INDIA Bloc Meeting: AAP-DMK ने बनाई दूरी, INDIA गठबंधन की बैठक में दिखी अंदरूनी कलह
दिल्ली में आयोजित INDIA गठबंधन की अहम बैठक के बीच आम आदमी पार्टी (AAP) और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के शामिल नहीं होने से राजनीतिक हलकों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। विपक्षी दलों की इस बैठक को आगामी चुनावी रणनीति और गठबंधन की मजबूती के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा था। हालांकि दो प्रमुख सहयोगी दलों की अनुपस्थिति ने गठबंधन के भीतर मतभेदों की अटकलों को हवा दे दी है।
कांग्रेस ने सहयोगी दलों को दी एकजुटता की नसीहत
बैठक से दूरी बनाने वाले दलों पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा कि विपक्षी दलों को लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए एक मंच पर रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई दल गठबंधन से अलग रास्ता अपनाता है तो उसका असर विपक्ष की सामूहिक ताकत पर पड़ सकता है। उनके अनुसार, भाजपा के खिलाफ प्रभावी मुकाबले के लिए विपक्षी एकता आवश्यक है।
DMK ने कांग्रेस पर लगाया भरोसा तोड़ने का आरोप
DMK ने बैठक में शामिल न होने के अपने फैसले को सही ठहराते हुए कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि कांग्रेस ने कई मौकों पर सहयोगी दलों की भावनाओं और हितों की अनदेखी की है। DMK नेताओं का दावा है कि तमिलनाडु में गठबंधन की सफलता के बावजूद कांग्रेस का रवैया सहयोगात्मक नहीं रहा, जिसके कारण पार्टी ने इस बैठक से दूरी बनाने का निर्णय लिया।
AAP की गैरमौजूदगी पर भी उठे सवाल
बैठक में AAP के शामिल नहीं होने को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। विपक्षी खेमे के कुछ नेताओं का मानना है कि पार्टी अपने संगठनात्मक और राजनीतिक मुद्दों में व्यस्त है। हालांकि AAP की ओर से बैठक में शामिल न होने के कारणों पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
विपक्षी गठबंधन की मजबूती पर नजर
INDIA गठबंधन को राष्ट्रीय राजनीति में भाजपा के खिलाफ एक प्रमुख मंच माना जाता है। ऐसे में सहयोगी दलों के बीच बढ़ती दूरी विपक्षी राजनीति के लिए चुनौती बन सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में गठबंधन की मजबूती इस बात पर निर्भर करेगी कि सदस्य दल अपने मतभेदों को किस तरह सुलझाते हैं।
आगे की रणनीति पर टिकी निगाहें
बैठक के बाद अब सभी की नजर विपक्षी दलों की अगली रणनीति पर है। AAP और DMK की गैरमौजूदगी ने गठबंधन की एकता को लेकर सवाल जरूर खड़े किए हैं, लेकिन विपक्षी दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती आगामी चुनावों के लिए साझा रणनीति तैयार करना और अपने सहयोगियों को साथ बनाए रखना है।

