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JSSC CGL: एक फैसले से मचा भूचाल; 24 दिन के आंदोलन की जीत, लेकिन 2000 की छिन गई ‘सरकारी नौकरी’

रांची। झारखंड की राजनीति और रोजगार के मोर्चे पर सोमवार को एक बड़ा भूचाल आ गया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की कैबिनेट ने आपात बैठक बुलाकर विवादों में घिरी JSSC CGL परीक्षा और विवादित एजेंसी TDPL द्वारा कराई गई सभी 15 परीक्षाओं को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का ऐतिहासिक फैसला लिया।

सरकार का यह फैसला राज्य में एक अजीबो-गरीब स्थिति पैदा कर गया है। राजधानी रांची में इस वक्त जश्न और मातम की दो बिल्कुल अलग-अलग तस्वीरें देखने को मिल रही हैं।

मुंडा स्टेडियम में जश्न और CID जांच का आदेश

रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में पिछले 24 दिनों से कड़ाके की धूप और बारिश के बीच अनशन पर बैठे छात्रों के लिए यह फैसला किसी बड़ी फतह से कम नहीं है। छात्रों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर परीक्षा रद्द होने का स्वागत किया।

मुख्यमंत्री ने न सिर्फ JSSC CGL परीक्षा रद्द की है बल्कि साल 2014 से लेकर अब तक हुई सभी विवादित भर्तियों की CID जांच के आदेश भी दे दिए हैं। एक रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में स्वतंत्र कमेटी एग्जाम माफियाओं और अधिकारियों के नेक्सस का भंडाफोड़ करेगी।

सड़क पर आए 2000 ‘सरकारी बाबू’, सचिवालय पर हंगामा

इस फैसले का सबसे स्याह पहलू उन 2000 युवाओं पर पड़ा है, जो JSSC CGL-2023 परीक्षा पास करके पिछले 8 महीनों से सरकारी नौकरी कर रहे थे। 30 दिसंबर 2025 को खुद सीएम हेमंत सोरेन ने मोरहाबादी मैदान में इन अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपा था। ये युवा सहायक सचिवालय पदाधिकारी (847 पद), कनीय सचिवालय सहायक (288 पद), श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी और अंचल निरीक्षक जैसे 6 अहम विभागों में काम कर रहे थे।

नौकरी छिनने की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में कर्मचारी सचिवालय पहुंच गए। कई अभ्यर्थियों की आंखों में आंसू थे। उनका कहना था, “हम दूसरे राज्यों की अच्छी-खासी नौकरी छोड़कर अपने प्रदेश आए थे। अब एक झटके में हमें बेरोजगार कर दिया गया। यह हमारे भविष्य की हत्या है।”

रडार पर TDPL एजेंसी: 15 अहम परीक्षाएं हुईं रद्द

झारखंड सरकार के निशाने पर मुख्य रूप से TDPL एजेंसी रही, जिस पर परीक्षा के मानक का पालन न करने के गंभीर आरोप हैं। सरकार ने इस एजेंसी द्वारा आयोजित JPSC की 10 परीक्षाएं और JSSC की 5 बड़ी परीक्षाएं रद्द कर दी हैं।

कोर्ट में होगी आर-पार की लड़ाई

सचिवालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे चयनित अभ्यर्थियों ने साफ कर दिया है कि वे अपने हक के लिए अब चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने मंगलवार से बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर ली है और सरकार के इस फैसले को झारखंड हाई कोर्ट में चुनौती देने का ऐलान किया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि राज्य सरकार उन बेरोजगार हुए 2000 युवाओं के लिए क्या कदम उठाती है, जिनके हाथों से नियुक्ति पत्र छीन लिया गया है।

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