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Hockey World Cup 2026: आखिरी 4 मिनट में स्पेन ने हटाया गोलकीपर, फिर भी नहीं पलटा मैच; जर्मनी बना चैंपियन

Hockey World Cup 2026: वाव्रे में खेले गए रोमांचक फाइनल मुकाबले में जर्मनी ने 1-0 से दर्ज की ऐतिहासिक जीत, मिचेल स्ट्रुथॉफ का गोल बना निर्णायक

Hockey World Cup 2026: हॉकी जगत के महामुकाबले में जर्मनी ने एक बार फिर अपना परचम लहराते हुए एफआईएच मेन्स हॉकी वर्ल्ड कप 2026 का खिताब अपने नाम कर लिया है। स्पेन के खिलाफ खेले गए खिताबी मुकाबले में जर्मन डिफेंस और गोलकीपर की दीवार भेदना स्पेनिश टीम के लिए नामुमकिन साबित हुआ। महज एक गोल के अंतर से मिली इस जीत के साथ जर्मनी ने पाकिस्तान के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है। आखिर कैसे रोमांचक मोड़ पर पहुंचे इस फाइनल मैच में जर्मनी ने बाजी मारी? आइए जानते हैं इस ऐतिहासिक जीत की हर एक बड़ी बात।

जर्मनी ने शानदार और अनुशासित प्रदर्शन करते हुए एफआईएच (FIH) मेन्स हॉकी वर्ल्ड कप 2026 का खिताब अपने नाम कर लिया है। 30 अगस्त को वाव्रे के बेल्फियस हॉकी एरिना में खेले गए खिताबी मुकाबले में जर्मनी ने स्पेन को 1-0 से मात दी। इस जीत के साथ ही जर्मनी ने लगातार दूसरी और कुल मिलाकर चौथी बार मेन्स हॉकी वर्ल्ड कप की ट्रॉफी अपने नाम की है। इसके साथ ही जर्मन टीम मेन्स हॉकी वर्ल्ड कप इतिहास की संयुक्त रूप से सबसे सफल टीम बन गई है, क्योंकि पाकिस्तान की टीम भी चार बार यह प्रतिष्ठित टूर्नामेंट जीत चुकी है। इससे पहले जर्मनी ने 2002, 2006 और 2023 में यह खिताब जीता था।

फाइनल मुकाबले का फैसला भले ही सिर्फ एक गोल से हुआ, लेकिन जर्मनी की मजबूत रक्षापंक्ति और गोलकीपर के शानदार प्रदर्शन ने स्पेन के हर आक्रामक प्रयास को नाकाम कर दिया। मैच का पहला हाफ गोलरहित रहा, लेकिन तीसरे क्वार्टर में स्पेन ने ताबड़तोड़ हमले किए और जर्मनी के गोलपोस्ट पर लगातार दबाव बनाया। स्पेन ने इस दौरान कई हमले किए, लेकिन जर्मन खिलाड़ी हर बार रुकावट बनकर खड़े रहे। इसके बाद 44वें मिनट में जर्मनी को वह बहुप्रतीक्षित मौका मिला, जब दाएं फ्लैंक से आए बेहतरीन मूव पर मिचेल स्ट्रुथॉफ ने शानदार गोल दागकर टीम को 1-0 की महत्वपूर्ण बढ़त दिला दी।

मैच के अंतिम पलों में स्पेन ने बराबरी की पूरी कोशिश की और मैच के आखिरी चार मिनटों में बड़ा जोखिम उठाते हुए अपने गोलकीपर को मैदान से बाहर बुलाकर अतिरिक्त फील्ड खिलाड़ी को उतार दिया। हालांकि, जर्मनी के खिलाड़ियों ने दबाव के इस क्षण में भी अपना संयम नहीं खोया और अंतिम सीटी तक स्पेन को गोल करने का कोई मौका नहीं दिया। इस हार के साथ स्पेन का वर्ल्ड कप जीतने का इंतजार और लंबा हो गया है, जो 1998 के बाद तीसरी बार फाइनल में पहुंचकर भी खिताब से चूक गया। वहीं, ब्रॉन्ज मेडल के मुकाबले में अर्जेंटीना ने नीदरलैंड्स को 2-1 से हराकर तीसरा स्थान हासिल किया।

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