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राज्यसभा चुनाव से पहले BJP ने खेला बड़ा दांव, कई राज्यों से उम्मीदवारों के नाम घोषित

राज्यसभा चुनाव

भारतीय जनता पार्टी ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपने प्रत्याशियों की घोषणा करते हुए संगठन और राजनीतिक अनुभव को प्राथमिकता दी है। पार्टी ने विभिन्न राज्यों से ऐसे नेताओं को मैदान में उतारा है, जो लंबे समय से संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं और अपने-अपने क्षेत्रों में मजबूत पकड़ रखते हैं। उम्मीदवारों की सूची जारी होने के साथ ही राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

राजस्थान में पूनिया, मध्य प्रदेश से तरुण चुग को मिला मौका

राजस्थान से भाजपा ने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया और डॉ. अलका गुर्जर को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। सतीश पूनिया लंबे समय से पार्टी के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं और संगठनात्मक स्तर पर उनकी मजबूत पहचान है। वहीं मध्य प्रदेश से भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल को उम्मीदवार घोषित किया गया है। तरुण चुग को चुनावी रणनीति और संगठन प्रबंधन में उनकी भूमिका के लिए जाना जाता है।

गुजरात में पांच नेताओं पर भरोसा

भाजपा ने गुजरात से राजूभाई शुक्ला, मुकेशभाई राठवा, मानसिंह परमार और जीतेंद्र मेघजीभाई कंजारिया को राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया है। पार्टी का मानना है कि ये नेता राज्य में संगठन को और मजबूती देने के साथ-साथ संसद में भी प्रभावी भूमिका निभाएंगे।

पूर्वोत्तर और ओडिशा पर भी फोकस

अरुणाचल प्रदेश से ताई तगाक और मणिपुर से ए. शारदी देवी को उम्मीदवार बनाकर भाजपा ने पूर्वोत्तर राज्यों में अपनी राजनीतिक मौजूदगी को और मजबूत करने का संदेश दिया है। वहीं ओडिशा से देबाशीष सामंतराय को टिकट देकर पार्टी ने राज्य की राजनीति में अपनी सक्रियता बढ़ाने की रणनीति दिखाई है।

BJP में शामिल होने के बाद मिला बड़ा अवसर

देबाशीष सामंतराय हाल ही में बीजू जनता दल (BJD) छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। भाजपा ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें राज्यसभा चुनाव का उम्मीदवार बनाया है। राजनीतिक जानकार इसे ओडिशा में पार्टी के विस्तार और नए सामाजिक-राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देख रहे हैं।

संगठन को मजबूत करने की रणनीति

उम्मीदवारों की सूची से संकेत मिलता है कि भाजपा ने ऐसे नेताओं को प्राथमिकता दी है जो संगठन के लिए लंबे समय से काम कर रहे हैं और जिनकी विभिन्न राज्यों में मजबूत पकड़ है। पार्टी की यह रणनीति आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति और संगठनात्मक विस्तार दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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