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मंत्री विजय शाह के खिलाफ मुकदमा न चलाने के प्रस्ताव पर राज्यपाल की मुहर, सुप्रीम कोर्ट में भेजी जाएगी रिपोर्ट

भोपाल। भारतीय सेना की महिला अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित बयान देने के मामले में मध्य प्रदेश के वरिष्ठ मंत्री कुंवर विजय शाह को बड़ी कानूनी राहत मिलती नजर आ रही है। राज्य कैबिनेट द्वारा मंत्री शाह के खिलाफ मुकदमा यानि अभियोजन न चलाने की सिफारिश वाले प्रस्ताव पर राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने अपनी मुहर लगा दी है। राजभवन से औपचारिक स्वीकृति मिलने के बाद संबंधित फाइल सरकार को वापस सौंप दी गई है। अब इस पूरे निर्णय की आधिकारिक रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश की जाएगी, जहां मामले की अंतिम समीक्षा होगी।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल ने इस मामले की गहन जांच पूरी करने के बाद अपनी सीलबंद रिपोर्ट शीर्ष अदालत को सौंपी थी। जांच के आधार पर SIT ने विजय शाह के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल करने के लिए राज्य सरकार से अभियोजन की कानूनी स्वीकृति मांगी थी। हालांकि, पिछले हफ्ते हुई कैबिनेट बैठक में सरकार ने यह तर्क देते हुए मुकदमा न चलाने का प्रस्ताव पारित किया था कि मंत्री पूर्व में सार्वजनिक रूप से माफी मांग चुके हैं। कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए राज्यपाल के पास भेजा था, जिसे अब हरी झंडी मिल गई है।

अब तक क्या रहा पूरा मामला?

विवाद की शुरुआत मई 2025 में हुई थी, जब मंत्री विजय शाह ने महू (इंदौर) में एक कार्यक्रम के दौरान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के संदर्भ में कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर अत्यधिक आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इस बयान पर भारी विरोध के बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद विजय शाह ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जहां अदालत ने गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए मामले की स्वतंत्र जांच के लिए एसआईटी गठित कर दी थी। अब जब राज्य सरकार और राज्यपाल ने अभियोजन चलाने से इनकार कर दिया है, तो अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट की विधिक समीक्षा पर निर्भर करेगा।

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