फ्लोरिडा से वर्जीनिया तक भारतीय नेताओं की धाक, पिया दांडिया ने रचा इतिहास; ओहियो हारे रामास्वामी
वॉशिंगटन। अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के ताजा जनादेश में भारतीय मूल के नेताओं ने अमेरिकी राजनीति में अपने बढ़ते रसूख को एक बार फिर साबित किया है। इस चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी से ताल्लुक रखने वाले कई प्रमुख भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवारों ने ऐतिहासिक अंतर से जीत दर्ज की अथवा मजबूत बढ़त बनाई, जबकि रिपब्लिकन खेमे से मैदान में उतरे कुछ प्रमुख चेहरों को कड़ी चुनावी बाधाओं और हार का सामना करना पड़ा है। जहां एक तरफ फ्लोरिडा और वर्जीनिया से भारतीय मूल के नेताओं ने संसद में अपनी सीट पक्की की, वहीं ओहियो में गवर्नर पद के कड़े मुकाबले में रिपब्लिकन नेता विवेक रामास्वामी (vivek ramaswamy) चुनावी रेस से बाहर हो गए।
पिया दांडिया ने रचा इतिहास
फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से डेमोक्रेटिक पार्टी की भारतीय मूल की उम्मीदवार पिया दांडिया ने रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी केसी असकर को पराजित कर ऐतिहासिक जीत अपने नाम की। इस सीट पर मतगणना की शुरुआत से लेकर अंतिम दौर तक पिया दांडिया की बढ़त लगातार कायम रही। कुल 2.92 लाख से अधिक मतों की गणना और लगभग 97 प्रतिशत से अधिक वोटों की गिनती पूरी होने के बाद दांडिया को करीब 52 प्रतिशत मत मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी केसी असकर लगभग 48 प्रतिशत मतों तक ही पहुंच पाए।
सुहास सुब्रमण्यम ने लगातार दूसरी बार जीत की दर्ज
वर्जीनिया के 10वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से मौजूदा डेमोक्रेट सांसद सुहास सुब्रमण्यम ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज कर अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ दिखाई। मतगणना के दौरान सुहास सुब्रमण्यम को 61 प्रतिशत से अधिक मत मिले, जबकि रिपब्लिकन उम्मीदवार डेव बेकविथ बड़े अंतर से पीछे छूट गए। सुब्रमण्यम ने वर्ष 2024 में वर्जीनिया से अमेरिकी संसद पहुंचने वाले पहले भारतीय-अमेरिकी बनकर इतिहास रचा था। अपनी इस शानदार जीत के बाद उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनावी मुकाबला समाप्त हो चुका है और अब वाशिंगटन में जनता के लिए बदलाव लाने का कार्य शुरू होगा।
अरुणा मिलर ने डिप्टी गवर्नर पद पर जमाया कब्जा
मैरीलैंड के चुनावी समर में अरुणा मिलर ने अपनी शीर्ष प्रशासनिक स्थिति सफलतापूर्वक बरकरार रखी है। डेमोक्रेटिक गवर्नर वेस मूर के दोबारा चुने जाने के साथ ही अरुणा मिलर ने डिप्टी गवर्नर पद पर फिर से कब्जा जमाया। अमेरिका के किसी राज्य में दूसरे सबसे बड़े प्रशासनिक पद पर उनकी यह वापसी भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
विवेक रामास्वामी को बड़ा झटका
दूसरी ओर, ओहियो के गवर्नर पद के हाई-प्रोफाइल चुनावी संग्राम में केरल मूल के भारतीय-अमेरिकी रिपब्लिकन नेता विवेक रामास्वामी (vivek ramaswamy) को बड़ा झटका लगा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस के आक्रामक समर्थन के बावजूद रामास्वामी ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एमी एक्टन के हाथों अपनी हार स्वीकार कर ली। इस कड़े मुकाबले में 60 वर्षीय चिकित्सक और ओहियो की पूर्व स्वास्थ्य निदेशक एमी एक्टन ने लगभग 51 प्रतिशत वोट हासिल किए, जबकि विवेक रामास्वामी (vivek ramaswamy) को करीब 46 प्रतिशत मतों से संतोष करना पड़ा। इस विजय के साथ एमी एक्टन ओहियो की पहली निर्वाचित महिला गवर्नर बनी हैं और साथ ही 2006 के बाद इस पद पर काबिज होने वाली पहली डेमोक्रेटिक नेता भी बन गई हैं। ओहियो जैसे राज्य में, जहां 2024 के चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप ने आसान जीत हासिल की थी, रामास्वामी (vivek ramaswamy) की यह शिकस्त रिपब्लिकन पार्टी के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है।
अन्य ने भी रचा इतिहास
अन्य भारतीय मूल के प्रत्याशियों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो मैसाचुसेट्स में सीनेटर पद के चुनाव में डेमोक्रेटिक सीनेटर एड मार्की की जीत के बाद भारतीय मूल के निर्दलीय उम्मीदवार शिवा अय्यादुरई को हार का सामना करना पड़ा। उत्तरी कैरोलिना के चौथे कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट में रिपब्लिकन उम्मीदवार महेश “मैक्स” गणोरकर को डेमोक्रेटिक सांसद वैलेरी फाउशी से मात मिली। वहीं जॉर्जिया के हाउस डिस्ट्रिक्ट-97 में भारतीय मूल के डेमोक्रेटिक प्रत्याशी ज्योत सिंह रिपब्लिकन उम्मीदवार यासीन मोगाजी के खिलाफ बढ़त बनाए हुए थे। इसके अतिरिक्त टेक्सास से पूजा सेठी, न्यूयॉर्क से सरिता कोमाटिरेड्डी और एरिजोना से अमीष शाह जैसे भारतीय मूल के उम्मीदवारों के नतीजों का इंतजार बना हुआ था।

