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भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा साझेदारी होगी और मजबूत, संयुक्त घोषणापत्र किया जारी

Joint Declaration on Defence and Security Cooperation: भारत और ऑस्ट्रेलिया ने रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने के लिए एक संयुक्त घोषणापत्र जारी किया है। दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने एक स्वतंत्र, शांतिपूर्ण, स्थिर और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बनाए रखने की अपनी साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, रक्षा उद्योग, सैन्य अभ्यास और उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया है।

संयुक्त घोषणा में भारत और ऑस्ट्रेलिया ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रणनीतिक समन्वय तेजी से बढ़ा है, आर्थिक संबंध मजबूत हुए हैं और लोगों के बीच संपर्क गहरा हुआ है। उन्होंने सुरक्षा और समृद्धि के लिए क्वॉड सहित विभिन्न क्षेत्रीय और बहुपक्षीय मंचों में सहयोग को भी महत्वपूर्ण बताया।

रक्षा सहयोग में ये बड़े कदम

संयुक्त घोषणा में यह निर्धारित किया गया कि वे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा हितों को प्रभावित करने वाले रक्षा विकास पर नियमित परामर्श करेंगे, द्विपक्षीय और सहयोगी सैन्य अभ्यासों का स्तर बढ़ाएंगे, अधिक जटिल अभ्यास करेंगे और दोनों सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी और सूचना साझाकरण को मजबूत करेंगे।एक-दूसरे के क्षेत्रों से सैन्य विमानों की तैनाती का विस्तार करेंगे। सैन्य अधिकारियों और कर्मियों के बीच आदान-प्रदान, शिक्षा, प्रशिक्षण और लायजन भूमिकाओं के जरिए संपर्क बढ़ाएंगे। कुशल रक्षा कार्यबल यानी स्किल्ड डिफेंस वर्कफोर्स की भर्ती में सहयोग की संभावनाओं पर भी काम करेंगे।

समुद्री सुरक्षा के लिए अलग रोडमैप

दोनों देश यह मानते हैं कि समुद्री क्षेत्र दोनों देशों के रक्षा, सुरक्षा और आर्थिक हितों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए, भारत और ऑस्ट्रेलिया समुद्री सुरक्षा सहयोग की गहराई, गुणवत्ता और निरंतरता को बढ़ाएंगे। इस उद्देश्य से, दोनों देश भारत-ऑस्ट्रेलिया समुद्री सुरक्षा सहयोग रोडमैप विकसित करेंगे।

रक्षा उद्योग और नई तकनीक पर फोकस

संयुक्त घोषणा में रक्षा औद्योगिक सहयोग पर भी चर्चा की गई है। दोनों देशों ने रक्षा उद्योगों के बीच एकीकरण, उद्योग साझेदारी और रक्षा आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती को बढ़ावा देने पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने रक्षा नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के भीतर सहयोग बढ़ाने और उन्नत रक्षा विज्ञान और प्रौद्योगिकी में साझेदारी विकसित करने का भी निर्णय लिया।

हिंद-प्रशांत में बढ़ती चुनौतियों पर चिंता

संयुक्त घोषणा में, भारत और ऑस्ट्रेलिया ने क्षेत्र में बढ़ती भू-रणनीतिक अनिश्चितता और इससे शांति एवं स्थिरता को होने वाले खतरों पर चिंता व्यक्त की। भारत और ऑस्ट्रेलिया ने सभी देशों से अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार, बल प्रयोग या दबाव के विवादों के शांतिपूर्ण ढंग से विवादों को सुलझाने का आह्वान किया।

दोनों देशों ने 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन के अनुसार, नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान और समुद्री क्षेत्र में नेविगेशन और हवाई उड़ान की स्वतंत्रता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। (एजेंसी)

 

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