधान लागू कर रही है। अब, 18 वर्ष से कम आयु के साथी के साथ रहने पर पीओसीएसओ (पुलिस बल का उल्लंघन) का मामला दर्ज किया जाएगा, और बिना पूर्व सूचना के एक महीने से अधिक समय तक लिव-इन रिलेशनशिप में रहने पर तीन महीने तक की कैद हो सकती है।

राजस्थान में मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित नागरिक संहिता विधेयक में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और लिव-इन रिलेशनशिप से संबंधित कानूनी प्रावधानों के बारे में लगभग 400 धाराएं होंगी।इनके माध्यम से राज्य में सभी धर्मों के लोगों के लिए एक समान कानूनी प्रावधान किए जाएंगे। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 की भावना के अनुरूप ‘द राजस्थान यूनिफॉर्म सिविल कोड (समान नागरिक संहिता) विधेयक-2026’ तैयार किया गया है, जो अब विधानसभा में पेश किया जाएगा। संविधान के तहत संरक्षित पारंपरिक अधिकारों वाले वर्गों को भी इससे बाहर रखा गया है।

लिव-इन के साथ UCC में और क्या है?

पुत्र और पुत्री को समान अधिकार।वसीयत न करने पर मृत्यु होने की स्थिति में संपत्ति के हस्तांतरण के संबंध में तीन श्रेणियां हैं। पहली श्रेणी में जीवित पति-पत्नी, उनके जीवित बच्चे, पति-पत्नी और मृतक बच्चों और माता-पिता के बच्चे शामिल हैं। दूसरी श्रेणी में सौतेले माता-पिता, भाई-बहन, पति-पत्नी और मृतक भाई-बहनों के बच्चे, माता-पिता के भाई-बहन, दादा-दादी और नाना-नानी शामिल हैं। तीसरी श्रेणी में पहले दो श्रेणियों के अलावा अन्य रिश्तेदार शामिल हैं। यदि किसी भी श्रेणी से कोई उत्तराधिकारी नहीं है, तो संपत्ति सरकार की हो जाती है।

विवाह-तलाक के संबंध में

-लड़की की न्यूनतम आयु 18 वर्ष व लड़के की न्यूनतम आयु 21 वर्ष, यह सभी धर्मों पर लागू।
-बहुविवाह मान्य नहीं, विवाह विच्छेद कोर्ट से ही।
-विवाह या तलाक पंजीकरण का 15 दिनों के भीतर प्रमाण पत्र जारी करना जरूरी।
-आवेदन खारिज करने पर रजिस्ट्रार को कारण बताना होगा।
-आवेदन खारिज होने पर 30 दिनों में रजिस्ट्रार जनरल को अपील, जिसका निस्तारण 60 दिनों के भीतर।
-पंजीकरण न होने या देरी होने मात्र से विवाह अमान्य नहीं माना जाएगा।
-पंजीकरण न कराने पर 10 हजार रुपए तक और नोटिस की अनदेखी करने पर 25 हजार रुपए तक जुर्माना।
-पंजीकरण प्रक्रिया में देरी पर रजिस्ट्रार पर 25 हजार तक जुर्माना।

भरण-पोषण के मामले में

-सभी धर्मों में प्रावधान एक समान होंगे।
-बिना सूचना एक माह से अधिक लिव इन संबंधों में रहने पर तीन माह की जेल, 10 हजार तक जुर्माना।
-गलत सूचना देने पर तीन माह की जेल, 10 हजार रुपए तक जुर्माना।
-नोटिस का जवाब नहीं देने पर 6 माह की जेल, 25 हजार रुपए तक जुर्माना।
-जबरन सहमति पर 5 साल की जेल।
-नाबालिग को शादीशुदा की तरह रखने पर पॉक्सो में केस चलेगा।

गुजरात की तर्ज पर तैयार किया गया विधेयक

यह विधेयक गुजरात विधेयक के अनुरूप तैयार किया गया है, और दोनों राज्यों के लिए मसौदा विधेयकों को अंतिम रूप देने के लिए सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया था। मसौदा विधेयक में विवाह पंजीकरण को अनिवार्य बनाया गया है और बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाया गया है। हालांकि सभी धर्मों और समुदायों में उनकी परंपराओं एवं रीतियों (जैसे सप्तपदी, निकाह, आनंदा कारज, होली यूनियन आदि) के अनुसार विवाह कराने की स्वतंत्रता होगी, लेकिन कानून लागू होने पर लिक इन रिलेशनशिप अथवा सभी तरह के विवाहों का 60 दिन के भीतर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।(एजेंसी)

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