लखनऊ कोर्ट के बाहर नाले पर बने अवैध चैंबर जमींदोज: 10 बुलडोजर से एक्शन, वकीलों ने दी चेतावनी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में नाले और नालियों पर किए गए अवैध कब्जों के खिलाफ नगर निगम प्रशासन ने रविवार को कड़ा रुख अख्तियार किया। कैसरबाग स्थित पुराने हाईकोर्ट, जिला न्यायालय और कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास नालों को पाटकर बनाए गए वकीलों के अवैध चैंबरों को ध्वस्त करने के लिए निगम की टीम भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची। इस दौरान वकीलों ने कार्रवाई का कड़ा प्रतिवाद किया और निगम अधिकारियों के खिलाफ तीखी नारेबाजी करते हुए अभियान को बीच में ही रोकने का दबाव बनाया, हालांकि प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए निर्माण ढहाने का काम पूरा कराया।
10 बुलडोजर और 10 हाइवा ट्रकों के साथ उतरी निगम की टीम
कार्रवाई को तेजी से अंजाम देने और सड़कों पर जमा मलबा फौरन साफ करने के लिए नगर निगम ने 10 बुलडोजर और 10 बड़े हाइवा वाहन मैदान में उतारे। वकीलों के संभावित विरोध और कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए कैसरबाग और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल और पीएसी के जवानों को तैनात किया गया था। इस दौरान आक्रोशित वकीलों ने प्रशासनिक रवैये पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि वे इस मनमानी कार्रवाई का जवाब आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में देंगे।
हाईकोर्ट से याचिका खारिज, आपत्तियों के निस्तारण के बाद एक्शन
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, नालों के ऊपर बने इन ढांचों को हटाने के लिए विधिक प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किया गया है। पूर्व में जारी नोटिस के आधार पर प्राप्त सभी 14 आपत्तियों की विधिवत सुनवाई कर उनका निस्तारण किया जा चुका था। अधिवक्ताओं ने इस अभियान पर रोक लगाने के लिए उच्च न्यायालय का भी रुख किया था, लेकिन वहां से याचिका खारिज होने के बाद प्रशासन के पास कार्रवाई के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। पहले यह ध्वस्तीकरण 11 अक्टूबर को प्रस्तावित था, लेकिन अदालती प्रक्रिया और औपचारिकताओं के कारण इसे कुछ दिनों के लिए टाला गया था।
जनहित याचिका के तहत चिन्हित हुए थे 241 चैंबर
इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि हाईकोर्ट में विचाराधीन एक जनहित याचिका से जुड़ी है। करीब एक साल पहले नगर निगम ने कैसरबाग कोर्ट, जिला सत्र न्यायालय, सब-रजिस्ट्रार कार्यालय और जिलाधिकारी कार्यालय के आसपास की सड़कों और प्रमुख जल निकासी नालों का व्यापक सर्वे किया था। उस दौरान कुल 241 चैंबर अवैध पाए गए थे, जिनमें से 211 चैंबरों को अंतिम रूप से चिन्हित किया गया था।
इससे पहले चलाए गए दो अलग-अलग अभियानों में 72 चैंबरों को तोड़ा जा चुका था। बचे हुए चैंबरों को हटाकर जल निकासी को सुचारु करने के लिए प्रशासन ने अब यह अंतिम चरण की कार्रवाई पूरी की है।

