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समर स्पेशल ट्रेन में क्या गड़बड़ी हुई कि यात्रियों का फूट पड़ा गुस्सा? मचा गया हंगामा, पढ़िए पूरी खबर

समर स्पेशल ट्रेन

भीषण गर्मी के बीच समर स्पेशल ट्रेन में सफर कर रहे यात्रियों को उस समय भारी परेशानी का सामना करना पड़ा, जब गोंदिया-रक्सौल समर स्पेशल ट्रेन के एसी कोच ने रास्ते में ही काम करना बंद कर दिया। लगातार शिकायतों के बावजूद समस्या हल नहीं होने पर यात्रियों ने बिलासपुर स्टेशन पर जमकर विरोध प्रदर्शन किया।

सफर के दौरान ही शुरू हुई दिक्कत

सुबह करीब 6:30 बजे गोंदिया से रवाना हुई इस ट्रेन के बी1 और बी2 एसी कोच में थोड़ी देर बाद ही कूलिंग बंद हो गई। यात्रियों ने डोंगरगढ़, राजनांदगांव और दुर्ग स्टेशनों पर कई बार शिकायत की, लेकिन हर बार उन्हें आगे समस्या ठीक होने का भरोसा दिया जाता रहा।

बिलासपुर पहुंचते ही यात्रियों ने किया हंगामा

करीब 8 घंटे तक गर्मी में सफर करने के बाद ट्रेन जब दोपहर 2:40 बजे बिलासपुर स्टेशन पहुंची, तो यात्रियों का गुस्सा भड़क उठा। एसी कोच के यात्री प्लेटफॉर्म पर उतर आए और हंगामा शुरू कर दिया। इस दौरान पानी की कमी को लेकर भी नाराजगी जताई गई।

चेन पुलिंग से रोकी गई ट्रेन

स्थिति उस समय और बिगड़ गई जब ट्रेन आगे बढ़ने लगी और यात्रियों ने चेन पुलिंग कर उसे रोक दिया। मौके पर आरपीएफ और रेलवे स्टाफ पहुंचा, लेकिन एसी ठीक हुए बिना यात्री आगे जाने को तैयार नहीं थे।

जांच में सामने आई बड़ी चूक

बाद में मैकेनिकल टीम की जांच में सामने आया कि कोच की बैटरी चार्ज नहीं थी, जिसकी वजह से एसी पूरी तरह बंद हो गया था। मौके पर ही डायरेक्ट करंट से बैटरी चार्ज कर कूलिंग शुरू की गई, लेकिन यात्री आश्वासन के बिना शांत नहीं हुए।

समर स्पेशल ट्रेन

लिखित आश्वासन के बाद रवाना हुई ट्रेन

यात्रियों ने ट्रेन में मैकेनिक भेजने और समस्या दोबारा न आने का लिखित आश्वासन मांगा। रेलवे अधिकारियों ने उनकी मांग मानते हुए दो मैकेनिक साथ भेजे। इसके बाद शाम करीब 4:30 बजे ट्रेन को रवाना किया गया। इस दौरान ट्रेन कुल 5 घंटे देरी से चल रही थी।

दूरंतो एक्सप्रेस में भी आई थी तकनीकी दिक्कत

इसी दिन शाम को पुणे से हावड़ा जा रही दूरंतो एक्सप्रेस में भी एसी कूलिंग की शिकायत सामने आई थी। हालांकि वहां पहले से मौजूद मैकेनिकों ने कुछ ही मिनटों में समस्या ठीक कर दी।

ठेके पर मेंटेनेंस व्यवस्था पर उठे सवाल

इस घटना के बाद रेलवे की मेंटेनेंस प्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। कोच और एसी की देखरेख का काम निजी एजेंसियों को दिए जाने के कारण ऐसी लापरवाही सामने आई है। जानकारी के मुताबिक, ट्रेन रवाना होने से पहले बैटरी को पूरी तरह चार्ज नहीं किया गया था, जबकि इसमें कई घंटे का समय लगता है।

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