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ऑफलाइन परीक्षा के ऐलान पर फंसा पेच: ESB बोला-‘7 साल से बंद है व्यवस्था’, क्या टल जाएगी MP TET की तारीख?

भोपाल। मध्य प्रदेश में लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ी प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा (MP TET) को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है। 5 सितंबर को शिक्षक दिवस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा इस परीक्षा को ऑफलाइन माध्यम से आयोजित कराने के ऐलान के बाद परीक्षा संचालक संस्था कर्मचारी चयन मंडल (ESB) ने अपनी विवशता जाहिर कर दी है। ईएसबी ने शासन को साफ बता दिया है कि वर्तमान ढांचे में ऑफलाइन परीक्षा कराना संभव नहीं है, जिससे 12 अक्टूबर से प्रस्तावित परीक्षा का आगे खिसकना तय माना जा रहा है।

शिक्षक दिवस पर मुख्यमंत्री ने किया था बड़ा ऐलान

राजधानी भोपाल में शिक्षक दिवस पर आयोजित राज्य स्तरीय सम्मान समारोह के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अभ्यर्थियों की सुविधा का हवाला देते हुए घोषणा की थी कि शिक्षक पात्रता परीक्षा को ऑफलाइन माध्यम से भी आयोजित किया जाएगा। सरकार की मंशा थी कि ग्रामीण अंचलों और कंप्यूटर पर असहज महसूस करने वाले शिक्षक व अभ्यर्थी भी आसानी से परीक्षा दे सकें। मुख्यमंत्री की इस घोषणा के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने तुरंत ईएसबी को ऑफलाइन मोड में परीक्षा कराने का औपचारिक पत्र थमा दिया।

ESB का इनकार: ‘7 वर्षों से बंद है ऑफलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर’

स्कूल शिक्षा विभाग के प्रस्ताव पर जवाब देते हुए कर्मचारी चयन मंडल ने स्पष्ट किया कि पिछले सात वर्षों से विभाग केवल ऑनलाइन (कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट – CBT) मॉडल पर ही काम कर रहा है। मंडल के पास ओएमआर शीट की छपाई, वितरण, परीक्षा केंद्रों पर गोपनीय सुरक्षा तंत्र और भौतिक मूल्यांकन की कोई सक्रिय व्यवस्था नहीं बची है। ईएसबी का कहना है कि यदि सरकार ऑफलाइन माध्यम पर ही परीक्षा कराना चाहती है, तो इसके लिए किसी नई बाहरी एजेंसी को अनुबंधित करना होगा, जिसके लिए बाकायदा टेंडर प्रक्रिया और तकनीकी मूल्यांकन से गुजरना पड़ेगा।

18 सितंबर तक बढ़े आवेदन, परीक्षा का टलना तय

इस खींचतान और तकनीकी अड़चनों के बीच कर्मचारी चयन मंडल ने प्रारंभिक कदम उठाते हुए ऑनलाइन आवेदन भरने की अंतिम तारीख को बढ़ाकर 18 सितंबर कर दिया है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि शासन किसी नई एजेंसी के जरिए ऑफलाइन परीक्षा कराने की दिशा में आगे बढ़ता है, तो टेंडर जारी करने, परीक्षा केंद्र निर्धारित करने और प्रश्नपत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में कम से कम दो से तीन महीने का समय लगेगा। ऐसे में पूर्व निर्धारित 12 अक्टूबर की तारीख पर परीक्षा आयोजित होना नामुमकिन प्रतीत होता है। इस प्रशासनिक उलझन के चलते प्रदेशभर के लाखों अभ्यर्थी परीक्षा के भविष्य को लेकर पशोपेश में हैं।

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