“जब से AAP छोड़ी, उसके बड़े नेता जल रहे”, SIR ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से नाम गायब होने पर भड़के राघव चड्ढा
चंडीगढ़: पंजाब की SIR (Special Intensive Revision) ड्राफ्ट मतदाता सूची में बीजेपी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम नहीं होने के बाद राजनीतिक विवाद गहरा गया है। चुनावी रिकॉर्ड में उनकी एंट्री को ‘पर्मानेंटली शिफ्टेड’ के तौर पर दर्ज किए जाने पर राघव चड्ढा ने सवाल उठाए हैं चड्ढा ने इसे सामान्य प्रशासनिक या क्लेरिकल गलती मानने से इनकार करते हुए पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाया है। वहीं, AAP ने उनके आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि SIR की पूरी प्रक्रिया चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आती है।
मोहाली में पंजीकृत है वोटर आईडी, चड्ढा का दावा
राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट के जरिए अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि वह पंजाब से मौजूदा राज्यसभा सांसद हैं और उनका वोटर आईडी मोहाली में पंजीकृत है। चड्ढा के मुताबिक उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में मोहाली में ही मतदान किया था, इसके बावजूद SIR की ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल में उनके नाम को ‘शिफ्टेड’ के तौर पर दर्ज कर दिया गया।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल यह अंतिम मतदाता सूची नहीं है, बल्कि ड्राफ्ट सूची है। नाम को दोबारा शामिल कराने के लिए दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया जारी है और वह SIR के तहत उपलब्ध कानूनी प्रक्रिया का इस्तेमाल कर रहे हैं।
‘सिर्फ क्लेरिकल गलती नहीं’
राघव चड्ढा ने अपने पोस्ट में दावा किया कि उनके नाम को ‘शिफ्टेड’ के रूप में चिह्नित करने से लेकर सत्यापन और आगे की प्रक्रिया तक कई स्तरों पर पंजाब सरकार के अधिकारी जुड़े हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि उन्हें ‘शिफ्टेड’ किस अधिकारी ने मार्क किया, इसका वेरिफिकेशन किसने किया और इसे आगे किस स्तर पर प्रोसेस किया गया।
चड्ढा का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों के ट्रांसफर, पोस्टिंग और करियर से जुड़े फैसलों पर राज्य सरकार का प्रभाव होता है। ऐसे में उन्होंने आशंका जताई कि अधिकारियों के जरिए राजनीतिक दबाव बनाया जा सकता है।
AAP ने आरोपों पर किया पलटवार
राघव चड्ढा के आरोपों पर आम आदमी पार्टी ने भी प्रतिक्रिया दी है। AAP का कहना है कि SIR की प्रक्रिया चुनाव आयोग द्वारा संचालित की जाती है, न कि पंजाब सरकार द्वारा। पार्टी ने आरोप लगाया कि चड्ढा दिल्ली में वोटर रजिस्ट्रेशन से जुड़ी प्रक्रिया को लेकर विवाद में रहे हैं और अब इस मामले की जिम्मेदारी AAP तथा पंजाब सरकार पर डालने की कोशिश कर रहे हैं।
AAP के मुताबिक, अगर राघव चड्ढा अब पंजाब में निवास नहीं करते हैं तो अपने वोटर रजिस्ट्रेशन को बनाए रखना या उसे दूसरी जगह ट्रांसफर कराना उनकी जिम्मेदारी है। पार्टी ने कहा कि मतदाता सूची में नाम हटने के लिए पंजाब सरकार को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
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AAP छोड़ने के बाद से टकराव का दावा
राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी छोड़ने के बाद से राजनीतिक टकराव बढ़ने का भी दावा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि AAP नेतृत्व उनसे नाराज है और उनके खिलाफ पंजाब पुलिस तथा प्रशासनिक तंत्र का इस्तेमाल किया जा रहा है।
चड्ढा ने यह भी दावा किया कि AAP छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए अन्य सांसदों को भी पंजाब सरकार की ओर से निशाना बनाया गया है। उन्होंने मतदाता सूची में अपने नाम की स्थिति को इसी कथित राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा बताया।
SIR गाइडलाइन के प्रावधान का दिया हवाला
राघव चड्ढा ने अपने पक्ष में चुनाव आयोग की SIR गाइडलाइंस के पैराग्राफ 4(d) का हवाला दिया है। उनका दावा है कि इस प्रावधान में सांसदों, विधायकों, न्यायपालिका से जुड़े लोगों और सार्वजनिक जीवन की कुछ अन्य श्रेणियों से संबंधित नामों को ‘प्रोटेक्टेड लिस्ट’ के तहत ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल में शामिल करने की व्यवस्था है। चड्ढा के मुताबिक इसका उद्देश्य दावे और आपत्तियों की अवधि के दौरान संबंधित लोगों से आवश्यक दस्तावेज हासिल करना है।
उन्होंने कहा कि वह पंजाब से मौजूदा सांसद हैं, इसलिए यदि उनके नाम को किसी कारण से ‘फ्लैग’ किया गया था, तब भी संबंधित प्रावधान के तहत उनका नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल किया जाना चाहिए था।
अब अंतिम मतदाता सूची पर नजर
इस पूरे विवाद के बीच राघव चड्ढा के नाम को लेकर चुनाव आयोग की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो गई है। ड्राफ्ट सूची के बाद चल रही दावे और आपत्ति प्रक्रिया में नाम और मतदाता विवरण में सुधार का प्रावधान है।
अब देखना होगा कि प्रक्रिया पूरी होने के बाद राघव चड्ढा का नाम अंतिम मतदाता सूची में किस स्थिति में शामिल होता है और उनके नाम को ‘पर्मानेंटली शिफ्टेड’ दर्ज किए जाने को लेकर चुनावी अधिकारियों की ओर से क्या स्पष्टीकरण सामने आता है।

