अदालती आदेश की नाफरमानी पर सख्त हुआ हाई HC: पूर्व प्रमुख सचिव IAS उमाकांत उमराव के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी
जबलपुर। मध्य प्रदेश की न्यायपालिका ने प्रशासनिक ढिलाई और न्यायिक आदेशों की अनदेखी करने वाले अफसरों को कड़ा संदेश दिया है। हाई कोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने अपने पूर्व आदेश का पालन न करने और अवमानना मामले में पेशी से नदारद रहने पर पशुपालन विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव एवं वरिष्ठ आईएएस अधिकारी उमाकांत उमराव के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने का आदेश दिया है। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति विवेक जैन की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि आदेशों के क्रियान्वयन को लेकर अफसरशाही का यह रवैया कतई स्वीकार्य नहीं है।
90 दिनों की मियाद खत्म, नहीं लौटाया गया वेतन
विवाद की जड़ जबलपुर निवासी सेवानिवृत्त असिस्टेंट वेटरनरी फील्ड ऑफिसर केके गर्ग से जुड़ी है। विभाग द्वारा उनके वेतन से काटी गई राशि को वापस दिलाने के लिए उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
19 अगस्त 2025 का आदेश: अदालत ने याचिका का निपटारा करते हुए शासन को स्पष्ट निर्देश दिया था कि कटौती की गई पूरी राशि 90 दिनों के भीतर सेवानिवृत्त कर्मचारी को वापस लौटाई जाए।
अवमानना का मामला: तय समयसीमा बीत जाने के बाद भी जब संबंधित विभाग ने न तो राशि का भुगतान किया और न ही कोई ठोस वजह बताई, तब पीड़ित पक्ष ने हाई कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल कर दी।
सिर्फ पत्राचार किया, अनुपालन रिपोर्ट और उपस्थिति से बनाई दूरी
अदालत में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता केवीएस सुनील राव ने पीठ को अवगत कराया कि शासन स्तर पर केवल पत्राचार का खेल खेला जा रहा है। विभाग ने हाई कोर्ट की रजिस्ट्री को पत्र भेजकर औपचारिकता तो पूरी की, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी न तो व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर हुए और न ही मूल आदेश के अनुपालन का हलफनामा प्रस्तुत किया गया।
हाई कोर्ट ने टिप्पणी की है कि ‘वारंट के बिना उपस्थित होने की उम्मीद नहीं’
प्रशासन के इस टालमटोल वाले रवैये पर सख्त नाराजगी जताते हुए एकलपीठ ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों से साफ झलकता है कि बिना कड़ा रुख अपनाए न तो संबंधित अधिकारी अदालत में उपस्थित होंगे और न ही पूर्व में पारित आदेश का जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन होगा। इसके साथ ही पीठ ने आईएएस उमाकांत उमराव के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करते हुए अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को नियत कर दी है, जिसमें अधिकारी की व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य की गई है।

