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बीएसपी प्रमुख मायावती बोलीं- हर हाथ को काम जरूरी, राष्ट्रीय संपत्तियों के निजीकरण पर जताई चिंता

लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की प्रमुख मायावती ने केंद्र सरकार और मोदी सरकार से युवाओं की समस्याओं, जिनमें बेरोजगारी भी शामिल है, के तत्काल समाधान की अपील की है। उन्होंने सरकारों से महंगाई, गरीबी, निरक्षरता, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, पिछड़ापन, जबरन पलायन, महिलाओं की असुरक्षा, कागजात लीक और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों के समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की।

बसपा प्रमुख मायावती ने एक्स पर एक पोस्ट में दिल्ली में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के नेतृत्व में हुए छात्र और युवा विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए केंद्र और राज्य सरकारों को सलाह दी। सीजेपी आंदोलन के बाद से राजनीतिक दलों का ध्यान युवा मुद्दों पर केंद्रित हो गया है। अगले साल उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों के नजदीक आने के साथ ही सभी राजनीतिक दलों का ध्यान युवा मुद्दों पर केंद्रित हो गया है।

मायावती ने अपनी सरकार की तुलना वर्तमान सरकार से की

मायावती ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में अपनी सरकार के दौरान, बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) ने पुलिस और पंचायती राज विभागों में लगभग 2.25 लाख नए सरकारी पद सृजित किए थे और नौकरियों में भर्ती पर लगे प्रतिबंध को हटाकर समाज के सभी वर्गों के लाखों लोगों को सरकारी नौकरियों में नियुक्त किया था।बाद में, जब यह सरकार में नहीं थी, तब भी इसने लंबे समय तक केंद्र और राज्य सरकारों से बार-बार मांग की कि देश में और विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब जैसे राज्यों में अत्यधिक मुद्रास्फीति, अत्यधिक गरीबी, बेरोजगारी, निरक्षरता, खराब स्वास्थ्य प्रणाली, पिछड़ापन और जबरन पलायन, महिलाओं की असुरक्षा, पेपर लीक और भ्रष्टाचार आदि से पीड़ित लोगों की गंभीर समस्याओं को हल करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। लेकिन सभी सरकारें, पूर्व की कांग्रेसी सरकारों की तरह ही ज्यादातर मामलों में उदासीन और लापरवाह बनी रही हैं। यह देश के बिगड़ते राजनीतिक, आर्थिक, संसदीय और सामाजिक हालात के मद्देनजर अति दुखद एवं अत्यंत चिंतनीय है।

परिवारों की वास्तविक चिंताओं को दूर करने की सलाह

बीएसपी प्रमुख ने कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नाम पर शिक्षित युवा लड़के-लड़कियों, विशेषकर बेरोजगारी और अंधकारमय भविष्य से ग्रस्त लोगों ने, दिल्ली के जंतर-मंतर पर 36 दिनों का एक चर्चित विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने इन ज्वलंत मुद्दों को राष्ट्रीय महत्व का मुद्दा बना दिया है और इन पर गंभीरता से चर्चा होनी चाहिए। इसको लेकर देश के शिक्षा मंत्री को भी अपनी कुर्सी गवानी पड़ी है। केंद्र और राज्य सरकारों को देश के करीब सवा सौ करोड़ गरीबों, श्रमिकों, युवाओं, महिलाओं व अन्य मेहनतकश लोगों के अलावा खासकर बेरोजगारी की मार से पीड़ित परिवारों की वास्तविक चिंताओं को दूर करना तत्काल शुरू कर देना चाहिए।

राष्ट्रीय सम्पत्तियों को निजी हाथों में बेचना बंद करें

मायावती ने कहा कि सरकारी नौकरियों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। इसके लिए राष्ट्रीय संपत्तियों की निजी हाथों में बिक्री रोकना और सभी सरकारी विभागों में लाखों रिक्त पदों के लिए समय पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करना उचित होगा, ताकि कागजी कार्रवाई और भ्रष्टाचार से मुक्त रहकर इस समस्या का तत्काल समाधान किया जा सके।

हर परिवार को कम से कम एक सरकारी नौकरी मिले

उन्होंने कहा कि यदि किसी परिवार में एक भी व्यक्ति को सरकारी नौकरी मिल जाए, तो लाखों परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ होगा। इसके अलावा, इससे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के समुदायों को सुरक्षा मिलेगी, जो आरक्षण की व्यापक रूप से अप्रभावी प्रकृति के कारण संविधान द्वारा प्रदत्त आत्मसम्मान के बजाय गरीबी और असहायता का जीवन जीने के लिए विवश हैं।

मुनाफाखोरी का व्यापारिक प्रवृत्ति त्यागें सरकारें

बसपा प्रमुख मायावती ने कहा है कि सभी सरकारों को मुनाफाखोरी और लाभ कमाने की व्यावसायिक प्रवृत्ति को त्यागकर संविधान की सच्ची मानवीय और कल्याणकारी नीतियों और सिद्धांतों को पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ आगे बढ़ाना चाहिए। “सभी के लिए काम” का यह सिद्धांत व्यापक राष्ट्रीय और जनहित में लाखों समस्याओं का रामबाण है। सभी सरकारों से मेरी यही अपील है। उन्होंने कहा है कि इसके साथ ही, जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों और बेरोजगार युवाओं के मुद्दों को लेकर संसद के मौजूदा सत्र में अब तक जारी गतिरोध को समाप्त करना भी आवश्यक है, ताकि उचित बहस और चर्चा के बिना सरकारी विधेयकों को पारित करके कानून बनाने की प्रक्रिया को रोका जा सके।(एजेंसी)

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