बच्चों की मौत पर उबाल: बालाघाट बंद कर सड़क पर उतरा आदिवासी समाज
बालाघाट: मध्य प्रदेश के बालाघाट में बिरसा ब्लॉक में बच्चों की मौत का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। घटना को लेकर आदिवासी समाज का आक्रोश अब सड़क पर दिखाई देने लगा है। बच्चों की मौत के विरोध में आदिवासी संगठनों ने बालाघाट बंद कराया। बंद के चलते शहर के कई हिस्सों में बाजार बंद रहे और सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुईं।
आदिवासी संगठनों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता इस विरोध में शामिल हुए। प्रदर्शन से पहले शहर में रैली निकाली गई, जिसमें लोगों ने बच्चों की मौत के मामले में जवाबदेही तय करने और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग की। रैली के बाद प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रशासन के सामने अपनी मांगें रखीं।
सुबह से बाजारों में दिखा बंद का असर
बिरसा ब्लॉक में बच्चों की मौत के विरोध में आयोजित बंद का असर सुबह से ही बालाघाट शहर में नजर आया। कई दुकानदारों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखे। बाजारों में आम दिनों की तुलना में कम भीड़ रही और सड़कों पर भी आवाजाही प्रभावित दिखाई दी।
बंद के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों से आदिवासी समाज के लोग बालाघाट पहुंचते रहे। दोपहर तक प्रदर्शन में शामिल लोगों की संख्या बढ़ गई। इसके बाद आयोजित सभा में आदिवासी संगठनों के नेताओं ने बच्चों की मौत के मामले को लेकर प्रशासन से गंभीरता से कार्रवाई करने की मांग की।
बैनर-तख्तियों के साथ निकली रैली
विरोध सभा के बाद आदिवासी संगठनों ने शहर में रैली निकाली। रैली में शामिल लोग हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर आगे बढ़े। इस दौरान बच्चों की मौत के मामले और आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर प्रशासन को विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उनका कहना है कि बच्चों को समय पर उपचार और जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए।
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कलेक्ट्रेट पहुंचकर सौंपा विरोध
रैली के कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद प्रदर्शनकारियों ने परिसर के सामने विरोध जताया। यहां आदिवासी संगठनों के नेताओं ने प्रशासन के समक्ष अपनी मांगें रखीं। उन्होंने बच्चों की मौत के कारणों की विस्तृत जांच कराने के साथ-साथ पूरे मामले में जिम्मेदारी तय करने की मांग की।
संगठनों ने कहा कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने यह भी मांग उठाई कि प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाया जाए।
सिर्फ जांच नहीं, कार्रवाई की मांग
आदिवासी संगठनों ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग केवल जांच कराने तक सीमित नहीं है। संगठन चाहते हैं कि जांच के बाद सामने आने वाली जिम्मेदारी के आधार पर ठोस कार्रवाई की जाए। साथ ही आदिवासी बहुल इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
बालाघाट बंद और कलेक्ट्रेट के सामने हुए प्रदर्शन के बाद अब इस मामले में प्रशासन के अगले कदम पर नजर है। बच्चों की मौत का मुद्दा फिलहाल जिले में आदिवासी समाज के प्रमुख विरोध का केंद्र बना हुआ है।

