कब से शुरू हो रहा है नौतपा? 9 दिन रहें सावधान! जानिए लू से बचाव और सेहत के जरूरी टिप्स
सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश से बढ़ेगा तापमान, मानसून और कृषि पर पड़ेगा असर
ज्योतिष शास्त्र में नौतपा को साल का सबसे गर्म और प्रभावशाली समय माना जाता है। इस वर्ष नौतपा 25 मई से शुरू होकर 2 जून 2026 तक रहेगा। यह 9 दिनों की अवधि सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में सूर्य का प्रवेश से जुड़ी होती है, जिसके कारण तापमान अपने चरम पर पहुंच जाता है।
नौतपा केवल भीषण गर्मी का संकेत नहीं देता, बल्कि इसका सीधा असर मानसून और कृषि पर भी माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान जितनी अधिक गर्मी पड़ती है, उतना ही अच्छा मानसून होता है, जिससे किसानों को बेहतर पैदावार की उम्मीद रहती है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी अधिक तापमान समुद्र के जल को गर्म करता है, जिससे बादल बनने की प्रक्रिया तेज होती है और वर्षा की संभावना बढ़ती है।
नौतपा का महत्व
यह अवधि ज्येष्ठ माह में आती है और इस दौरान सूर्य की किरणें सीधे पृथ्वी पर पड़ती हैं। इसी कारण लू और गर्मी अपने चरम पर होती है। ज्योतिष के अनुसार, रोहिणी नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा माने जाते हैं, जो शीतलता के प्रतीक हैं, लेकिन सूर्य के प्रभाव से यह शीतलता कम हो जाती है।
पिछले वर्षों का प्रभाव
हाल के वर्षों में नौतपा के दौरान अपेक्षित गर्मी नहीं देखी गई। खासकर 2025 में तापमान कम रहने से मानसून पर असर पड़ा और कई क्षेत्रों में कम वर्षा हुई, जिससे किसानों को नुकसान झेलना पड़ा।
नौतपा में क्या करें उपाय
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस समय सूर्यदेव की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। सुबह स्नान के बाद तांबे के लोटे से सूर्य को जल अर्पित करना शुभ माना जाता है। ‘आदित्य हृदय स्तोत्र’ और सूर्य गायत्री मंत्र का जाप करने से सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
दान-पुण्य का महत्व
नौतपा के दौरान पानी, गुड़, घी, गेहूं और लाल वस्त्रों का दान करना पुण्यदायी माना जाता है। पक्षियों के लिए पानी रखना न केवल धार्मिक परंपरा है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी लाभकारी कदम है।
स्वास्थ्य का रखें विशेष ध्यान
इस अवधि में स्वास्थ्य का खास ख्याल रखना जरूरी होता है। अधिक पानी पीना, हल्का और ठंडा भोजन करना, धूप से बचना और शरीर को हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी है। सुबह जल्दी उठना और दोपहर की तेज धूप से बचना इस समय फायदेमंद माना जाता है।
नौतपा का समय भले ही कठिन हो, लेकिन सही सावधानी और संतुलित दिनचर्या से इसे आसानी से संभाला जा सकता है।

