‘पेद्दी’ से राम चरण ने रचा नया इतिहास, करियर की सबसे बड़ी फिल्म बनने की ओर कदम
Peddi Movie Review:
Peddi Movie Review: इंडियन सिनेमा के बदलते समय में जब ऑडियंस घिसी-पिटी कहानियों से थक चुकी है, ‘पेद्दी’ जैसी फिल्में साबित करती हैं, कि एक जबरदस्त कहानी और लीड एक्टर की सच्ची लगन से बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रचा जा सकता है। वृद्धि सिनेमाज, मैथरी मूवी मेकर्स और जिओ स्टूडियो (नॉर्थ इंडिया डिस्ट्रीब्यूटर) के साथ मिलकर बनी यह फिल्म गांव के भारत की मिट्टी से जुड़ी एक कहानी है, जो हिम्मत, सेल्फ-रिस्पेक्ट, त्याग और कभी हार न मानने वाले जज्बे को बड़े पर्दे पर दिखाती है। आइए इस विस्तृत समीक्षा में फिल्म के हर पहलू का विस्तार से विश्लेषण करें।
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फिल्म की कहानी
‘पेद्दी’ गांव के भारत (खासकर आंध्र प्रदेश के पहाड़ी इलाकों) की उपजाऊ मिट्टी के बैकग्राउंड पर बनी है एकफिल्म है। यह एक सीधे-सादे लेकिन निडर लड़के ‘पेद्दी’ (राम चरण) के सफर को दिखाती है, जो अपनी आत्मसम्मान की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। कहानी तब मोड़ लेती है जब समाज के ताकतवर और असरदार लोग उसकी और उसके अपनों की आत्मसम्मान को कुचलने की कोशिश करते हैं। पेद्दी जुल्म के आगे झुकने और अपनी आत्मसम्मान से समझौता करने से साफ मना कर देता है। इसके बाद पारंपरिक कुश्ती, मिट्टी के अखाड़े और हक की लड़ाई का एक सिलसिला शुरू होता है, जो सिर्फ फिजिकल ताकत की लड़ाई नहीं है, बल्कि दिमागी मजबूती का भी टेस्ट है। राइटिंग टीम (बुच्ची बाबू सना, कृष्णा हरि, नागेंद्र कासी और वर प्रकाश टोलेटी) ने हिम्मत और इमोशन की एक ऐसी कहानी बुनी है, जो दर्शकों को शुरू से आखिर तक बांधे रखती है। फिल्म की सबसे बड़ी ताकत यह है कि हीरो की हर जीत सच में कमाई हुई लगती है। जब पेद्दी हारता है, तो दर्शकों की आंखों में आंसू आ जाते हैं और जब वह अखाड़े में बुरी तरह हारकर जीतता है, तो पूरा थिएटर तालियों और सीटियों से गूंज उठता है।
एक्टिंग और परफॉर्मेंस
यह पूरी फिल्म सिर्फ राम चरण की है। ग्लोबल ब्लॉकबस्टर ‘RRR’ में अल्लूरी सीताराम राजू के अपने यादगार रोल के बाद, राम चरण अपने करियर की सबसे अच्छी और दमदार परफॉर्मेंस में से एक देते हैं। एक पहलवान के रूप में उनका फिजिकल ट्रांसफॉर्मेशन जितना कमाल का है, स्क्रीन पर उनका शांत स्वभाव और आंखों की एक्टिंग भी उतनी ही कमाल की है। वह न सिर्फ इस किरदार में खरे उतरते हैं, बल्कि अपनी स्टार पावर और गहराई से इसे हाल के सालों के सबसे मजबूत ऑन-स्क्रीन किरदारों में से एक बनाते हैं। फिल्म की स्टार कास्ट की सबसे खास बात यह है कि फिल्म का फोकस पूरी तरह से राम चरण पर होने के बावजूद, हर को-स्टार का रोल अच्छी तरह से बुना गया है। हर किरदार का एक अहम रोल है और कहानी को आगे बढ़ाता है। कन्नड़ सुपरस्टार शिवा राजकुमार अपनी दमदार स्क्रीन प्रेजेंस से कई खास सीन में जान डाल देते हैं। जगपति बाबू ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उन्हें कैसा भी करिदार दे दिया जाए वह उसे बेहतरीन बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ते। दिव्येंदु शर्मा ने अपने रोल में कमाल का बैलेंस बनाया है, जिससे फिल्म को एक यूनिक टोन मिला है, जबकि जाह्नवी कपूर का स्क्रीन स्पेस थोड़ा कम है, लेकिन जितनी भी देर वह पर्दे पर नजर आती हैं… उन्हें देखना अच्छा लगता है। एक चुलबली लड़की के किरदार में उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया है।
म्यूजिक और बैकग्राउंड म्यूजिक
ऑस्कर विनर एआर रहमान का म्यूजिक इस फिल्म की रीढ़ है, लेकिन यहां एक दिलचस्प अंतर साफ दिखता है। अनंथा श्रीराम, बालाजी, गणेश और सलादी के लिखे गानों के मतलब वाले बोल बहुत अच्छे लिखे गए हैं और ‘चिक्किरी चिक्किरी’ और ‘राय राय रा रा’ जैसे गाने साउथ में ब्लॉकबस्टर रहे हैं। हालांकि, फिल्म के गाने हिंदी भाषा वालों को थोड़े निराश करेंगे। कंपोजिशन और डबिंग भाषा हिंदी दर्शकों के टेस्ट से थोड़ा अलग लग सकता है, जिससे वे गानों से कनेक्ट भी नहीं कर पाएंगे। रहमान ने गानों की इस कमी को अपने बैकग्राउंड स्कोर से पूरी तरह से पूरा कर दिया है। फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर सच में दमदार है और यही इस फिल्म की असली जान है। जब भी राम चरण स्क्रीन पर आते हैं या अखाड़े में कोई हाई-इंटेंसिटी फाइट सीन होता है, तो रहमान का क्रिस्प और लाउड BGM थिएटर में दर्शकों के रोंगटे खड़े कर देती है।
अंतिम फैसला
इन छोटी-मोटी कमियों के बावजूद, ‘पेद्दी’ का क्लाइमैक्स बिल्कुल दिल को छू लेने वाला है. आखिरी 25-30 मिनट में ड्रामा और जबरदस्त रेसलिंग मैच फिल्म की सभी कमियों पर भारी पड़ते हैं। ‘पेद्दी’ सिर्फ देखने लायक नहीं है, बल्कि एक शानदार सिनेमैटिक एक्सपीरियंस है जो इंस्पायर करती है, पूरी तरह से एंटरटेन करती है और थिएटर से निकलने के बाद भी आपके दिमाग में लंबे समय तक रहती है। बड़े पर्दे पर राम चरण की यह करियर की सबसे अच्छी, दमदार परफॉर्मेंस मिस न करें। (एजेंसी)

