दुर्गा पूजा को लेकर झारखंड में सख्ती, POP-थर्मोकोल की मूर्तियों पर लगी रोक
रांची: झारखंड में दुर्गा पूजा की तैयारियों के बीच, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पर्यावरण से जुड़ी सख्त गाइडलाइंस जारी की हैं। बोर्ड ने रांची, जमशेदपुर, बोकारो, धनबाद, हजारीबाग और पलामू जैसे शहरों में बड़ी संख्या में बन रहे पंडालों से लेकर दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन तक, हर चीज के लिए पूजा कमेटियों और नगर निकायों की जिम्मेदारियां तय की हैं।
प्राकृतिक मिट्टी की प्रतिमाओं को प्राथमिकता देने का निर्देश
सोमवार को बोर्ड की ओर से जारी गाइडलाइंस के मुताबिक, पूजा कमेटियों से कहा गया है कि वे प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP), थर्मोकोल और रेजिन फाइबर जैसी चीजों से बनी मूर्तियों का इस्तेमाल न करें और इनकी जगह प्राकृतिक मिट्टी से बनी इको-फ़्रेंडली मूर्तियों का इस्तेमाल करें। साथ ही, मूर्तियों को बनाने और खरीदने के लिए संबंधित नगर निकाय (म्युनिसिपल बॉडी) में रजिस्टर्ड या अधिकृत कारीगरों को प्राथमिकता देने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
पंडालों में तीन तरह के कूड़ेदान जरूरी
दुर्गा पूजा के दौरान पंडालों से निकलने वाले कचरे के निपटान के लिए भी खास इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं। हर पूजा पंडाल में तीन तरह के डस्टबिन रखना जरूरी होगा,ताकि जैविक और गैर-जैविक कचरे के साथ अन्य पूजा सामग्री को अलग-अलग एकत्र किया जा सके। पूजा में इस्तेमाल होने वाले फूल, पत्ते, कपड़े और सजावटी सामग्री को मूर्ति विसर्जन से पहले ही अलग करने के निर्देश दिए गए हैं।
विसर्जन के 24 घंटे के भीतर करनी होगी सफाई
बोर्ड ने कहा है कि विसर्जन के बाद पूजा का सामान, कपड़े और सजावट का कचरा नदियों, तालाबों या झीलों के किनारे नहीं छोड़ा जाना चाहिए। स्थानीय निकायों को निर्देश दिया गया है कि वे विसर्जन वाली जगहों की सफाई करें और विसर्जन के 24 घंटे के भीतर बचा हुआ कचरा हटा दें। विसर्जन वाली जगहों पर ठोस कचरा जलाना भी मना है। जहां नदियों या तालाबों में विसर्जन होना है, वहां स्थानीय प्रशासन जरूरत के हिसाब से अस्थायी कृत्रिम कुंड बना सकता है।इन कुंडों में विसर्जन के बाद पानी की गुणवत्ता की जांच के बाद ही पानी को जलस्रोत में जाने देने की व्यवस्था करने को कहा गया है।
घरों में स्थापित छोटी प्रतिमाओं का विसर्जन घर पर करने की अपील
आम जनता से यह भी अपील की गई है कि वे पूजा की सामग्री को पॉलीथीन बैग में लपेटकर नदियों या तालाबों में न फेंकें। सलाह दी गई है कि घरों में स्थापित छोटी मूर्तियों का विसर्जन या तो घर पर ही किया जाए या फिर नगर निकायों द्वारा बनाए गए कृत्रिम तालाबों या टैंकों में किया जाए। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पूजा समितियों से कहा है कि वे पंडालों में इन दिशानिर्देशों से जुड़े पोस्टर लगाएं, पर्चे बांटें और श्रद्धालुओं के बीच जागरूकता फैलाएं। (एजेंसी)

