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UP चुनाव से पहले कांग्रेस की बड़ी सर्जरी: क्या आराधना मिश्रा बनेंगी नई प्रदेश अध्यक्ष? अजय राय की विदाई की चर्चा तेज

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की चुनावी बिसात पर अपनी खोई सियासी जमीन वापस पाने की जद्दोजहद में जुटी कांग्रेस पार्टी संगठन के शीर्ष स्तर पर बड़ा उलटफेर करने जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की कमान मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के हाथों से लेकर रामपुर खास से विधायक आराधना मिश्रा ‘मोना’ को सौंपी जा सकती है। पार्टी हाईकमान चुनावी मुकाबले में उतरने से पहले संगठन को नया चेहरा देकर कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने और जातीय संतुलन को अपने पक्ष में मोड़ने की रणनीति पर मंथन कर रहा है।

मजबूत सियासी विरासत और अजेय चुनावी रिकॉर्ड

वरिष्ठ कांग्रेसी नेता व राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी की बेटी आराधना मिश्रा प्रदेश की सियासत में एक मंझा हुआ चेहरा मानी जाती हैं। प्रतापगढ़ जिले की रामपुर खास सीट पर उनके परिवार का दशकों से दबदबा रहा है। पिता के 9 बार विधायक रहने के बाद आराधना मिश्रा ने 2014 के उपचुनाव में जीत हासिल की और इसके बाद 2017 व 2022 के आम चुनावों में भी लगातार जीत का परचम लहराया। साल 2022 में जब प्रदेशभर में पार्टी महज दो सीटों पर सिमट गई थी, तब उन्होंने अपनी सीट जीतकर यह साबित कर दिया था कि जमीनी स्तर पर उनका जनाधार कितना मजबूत है।

100 से अधिक सीटों पर असरदार ब्राह्मण वोट बैंक साधने की तैयारी

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आराधना मिश्रा को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर कांग्रेस राज्य के 12 से 14 प्रतिशत ब्राह्मण वोट बैंक में अपनी पुरानी पैठ दोबारा बनाना चाहती है। सूबे की 100 से ज्यादा विधानसभा सीटों पर ब्राह्मण मतदाता चुनाव का रुख तय करने की ताकत रखते हैं। इसके साथ ही, एक मुखर और सक्रिय महिला नेत्री को प्रदेश की कमान सौंपकर पार्टी महिला मतदाताओं के बीच भी एक मजबूत संदेश देने की तैयारी में है।

मतभेदों की सुगबुगाहट और सपा के साथ गठबंधन की रणनीति

मौजूदा अध्यक्ष अजय राय भूमिहार समुदाय से आते हैं, लेकिन हाल के दिनों में उनके और प्रदेश प्रभारी राजेंद्र गौतम के बीच तालमेल को लेकर सवाल उठते रहे हैं, भले ही दोनों नेताओं ने इसे खारिज किया हो। आगामी चुनाव में कांग्रेस अकेले मैदान में उतरने के बजाय समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ गठबंधन में ताल ठोकने जा रही है। ऐसे में आलाकमान किसी भी आंतरिक मतभेद को खत्म कर एक ऐसे चेहरे को आगे लाना चाहता है जो न केवल गठबंधन के साथ बेहतर सामंजस्य बैठा सके, बल्कि पारंपरिक वोटरों को भी पार्टी से जोड़ सके।

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