खड़े हनुमान विवाद: साध्वी हर्षानंद गिरी ने 7 फीट के गड्ढों पर उठाए सवाल; बंदरों का जमावड़ा बना आस्था का केंद्र
उज्जैन। सिंहस्थ 2028 के तहत सड़क चौड़ीकरण की जद में आए उज्जैन के प्रसिद्ध ‘खड़े हनुमान मंदिर’ को लेकर विवाद अब चरम पर पहुंच गया है। आम भक्तों के आक्रोश और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद अब संत समाज ने भी मोर्चा संभाल लिया है। इसी कड़ी में साध्वी हर्षानंद गिरी खड़े हनुमान मंदिर पहुंचीं, जहां उन्होंने वैदिक बटुकों और संतों के साथ सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ किया। स्थल का निरीक्षण करने के बाद उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताते हुए साफ कहा कि अब प्रतिमा को हिलाने का कोई भी नया प्रयास बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
‘7 फीट गहरे गड्ढे मशीनों का सबूत, अब 5वां प्रयास न करे सरकार’
मंदिर को हटाने के लिए भारी मशीनों के इस्तेमाल पर साध्वी हर्षानंद गिरी ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि पहले उन्हें घटनाक्रम की पूरी जानकारी नहीं थी, लेकिन मौके पर पहुंचकर जब उन्होंने देखा तो प्रतिमा के दोनों ओर करीब सात-सात फीट गहरे गड्ढे खुदे मिले।
उन्होंने तीखे लहजे में कहा, “प्रतिमा के पास यह 7 फीट गहरा गड्ढा कोई कुत्ता अपने पंजों से तो नहीं खोद सकता। वहां साफ तौर पर बड़ी मशीनों और उपकरणों का इस्तेमाल कर प्रतिमा को जबरन उखाड़ने की कोशिश की गई है।” उन्होंने आगे कहा कि प्रशासन ने प्रतिमा को सुरक्षित रखने की जो कोशिश की उसका वे सम्मान करती हैं, लेकिन जब चार बार प्रयास करने पर भी बजरंगबली अपने स्थान से नहीं हिले, तो सरकार को समझ जाना चाहिए कि ईश्वर की क्या इच्छा है। अब पांचवां प्रयास करने की गलती कतई नहीं होनी चाहिए।
‘अखाड़ों और गद्दियों से बाहर निकलें संत, वरना कुछ नहीं बचेगा’
हर्षानंद गिरी ने उज्जैन के बड़े महामंडलेश्वरों और अखाड़ों की चुप्पी पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जो लोग हिंदुओं को एकजुट करने की बात करते हैं, उन्हें आज हनुमान जी के सम्मान के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह संत समाज के लिए बेहद शर्म की बात है कि आज भगवान हनुमान जी को खुले में टेंट के नीचे दर्शन देने पड़ रहे हैं। अगर ईश्वर ने खुद यह संकेत दे दिया है कि वे वहां से नहीं हटना चाहते, तो संतों का यह पहला कर्तव्य है कि वे मठों-आश्रमों से बाहर निकलें और उसी स्थान पर मंदिर के पुनर्निर्माण की मांग करें।
‘छोटा AIIMS’ है यह धाम, अयोध्या जैसी नौबत न आए
साध्वी ने कहा कि भक्त इस दरबार को ‘छोटा AIIMS’ मानते हैं, जहां हनुमान जी एक दिव्य वैद्य के रूप में दुख-दर्द दूर करते हैं। लोग यहां दूर-दूर से झाड़ा लगवाने और ताबीज लेने आते हैं। बिना किसी चमत्कार या राहत के जनता का इतना बड़ा सैलाब यूं ही नहीं उमड़ता। उन्होंने अयोध्या का उदाहरण देते हुए कहा कि महाकाल की नगरी में मंदिरों को इस तरह तोड़ना अनुचित है और वे नहीं चाहतीं कि यहां भी भगवान वर्षों तक टेंट और विवादों में फंसे रहें। उन्होंने मांग की कि जहां मंदिर तोड़ा गया है, वहीं उसका पहले से भी ज्यादा भव्य निर्माण कराया जाए।
मंदिर में वानर सेना का पहरा? तस्वीरों ने बढ़ाई आस्था
इस पूरे विवाद के बीच मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में बंदरों का पहुंचना श्रद्धालुओं के बीच कौतूहल और गहरी आस्था का विषय बन गया है। मंदिर का शेड हटने के बाद से बंदरों का झुंड लगातार प्रतिमा के आसपास मंडराता दिख रहा है। दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालु इसे साक्षात चमत्कार मान रहे हैं और कह रहे हैं कि ‘प्रभु की रक्षा के लिए स्वयं वानर सेना पहरा देने पहुंच गई है।’ हालांकि यह सामान्य वन्यजीव गतिविधि भी हो सकती है, लेकिन वर्तमान तनावपूर्ण और भक्तिमय माहौल में इन तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर सनसनी मचा दी है। फिलहाल भक्तों और संतों की एक ही मांग है कि चौड़ीकरण के नक्शे में बदलाव कर मंदिर को उसी मूल स्थान पर स्थापित रखा जाए।

