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चुनावी हार के बाद बदले ट्रंप के तेवर, बोले- डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर करेंगे काम

अमेरिकी मिडटर्म चुनाव: अमेरिकी मिडटर्म चुनाव हारने के बाद, अकड़ दिखाने वाले ट्रंप की अकड़ अब फीकी पड़ गई है। चुनाव के दौरान बयानबाजी, दांव-पेच और अन्य तरह की बयानबाजी पर निर्भर रहने वाले डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वे अमेरिका के लिए हालात बेहतर बनाने के लिए डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर काम करेंगे। जैसे-जैसे चुनाव के नतीजे सामने आने लगे, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी पार्टी को पिछड़ते देख दावा किया कि उन्हें विपक्षी दल के सदस्यों के फोन आए थे।

सीएनएन के अनुसार, पॉलिटिको को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उनका प्रशासन डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर “देश के लिए हालात बेहतर बनाने” का काम करेगा। चुनाव की रात के लाइवस्ट्रीम के दौरान ट्रंप ने कहा, “हम डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि हमारे देश के लिए सब कुछ ठीक हो। यह बहुत महत्वपूर्ण है।”

अपने लहजे में नरमी लाते हुए ट्रंप ने कहा कि हालांकि उन्हें डेमोक्रेटिक-नियंत्रित कांग्रेस से आने वाले किसी भी कानून को वीटो करने का अधिकार है, लेकिन वह “अगले दो साल तक यूं ही बैठे रहकर हर चीज को वीटो नहीं करना चाहते।” ट्रंप ने इससे पहले इसके विपरीत संकेत दिए थे, यहां तक ​​कि खुद को “मिस्टर वीटो” भी कहा था।

दरअसल, चुनाव प्रचार के दौरान ट्रंप ने लगातार अपनी पार्टी के उम्मीदवारों का समर्थन किया। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवारों से यह भी आग्रह किया कि वे अपने चुनाव प्रचार के दौरान मतदाताओं को बताएं कि ट्रंप भी चुनाव लड़ रहे हैं। हालांकि, नतीजों ने रिपब्लिकन पार्टी के लिए मुश्किल स्थिति खड़ी कर दी है। डेमोक्रेट्स ने उन राज्यों में भी पैठ बना ली है जिन्हें लंबे समय से रिपब्लिकन का गढ़ माना जाता था। ट्रंप ने ‘पोलिटिको’ को बताया, “उनके फोन आ चुके हैं और वे मेरे साथ मिलकर काम करना चाहते हैं।” हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि उन्हें असल में किन लोगों ने फोन किया है।

भले ही ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ने के ट्रंप के फैसले से रिपब्लिकन पार्टी को भारी नुकसान हुआ, लेकिन राष्ट्रपति ने अपने फैसले का बचाव किया। उन्होंने कहा, “कई लोग कहते हैं कि ईरान की वजह से तेल की कीमतें गिरीं, लेकिन मुझे पूरा विश्वास है कि ईरान पर मेरा फैसला हमारे देश और दुनिया के दीर्घकालिक हित में था। यह बिल्कुल सही फैसला था और आज भी सही फैसला है।”

चुनावी नतीजों से कैसे कमजोर हो गए ट्रंप

प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों में डेमोक्रेटिक पार्टी की बढ़ती पकड़ के साथ, अमेरिकी कांग्रेस की स्थिति में बदलाव आने वाला है। शुरुआती चुनाव परिणामों और मीडिया अनुमानों से संकेत मिलता है कि दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स को बहुमत मिलने के बाद, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का अमेरिकी कांग्रेस पर नियंत्रण नहीं रहेगा। अब उन्हें प्रतिनिधि सभा में निर्णय लेने और विधेयक पारित करने के लिए डेमोक्रेट्स के समर्थन की आवश्यकता होगी।

डेमोक्रेट ट्रंप प्रशासन, उनके परिवार और सहयोगियों से जुड़े मामलों की जांच करने की तैयारी कर रहे हैं। सीनेट में बहुमत होने से राष्ट्रपति द्वारा की जाने वाली नियुक्तियों पर डेमोक्रेट्स का प्रभाव भी बढ़ेगा। इसलिए, अगर ट्रंप के खिलाफ जांच शुरू होती है, तो उन्हें न केवल गहन जांच का सामना करना पड़ेगा, बल्कि अपनी नीतियों से संबंधित विधेयकों को पारित कराने के लिए डेमोक्रेट्स के समर्थन की भी आवश्यकता होगी।चुनाव प्रचार के दौरान डेमोक्रेट्स पर लगातार हमलावर रहे ट्रंप ने अब उन्हें बधाई दी है और साथ मिलकर काम करने की बात कही है।

CBS News से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, “मेरा संदेश डेमोक्रेट्स को बधाई देने का है। मैं अपने देश की भलाई के लिए उनके साथ काम करने के लिए उत्सुक हूं।” उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि डेमोक्रेट्स उनके साथ काम करना चाहेंगे। हालांकि, ट्रंप ने अपने वीटो पावर का हवाला देते हुए कहा कि अगर विपक्षी पार्टी उनके साथ काम नहीं करना चाहती है, तो वह उनके बिलों को वीटो कर सकते हैं।

अब ट्रंप के सामने होगी नई चुनौती

दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स को बहुमत मिलने के साथ ही अगले दो वर्षों में ट्रंप के लिए शासन करना और भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। सदन में डेमोक्रेटिक नेता हकीम जेफ्रीज़ स्पीकर बन सकते हैं। इससे डेमोक्रेट्स को संसदीय समितियों और जांचों पर भी अधिक अधिकार मिल जाएगा।

यह स्थिति ट्रंप के लिए नई नहीं है। 2018 के मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी ने प्रतिनिधि सभा पर अपना नियंत्रण खो दिया था। उस समय ट्रंप ने विपक्ष के साथ मिलकर काम करने की बात कही थी, लेकिन दोनों पार्टियां कई मुद्दों पर आपस में टकराती रहीं। अब, अमेरिकी संसद में सत्ता का संतुलन एक बार फिर बदल रहा है, ऐसे में ट्रंप को विपक्ष के साथ समन्वय स्थापित करने की चुनौती का सामना करना पड़ेगा। (एजेंसी)

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