प्रिंस रहीम आगा खान पंचम की पीएम मोदी से अहम मुलाकात: सामाजिक विकास और विरासत संरक्षण पर हुआ मंथन
नई दिल्ली। शिया इस्माइली मुस्लिम समुदाय के 50वें इमाम प्रिंस रहीम आगा खान पंचम ने अपनी पहली आधिकारिक भारत यात्रा के दौरान गुरुवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। फरवरी 2025 में 50वें इमाम का पद संभालने के बाद यह उनका पहला भारत दौरा है। इस बैठक में भारत सरकार और ‘आगा खान डेवलपमेंट नेटवर्क’ के बीच ग्रामीण उत्थान, स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक विकास से जुड़ी पहलों को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी।
स्वर्गीय आगा खान चतुर्थ के योगदान को किया याद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के जरिए मुलाकात की जानकारी साझा की। उन्होंने स्वर्गीय आगा खान चतुर्थ (49वें इमाम) द्वारा दुनिया भर में किए गए जनकल्याणकारी और विकास कार्यों को याद किया। पीएम मोदी ने बताया कि बैठक में स्वास्थ्य, कृषि, ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ युवाओं और महिलाओं के सशक्तिकरण के क्षेत्रों में AKDN के साथ साझेदारी को और मजबूत करने पर सार्थक चर्चा हुई।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भी की मुलाकात
प्रधानमंत्री से मिलने से पहले प्रिंस रहीम आगा खान ने विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से भी वार्ता की। विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया पर बताया कि बैठक में आगा खान डेवलपमेंट नेटवर्क द्वारा सामाजिक उत्थान और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण के क्षेत्र में चलाए जा रहे कार्यों की समीक्षा की गई, साथ ही भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए साझा प्रयासों की संभावनाओं को तलाशा गया।
15 सितंबर तक का भारत दौरा, इन शहरों का करेंगे रुख
विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रिंस रहीम आगा खान पंचम उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन के औपचारिक निमंत्रण पर 9 से 15 सितंबर तक एक सप्ताह की भारत यात्रा पर हैं। नई दिल्ली में आधिकारिक बैठकों के बाद वे अहमदाबाद, मुंबई और हैदराबाद का दौरा करेंगे। इन शहरों में एकेडीएन लंबे समय से स्वास्थ्य, शिक्षा और सामुदायिक विकास की विभिन्न परियोजनाओं का संचालन कर रहा है।
फरवरी 2025 में संभाली थी कमान
गौरतलब है कि फरवरी 2025 में अपने पिता प्रिंस करीम आगा खान चतुर्थ के निधन के बाद प्रिंस रहीम आगा खान ने इस्माइली समुदाय के 50वें इमाम के रूप में बागडोर संभाली थी। उनके पिता ने 1967 में ‘आगा खान फाउंडेशन’ की नींव रखी थी, जो आज एशिया, अफ्रीका, यूरोप और अमेरिका समेत 18 देशों में वंचित वर्गों की मदद के लिए कार्यरत है।

