SIR के खिलाफ कपिल सिब्बल का हमला, बोले- मुस्लिम समुदाय को किया जा रहा टारगेट
रांचीः राज्यसभा सांसद और जाने-माने वकील कपिल सिबल ने विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) पर एक बार फिर सवाल उठाए हैं। उन्होंने SIR को मतदाता सूचियों में हेरफेर का जरिया बताया। सिबल ने कहा कि SIR के तहत, किसी भी राजनीतिक दल के सदस्य या कार्यकर्ता समेत कोई भी व्यक्ति मतदाता सूची पर टिप्पणी कर सकता है कि यह व्यक्ति इस गली में नहीं रहता। उसका नाम हटा दिया जाना चाहिए। इसका कोई औचित्य नहीं है। उसका नाम हटा दिया जाना चाहिए।
SIR में मुसलमानों को टारगेट करने का आरोप
कपिल सिबल ने बताया कि ऐसे मामलों में बड़ी संख्या में फॉर्म-7 बीएलओ के पास जमा कराए जाते हैं और फिर नाम हटा दिया जाता है। बीएलओ इनकी जांच करता है। लेकिन यहां बीएलओ ने आपत्ति जताते हुए पूछा कि हम उसका नाम क्यों हटाएं। जब यह मामला सामने आया, तो एक अखबार ने इसकी दोबारा जांच की। जांच में पता चला कि जहां भी फॉर्म 7 जमा किए जा रहे हैं, वहां एसआईआर के दौरान मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है। फिर जब इसकी और जांच की गई,तो पत्रकारों ने पता कि वो सदियों से वहां रह रहे हैं।
झारखंड में दबाव नहीं डालना संभव नहीं
राज्यसभा सांसद कपिल सिबल ने कहा कि जांच से पता चला है कि उनके परिवार सैकड़ों वर्षों से वहां रह रहे हैं। वे देश की आजादी से पहले से वहां रह रहे हैं। तो फिर उनके नाम क्यों हटाए जाने चाहिए? यह कहा गया कि एक ही बूथ से 400, 300, 200 या यहां तक कि 100 नाम भी हटा दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड में विपक्ष सत्ता में है, इसलिए वे यहां दबाव नहीं डाल सकते। हालांकि, जहां भाजपा सत्ता में है, वहां उन्होंने मनमाने ढंग से काम किया है। तो फिर SIR का क्या मतलब है? अगर SIR में यही सब होता है, तो चुनाव की क्या जरूरत है? यह बात सबको समझनी चाहिए। अदालत को भी यह समझना चाहिए कि अगर यह सिलसिला जारी रहा, तो एसआईआर खुद ही एक विवादित प्रक्रिया बन जाएगी। (एजेंसी)

