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UPI यूजर्स सावधान! पुरानी UPI ID बन सकती है बड़ा खतरा, मिनटों में खाली हो सकता है बैंक अकाउंट

फोन बदलने या ऐप डिलीट करने के बाद भी एक्टिव रहती है पुरानी UPI ID, बढ़ सकता है फ्रॉड का खतरा

 

National Payments Corporation of India के जरिए संचालित UPI सिस्टम आज देश में डिजिटल पेमेंट का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन चुका है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े स्टोर्स तक हर जगह लोग UPI का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन एक छोटी सी लापरवाही आपके बैंक अकाउंट के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।

अगर आप पुरानी UPI ID को बंद किए बिना नई UPI ID बना लेते हैं, तो इससे साइबर फ्रॉड का जोखिम बढ़ सकता है। कई लोग सोचते हैं कि फोन बदलने या ऐप डिलीट करने के बाद UPI ID अपने आप बंद हो जाती है, जबकि ऐसा नहीं होता।

ऐप हटाने से बंद नहीं होती UPI ID

UPI ID, बैंक अकाउंट लिंक, UPI Lite और ऑटो-पे मैंडेट तब तक एक्टिव रहते हैं, जब तक उन्हें मैन्युअली डिएक्टिवेट नहीं किया जाता। ऐसे में पुरानी और नई दोनों IDs एक्टिव रहने पर स्कैमर्स इसका फायदा उठा सकते हैं।

कैसे बढ़ता है फ्रॉड का खतरा?

अगर आपकी पुरानी UPI ID किसी ऐसे मोबाइल नंबर से जुड़ी है जो बाद में किसी दूसरे व्यक्ति को अलॉट हो जाए, तो जोखिम और बढ़ जाता है। टेलीकॉम कंपनियां लंबे समय तक बंद पड़े नंबरों को नए यूजर्स को जारी कर देती हैं।

ऐसे में नए यूजर को बैंक अलर्ट और OTP नोटिफिकेशन मिल सकते हैं। अगर नंबर किसी स्कैमर के हाथ लग जाए तो वह सिम-स्वैप जैसे फ्रॉड के जरिए अकाउंट तक पहुंचने की कोशिश कर सकता है।

कैसे रखें अपना बैंक अकाउंट सुरक्षित?

फोन बदलने या ऐप हटाने से पहले अपनी पुरानी UPI ID को डिएक्टिवेट जरूर करें। साथ ही बैंक अकाउंट से UPI लिंक हटाएं और सभी ऑटो-पे मैंडेट भी बंद करें।

 

अगर आपने मोबाइल नंबर बदला है तो बैंक में नया नंबर अपडेट कराना जरूरी है। अपनी एक्टिव UPI IDs की जानकारी बैंकिंग ऐप या NPCI की वेबसाइट पर भी चेक की जा सकती है।

 

सावधानी और सही जानकारी ही आपके डिजिटल पेमेंट को सुरक्षित रख सकती है।

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