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RDA प्लॉट आवंटन पर बवाल, कचना की जमीन के बदले सड्डू में भूखंड का आरोप

RDA

रायपुर विकास प्राधिकरण (RDA) की लाभांडी-कचना-सड्डू नगर विकास योजना में फाइनल प्लॉट के पुनर्गठन को लेकर विवाद सामने आया है। विवाद का केंद्र सड्डू का प्लॉट नंबर 25 है, जिसका क्षेत्रफल करीब 2,168 वर्गमीटर यानी 23,327 वर्गफीट बताया जा रहा है। कांग्रेस नेता डॉ. राकेश गुप्ता ने आरोप लगाया है कि यह भूखंड मंत्री केदार कश्यप की पत्नी से जुड़ी राधिका पैलेस प्राइवेट लिमिटेड को कचना की जमीन के बदले प्रस्तावित किया गया है।

कांग्रेस ने इस मामले में आवंटन प्रक्रिया की पारदर्शिता और नियमों के पालन पर सवाल उठाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। दूसरी ओर, RDA की ओर से कहा गया है कि भूखंडों को लेकर दावा-आपत्ति की प्रक्रिया है और प्राप्त आपत्तियों की समिति के स्तर पर जांच की जाएगी।

23,327 वर्गफीट का प्लॉट बना विवाद की वजह

डॉ. राकेश गुप्ता के मुताबिक राधिका पैलेस प्राइवेट लिमिटेड की कचना के नालापारा क्षेत्र में करीब 1.33 एकड़ जमीन है। उनका दावा है कि नगर विकास योजना में इस जमीन को शामिल किए जाने के बाद कंपनी के लिए सड्डू में प्लॉट नंबर 25 प्रस्तावित किया गया।

बताई गई जानकारी के अनुसार यह भूखंड 2,168 वर्गमीटर यानी लगभग 23,327 वर्गफीट का है। कांग्रेस नेता का कहना है कि प्रस्तावित प्लॉट 150 फीट चौड़ी MR-43 सड़क के आसपास स्थित है, इसलिए इसकी लोकेशन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

कचना में जमीन, सड्डू में फाइनल प्लॉट पर सवाल

पूरे विवाद में कांग्रेस का मुख्य सवाल मूल जमीन और प्रस्तावित फाइनल प्लॉट की लोकेशन को लेकर है। डॉ. गुप्ता का कहना है कि कंपनी की मूल जमीन कचना में है, जबकि बदले में सड्डू में भूखंड प्रस्तावित किया गया है।

कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 की धारा 50 के प्रावधानों का हवाला देते हुए पुनर्गठन प्रक्रिया की जांच की मांग की है। पार्टी का कहना है कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि फाइनल प्लॉट तय करने के लिए कौन से नियम, मापदंड और गणना अपनाई गई।

इस मामले में मूल जमीन और प्रस्तावित प्लॉट के बीच दूरी तथा दोनों इलाकों की लोकेशन को लेकर लगाए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के जरिए होना बाकी है।

MR-43 सड़क के पास होने का भी दावा

कांग्रेस नेता ने प्रस्तावित भूखंड की लोकेशन को लेकर एक और महत्वपूर्ण दावा किया है। उनके मुताबिक प्लॉट नंबर 25 प्रस्तावित MR-43 सड़क के नजदीक है। इसी वजह से उन्होंने इसकी संभावित बाजार कीमत को लेकर सवाल उठाए हैं।

कुछ रिपोर्टों में कांग्रेस नेता के अनुमान के आधार पर भूखंड की संभावित कीमत करीब 20 करोड़ रुपये या उससे अधिक बताई गई है। हालांकि यह RDA की ओर से घोषित कीमत नहीं है, बल्कि भविष्य की बाजार कीमत को लेकर लगाया गया अनुमान है।

राधिका पैलेस कंपनी को लेकर क्या कहा गया?

कांग्रेस ने राधिका पैलेस प्राइवेट लिमिटेड और मंत्री केदार कश्यप की पत्नी शांति कश्यप के संबंध का भी मुद्दा उठाया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार शांति कश्यप का नाम कंपनी की निदेशक के तौर पर सामने आता है। कांग्रेस ने इसी संबंध के आधार पर प्लॉट आवंटन की प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।

हालांकि, इन आरोपों से यह स्वतः साबित नहीं होता कि आवंटन में नियमों का उल्लंघन हुआ है। इसका निर्धारण संबंधित दस्तावेजों, दावा-आपत्तियों और सक्षम स्तर पर होने वाली जांच के बाद ही हो सकेगा।

मुख्य सचिव से जांच की मांग

डॉ. राकेश गुप्ता ने मामले को लेकर मुख्य सचिव से शिकायत कर पूरी योजना और भूखंडों के पुनर्गठन की जांच की मांग की है। कांग्रेस का कहना है कि जांच पूरी होने तक योजना में आगे की कार्रवाई रोक दी जानी चाहिए।

पार्टी ने यह भी सवाल उठाया है कि नगर विकास योजना में अलग-अलग भू-स्वामियों को अंतिम भूखंड किस आधार पर दिए गए और प्रमुख सड़क के आसपास स्थित भूखंडों के आवंटन में कौन से मानदंड लागू किए गए।

RDA ने बताई दावा-आपत्ति की प्रक्रिया

RDA की ओर से कहा गया है कि नगर विकास योजना के तहत भूखंडों के पुनर्गठन और आवंटन की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार की गई है। RDA CEO अवनीश शरण के मुताबिक भूखंड आवंटन को लेकर दावा-आपत्ति आमंत्रित की गई है।

आपत्तियां मिलने के बाद संबंधित समिति उनका परीक्षण करेगी और उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। यानी फिलहाल प्रस्तावित आवंटन को लेकर अंतिम स्थिति दावा-आपत्ति और जांच की प्रक्रिया से जुड़ी हुई है।

जांच के बाद साफ होगी तस्वीर

RDA की लाभांडी-कचना-सड्डू योजना से जुड़े इस विवाद में फिलहाल कांग्रेस के आरोप, संबंधित दस्तावेजों में दर्ज भूखंड की जानकारी और RDA की प्रक्रिया सामने है। विवाद का मुख्य केंद्र कचना की मूल जमीन के बदले सड्डू में प्रस्तावित प्लॉट नंबर 25, उसकी लोकेशन और पुनर्गठन के नियम हैं।

अब दावा-आपत्तियों की जांच और संबंधित दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि प्रस्तावित भूखंड का आवंटन किस आधार पर किया गया और प्रक्रिया में नियमों का पालन किस तरह हुआ।

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