Petrol Diesel Rate: कच्चे तेल के बाजार में बड़ी हलचल! अमेरिका-ईरान समझौते के बाद क्या अब भारत में सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल? होर्मुज स्ट्रेट पर आया सबसे बड़ा अपडेट
Petrol Diesel Rate: वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल बाजार को हिलाकर रख देने वाले अमेरिका-ईरान तनाव के बीच आज सुबह एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील तेल व्यापार मार्गों में से एक, होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़ी सहमति बन गई है। इस ऐतिहासिक डिप्लोमैटिक प्रगति के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों पर लगाम लगने की उम्मीद काफी मजबूत हो गई है।
इस महत्वपूर्ण समझौते के तहत दोनों देशों के बीच जारी सीजफायर को सबसे पहले 60 दिनों के लिए आगे बढ़ाया जाएगा। इस कदम से न सिर्फ युद्ध का खतरा टला है, बल्कि वैश्विक शिपिंग और पूरी सप्लाई चेन ने भी राहत की सांस ली है।
क्यों खास है ‘होर्मुज स्ट्रेट’ और क्या है यह समझौता?
होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ने वाला एक बेहद संकरा और रणनीतिक जलमार्ग है। दुनिया का लगभग 20 से 21 प्रतिशत खनिज तेल (कच्चा तेल और एलएनजी) इसी रास्ते से होकर गुजरता है। इस मार्ग के बंद होने से वैश्विक तेल बाजार पूरी तरह चरमरा गया था और कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी थीं। विशेषज्ञों ने तो इसके $200 तक पहुंचने की चेतावनी भी दे दी थी।
अब इस नए समझौते के तहत:
60 दिनों का सीजफायर: दोनों देश अस्थायी रूप से शांति बनाए रखने और इस अवधि को आगे बढ़ाने पर सहमत हुए हैं।
समुद्री माइन हटाएगा ईरान: इस दौरान ईरान इस जलमार्ग में बिछाई गई अपनी समुद्री बारूदी सुरंगों (Naval Mines) को साफ करेगा, ताकि जहाजों की आवाजाही बिना किसी टैक्स (Toll) के सुरक्षित रूप से हो सके।
प्रतिबंधों में ढील: बदले में अमेरिका ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी हटाएगा और उसे तेल बेचने की कुछ छूट (Sanctions Waivers) देगा।
यूरेनियम भंडार और परमाणु कार्यक्रम पर भी होगी चर्चा
इस तय किए गए 60 दिनों के सीजफायर के दौरान सिर्फ तेल मार्ग ही नहीं खुलेगा, बल्कि सबसे संवेदनशील मुद्दे—ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम भंडार (Enriched Uranium Stockpile) पर भी दोनों देशों के बीच अहम चर्चा होगी। अमेरिका और पश्चिमी देशों को ईरान के बढ़ते यूरेनियम स्टॉक पर लगातार गहरी चिंता बनी हुई थी। समझौते के मसौदे के अनुसार, ईरान अपने अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम के भंडार को नष्ट करने और परमाणु हथियार न बनाने की दिशा में बातचीत करने के लिए मौखिक रूप से तैयार हो गया है।
क्या अब भारत में सस्ता होगा पेट्रोल और डीजल?
भारतीय उपभोक्ताओं के मन में इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस फैसले से देश में पेट्रोल-डीजल के दाम कम होंगे?
एक्सपर्ट्स का विश्लेषण: भारत अपनी जरूरत का करीब 80 से 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से इसी होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते भारत पहुंचता है। इस मार्ग के बंद होने से माल ढुलाई (Freight Charges) और इंश्योरेंस का खर्च काफी बढ़ गया था। अब इस रूट के दोबारा खुलने से कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में $5 से $10 प्रति बैरल तक की गिरावट आ सकती है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल लगातार सस्ता होता है, तो भारतीय तेल कंपनियां आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती कर आम जनता को बड़ी राहत दे सकती हैं।
वैश्विक बाजारों को मिलेगी बड़ी मजबूती
तनाव की वजह से पिछले कुछ महीनों में जो वैश्विक सप्लाई चेन पूरी तरह बाधित हो गई थी, उसे इस फैसले से बड़ी मजबूती मिलने की संभावना है। हालांकि, ईरान की सरकारी मीडिया ने इस समझौते को लेकर थोड़ा सतर्क रुख अपनाया है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति और अन्य क्षेत्रीय मध्यस्थों (जैसे पाकिस्तान, सऊदी अरब और यूएई) के प्रयासों से इस शांति समझौते को अमलीजामा पहनाया जा रहा है। अगर यह 60 दिन का सीजफायर बिना किसी बाधा के पूरा होता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को मंदी के खतरे से बचाया जा सकेगा।

