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दिल्ली हाई कोर्ट का अहम फैसला, निजी स्कूल शिक्षकों को भी मिलेगा चाइल्ड केयर लीव लाभ

नई दिल्ली: यदि आप किसी निजी स्कूल में पढ़ाने वाली मां हैं और अपने बच्चे की शिक्षा या देखभाल के लिए छुट्टी लेना चाहती हैं, तो दिल्ली उच्च न्यायालय के इस फैसले से आपको काफी राहत मिली है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों के शिक्षक भी सरकारी कर्मचारियों की तरह ही चाइल्ड केयर लीव (CCL) का अधिकार है।

यह मामला संगीता नेगी नामक महिला शिक्षिका से संबंधित था, जिन्होंने अपने बेटे की 12वीं कक्षा की पढ़ाई के दौरान उसकी देखभाल के लिए अवकाश का अनुरोध किया था। हालांकि, भारती पब्लिक स्कूल ने उनका अनुरोध अस्वीकार कर दिया। अंततः यह मामला दिल्ली उच्च न्यायालय तक पहुंचा।

दिल्ली हाई कोर्ट ने क्या कहा?

मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने कहा कि बच्चों की देखभाल और उनके भविष्य से जुड़ी जिम्मेदारियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने कहा कि चाइल्ड केयर लीव केवल एक विशेषाधिकार नहीं बल्कि बच्चों के हित और परिवार के कल्याण के लिए बनाया गया एक महत्वपूर्ण प्रावधान है।

दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम और नियमों का हवाला देते हुए न्यायालय ने कहा कि मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों के कर्मचारियों को सरकारी स्कूलों के कर्मचारियों के समान अवकाश लाभ मिलने चाहिए। किसी शिक्षक को केवल इसलिए इन लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता क्योंकि उनके स्कूल को सरकारी सहायता नहीं मिलती है।

न्यायालय ने अपने निर्णय में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी भी की। इसमें कहा गया कि बच्चों का स्वस्थ विकास, उनकी शिक्षा और परिवार के साथ समय बिताने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 से जुड़ा हुआ है। इसका अर्थ यह है कि यह केवल रोजगार का मामला नहीं है, बल्कि जीवन और गरिमा के अधिकारों का भी सवाल है।

पीठ ने कहा कि किसी मां को बच्चे की देखभाल के लिए छुट्टी देने से तभी इनकार किया जाना चाहिए जब कोई बाध्यकारी और असाधारण जनहित का कारण हो। 4 जून के अपने फैसले में, उच्च न्यायालय ने स्कूल को शिक्षक के छुट्टी आवेदन पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया।

आप पर प्रभाव

दिल्ली उच्च न्यायालय का यह निर्णय निजी स्कूलों में कार्यरत हजारों शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत है। सरकारी कर्मचारियों की तरह, अब वे भी अपने बच्चों की शिक्षा, बीमारी या अन्य अत्यावश्यक जरूरतों के लिए बाल देखभाल अवकाश (CCL)) का दावा कर सकेंगे। इससे कामकाजी माता-पिता को काम और परिवार के बीच बेहतर संतुलन बनाने में मदद मिलेगी।इस निर्णय में यह भी स्पष्ट किया गया है कि बच्चों की देखभाल और पारिवारिक जीवन केवल निजी मामले नहीं हैं, बल्कि संवैधानिक अधिकार के मामले हैं। इससे निजी संस्थानों में कर्मचारियों के अधिकारों को मजबूती मिलेगी और कार्यस्थल पर समानता को बढ़ावा मिलेगा। (एजेंसी)

 

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