TMC में सत्ता संग्राम: मुख्यालय पर कब्जा, चुनाव चिह्न पर भी बागियों का दावा
58 विधायकों की बगावत के बाद संगठन पर बढ़ा विवाद, ममता बनर्जी के समर्थन में बचे केवल 22 विधायक
पश्चिम बंगाल की राजनीति में शुक्रवार को बड़ा सियासी घटनाक्रम देखने को मिला। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी गुट ने कोलकाता स्थित पार्टी मुख्यालय पर कब्जा करने का दावा किया। बागी नेताओं ने कार्यालय के ताले बदल दिए और नए पोस्टर लगाए, जिनमें ममता बनर्जी की तस्वीर नहीं थी। हालांकि, कार्यालय के अंदर लगी उनकी तस्वीरों और कटआउट को यथावत रखा गया।
मुख्यालय में समर्थकों और नेताओं के साथ बैठक के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि उनका गुट ही “असली तृणमूल कांग्रेस” है और अब पार्टी की सभी गतिविधियों का संचालन इसी मुख्यालय से किया जाएगा। उन्होंने बताया कि उनका गुट पहले ही चुनाव आयोग के समक्ष पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और संगठन पर अपना दावा पेश कर चुका है।
इस घटनाक्रम के बाद ममता बनर्जी समर्थक वरिष्ठ नेता कुनाल घोष जब पार्टी मुख्यालय पहुंचे तो मुख्य गेट पर ताला लगा मिला, जिससे वे अंदर नहीं जा सके। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी कार्यालय पर कब्जा राज्य प्रशासन और पुलिस की सहमति से किया गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि बागी नेता जनता के जनादेश से नहीं, बल्कि तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे।
बताया जा रहा है कि 3 जून को विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद TMC में असंतोष बढ़ गया। पार्टी के 80 में से 58 विधायकों ने ममता बनर्जी के नेतृत्व से अलग होकर ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुन लिया। इसके बाद बागी गुट ने विधानसभा अध्यक्ष को समर्थन पत्र सौंपते हुए उन्हें नेता विपक्ष के रूप में मान्यता देने की मांग की, जिसे मंजूरी भी मिल गई।
इसके बाद 22 जून को आयोजित प्रतिनिधि बैठक में बागी गुट ने नए अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और 30 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन किया। संगठन पर नियंत्रण को लेकर दोनों गुटों के बीच राजनीतिक संघर्ष लगातार तेज होता जा रहा है।
बगावत के बाद ममता बनर्जी की राजनीतिक स्थिति भी चुनौतीपूर्ण नजर आ रही है। विधानसभा में उनके समर्थन में अब केवल 22 विधायक बताए जा रहे हैं। वहीं, लोकसभा में 28 में से 8 सांसद और राज्यसभा में 13 में से 9 सांसद उनके साथ होने का दावा किया जा रहा है। ऐसे में अब सभी की निगाहें चुनाव आयोग के फैसले पर टिकी हैं, जो पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और संगठनात्मक अधिकार को लेकर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

