आसमान में अपाचे का पहरा और जमीन पर पिनाका का प्रहार: महाजन रेंज में अमेरिकी राजदूत की मौजूदगी ने बढ़ाई सरगर्मी!
जयपुर। राजस्थान के थार रेगिस्तान स्थित महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में सामरिक हलचल अपने चरम पर पहुंच गई है। भारत और अमेरिका की सेनाओं के बीच जारी द्विपक्षीय मेगा मिलिट्री ड्रिल ‘युद्ध अभ्यास 2026’ के बीच भारत में नवनियुक्त अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर अचानक अग्रिम मोर्चे पर पहुंचे। रेगिस्तान में तोपों की गड़गड़ाहट और लड़ाकू हेलीकॉप्टरों की उड़ान के बीच अमेरिकी राजदूत के इस दौरे ने रक्षा गलियारों में जबरदस्त चर्चा छेड़ दी है। दोनों देशों के बीच सामरिक तालमेल और इंटरऑपरेबिलिटी को परखने के लिए चल रहे इस 22वें संस्करण को भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी का सबसे अहम स्तंभ माना जा रहा है।
हिमालय की बर्फीली चोटियों से तपते रेगिस्तान तक साझा मोर्चा
‘युद्ध अभ्यास 2026’ की रणनीतिक रूपरेखा इस बार बेहद खास और चुनौतीपूर्ण बनाई गई है। एक ओर जहां उत्तराखंड के औली में अत्यधिक ऊंचाई वाले बर्फीले इलाके में जवान युद्धक कौशल तराश रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज की चिलचिलाती धूप और रेतीले माहौल में दूसरा मोर्चा खुला हुआ है। इन दोनों अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों में भारत और अमेरिका के कुल 1200 जांबाज कमांडो और सैनिक एक साथ मिलकर पसीना बहा रहे हैं। महाजन रेंज पहुंचे अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने दोनों सेनाओं के एकीकृत ऑपरेशनों और संयुक्त प्रशिक्षण को करीब से देखा और सैनिकों के तालमेल की जमकर सराहना की।
आसमान से अपाचे का हमला, जमीन पर हॉवित्जर और पिनाका का विध्वंसक तालमेल
महाजन रेंज में युद्धाभ्यास का मुख्य केंद्र बिंदु हवाई और जमीनी हमलों के बीच अचूक समन्वय स्थापित करना रहा। युद्धाभ्यास में अमेरिकी तकनीक से लैस एएच-64ई अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टरों ने आसमान से अचूक प्रहार का अभ्यास किया, जबकि जमीन पर भारतीय और अमेरिकी सैनिकों ने वास्तविक युद्ध जैसे हालात में मोर्चा संभाला। इस संयुक्त ड्रिल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि आपात स्थिति में लड़ाकू हेलीकॉप्टर और इन्फैंट्री ट्रूप्स न्यूनतम समय में दुश्मन के ठिकानों को किस तरह नेस्तनाबूद कर सकते हैं।
रणक्षेत्र में विध्वंसक मारक क्षमता का प्रदर्शन करते हुए हॉवित्जर तोपों और भारत के स्वदेशी पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम से एक साथ लाइव फायरिंग की गई। दोनों देशों के सैनिकों ने एक-दूसरे की हथियार प्रणालियों, संचार उपकरणों और फील्ड तकनीकों का गहन आदान-प्रदान किया। तोपों के इस साझा युद्धाभ्यास ने यह साफ कर दिया कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र और वैश्विक सुरक्षा के किसी भी मोर्चे पर साझा चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए दोनों महाशक्तियों की सेनाएं पूरी तरह तैयार हैं।

