भोजशाला विवाद में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, परिसर के आसपास नमाज की व्यवस्था के निर्देश
Bhojshala Dispute: धार भोजशाला मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में एक अहम घटनाक्रम हुआ है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) भोजशाला परिसर में कोई भी ढांचागत बदलाव नहीं करेगा। चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस मोहना की बेंच ने इस संवेदनशील मामले पर सुनवाई के बाद यह आदेश जारी किया।इसके अलावा, सुनवाई के दौरान, जहां कोर्ट ने नमाज पढ़ने को लेकर एक अंतरिम व्यवस्था का प्रस्ताव रखा, वहीं उसने लंदन के म्यूजियम से वाग्देवी (सरस्वती) की मूर्ति वापस लाने के हाई कोर्ट के आदेश पर भी गंभीर सवाल उठाए। सुनवाई के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की अपील पर हिंदू पक्ष, राज्य सरकार, जिला मजिस्ट्रेट (DM) और आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा। अब इस मामले की अगली सुनवाई जुलाई के तीसरे हफ्ते में होनी है। सुनवाई के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि शुक्रवार को परिसर के अंदर नमाज पढ़ने पर लगी रोक लागू रहेगी। साथ ही, फिलहाल हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि हर शुक्रवार को दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच नमाज पढ़ने के लिए भोजशाला परिसर के पास एक अलग जगह दी जाए।
कोर्ट ने नमाज के लिए वैकल्पिक जगह का प्रस्ताव
सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की शुक्रवार की नमाज जारी रखने की मांग पर एक अंतरिम व्यवस्था का प्रस्ताव रखा। चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता से पूछा कि क्या भोजशाला परिसर के आस-पास नमाज पढ़ने वालों के लिए कोई खुली जगह उपलब्ध कराई जा सकती है। CJI सूर्य कांत ने मुस्लिम पक्ष से भी पूछा, “क्या हम आस-पास के इलाके में नमाज का इंतजाम करने का आदेश दे सकते हैं? इस मामले में अंतिम फैसला आने तक ऐसी अंतरिम व्यवस्था लागू की जा सकती है।”चीफ जस्टिस ने आगे कहा, “हमने पहले बसंत पंचमी के दिन भी एक अंतरिम व्यवस्था की थी और दोनों पक्षों को पूजा-अर्चना की इजाजत दी थी। हमने वह आदेश तब दिया था जब मामला अदालत में विचाराधीन था, लेकिन अब हाईकोर्ट का फाइनल फैसला आ चुका है।”
बेंच के सामने अपनी दलीलें रखते हुए, मुस्लिम पक्ष के वकील हुजैफा अहमदी ने कहा कि अब शुक्रवार की नमाज पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। उन्होंने बताया कि उन्हें परिसर में जाने से पूरी तरह रोक दिया गया है और जो नमाज पिछले 40 सालों से बिना किसी रुकावट के हो रही थी, उसे अचानक रोक दिया गया है। सुनवाई की शुरुआत में ही, मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया कि उस जगह के बारे में वैसी ही स्थिति बहाल की जाए जैसी 40 साल पहले थी। इन दलीलों को सुनने के बाद, मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि कोर्ट इस मामले में नोटिस जारी करेगा और अगली सुनवाई के लिए तारीख तय की जाएगी।
हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस आदेश पर हैरानी जताई जिसमें लंदन के एक म्यूजियम से देवी सरस्वती की मूर्ति वापस लाने को कहा गया था। मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए, बेंच के सदस्य जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने पूछा, “कोई संवैधानिक कोर्ट (Constitutional Court) इस तरह का आदेश कैसे दे सकता है?”
मुस्लिम पक्ष ने अदालत में अपनी दलीलें की पेश
मुस्लिम पक्ष की ओर से सीनियर वकील हुजैफा अहमदी और अभिषेक मनु सिंघवी ने दलीलें पेश कीं। मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में कहा, “हम 1935 से यहां नमाज पढ़ते आ रहे हैं। इस जगह का खास महत्व है। शुरुआत में, मुसलमानों ने ही हिंदुओं के लिए यहां जगह और इंतजाम किए थे, फिर भी अब हमें इस जगह से पूरी तरह बाहर कर दिया गया है।”सीनियर एडवोकेट ए.एम. सिंघवी ने हाईकोर्ट के फैसले के समय पर सवाल उठाते हुए कहा, “मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अपना आदेश इस तरह से पारित किया कि मेरे पास कोई मौका ही नहीं बचा और रातों-रात 40 साल से चली आ रही यथास्थिति (Status Quo) बदल गई, क्योंकि अगला दिन शनिवार का था।”
सभी याचिकाओं पर हो रही है सुनवाई
इससे पहले, मुस्लिम पक्ष के वकील ने चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच से यह मांग की थी कि हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली उनकी याचिकाओं में से केवल एक ही सुनवाई के लिए लिस्ट की गई थी, इसलिए बाकीकी अन्य याचिकाओं पर भी आज एक साथ सुनवाई की जाए। इसके जवाब में, सुप्रीम कोर्ट ने वकील हुजैफा अहमदी को भरोसा दिलाया कि सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की जा सकती है। (एजेंसी)

