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आरोप झूठे और मनगढ़ंत थे! बृजभूषण सिंह को बरी करते हुए दिल्ली कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

Delhi Court on Brij Bushan Sharan Singh: दिल्ली की एक अदालत ने हाल ही में पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह को यौन उत्पीड़न के मामले में बरी कर दिया। अदालत ने आरोपों को झूठा और मनगढ़ंत बताया, साथ ही कहा कि ये आरोप राजनीतिक रूप से प्रेरित प्रतीत होते हैं। अदालत ने पाया कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप सुनियोजित और स्पष्ट रूप से मनगढ़ंत थे।पिछले सोमवार को राउज एवेन्यू कोर्ट की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्विनी पवार ने बृजभूषण के साथ-साथ पूर्व डब्ल्यूएफआई सहायक सचिव विनोद तोमर को भी इस मामले में बरी कर दिया। ये टिप्पणियां आदेश की एक प्रति में दर्ज हैं, जिसे अदालत ने अभी तक सार्वजनिक नहीं किया है।

गवाहों के बयानों में बड़े विरोधाभास

अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार ने अपने फैसले में गवाहों के बयानों में कई विरोधाभासों की ओर इशारा किया। अदालत ने पाया कि दस्तावेजी साक्ष्य भी कथित घटनाओं की तारीखों और परिस्थितियों से मेल नहीं खाते। मंगोलिया में ओलंपिक क्वालिफिकेशन के दौरान हुई एक कथित घटना का भी जिक्र किया गया। एक बयान में घटना को 2015 में तुर्की में घटित बताया गया, जबकि दूसरे बयान में इसे 2016 में मंगोलिया में घटित बताया गया। अदालत ने कहा कि यह मामूली विसंगति नहीं है। यह घटना के देश और वर्ष जैसी बुनियादी जानकारियों का खंडन करती है। अपने आदेश में न्यायालय ने कहा कि जिन पांच पीड़ितों के आरोपों के आधार पर अभियुक्तों के खिलाफ आरोप तय किए गए थे, उनमें से दो ने अपने बयान वापस ले लिए हैं। न्यायालय ने कहा कि गवाह संख्या 5 और 10 को उनके कहने पर आरोप लगाने के लिए मजबूर किया गया था। इसके अलावा, अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाया है कि इन दोनों पीड़ितों ने अभियुक्तों के दबाव में या किसी अन्य कारण से आरोपों का समर्थन नहीं किया था।

राजधानी की निचली अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों के पैटर्न में समानताएं दिखाई देती हैं। कथित घटनाएं उस समय घटीं जब पीड़ित एक टूर्नामेंट में भाग ले रहे थे और उस स्थान पर जहां खिलाड़ियों के परिवार और दोस्तों सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। अदालत ने यह भी कहा कि आरोप आश्चर्यजनक रूप से समान थे और एक ही समय और एक ही स्थान पर लगाए गए थे, जो आरोपियों के खिलाफ एक सुनियोजित साजिश का संकेत देते हैं।पिछले सोमवार को कार्यवाही के दौरान चार महिलाओं की ओर से पेश हुईं वरिष्ठ वकील रेबेका जॉन ने बरी होने के फैसले को “बेहद परेशान करने वाला” बताया था। वहीं कोर्ट से राहत मिलने के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने पत्रकारों से कहा कि उन्होंने कहा था कि अगर आरोप सही साबित हुए तो वह खुद को फांसी लगा लेंगे। मुझे बहुत खुशी है कि मुझे बरी कर दिया गया। ये मेरे लिए और मेरे समर्थकों के लिए अच्छी खबर है। मैं इससे ज्यादा और कुछ नहीं कह सकता।

बीजेपी के अमित मालवीय ने उठाया सवाल

अदालत के फैसले के संबंध में, भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने सवाल उठाया, “दिल्ली अदालत के फैसले से एक सीधा सा सवाल उठता है। जानबूझकर झूठे आरोप लगाने वालों और राजनीतिक वर्ग के उन लोगों के खिलाफ क्या दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए जिन्होंने किसी व्यक्ति, संगठन या सरकार को बदनाम करने की साजिश के तहत जानबूझकर इन आरोपों को हवा दी? आप आरोपों को हथियार नहीं बना सकते, मीडिया ट्रायल नहीं कर सकते, प्रतिष्ठा को नष्ट नहीं कर सकते और फिर न्यायिक जांच में मामला खारिज होने पर यूं ही बच नहीं सकते।”

क्या था मामला

गौरतलब है कि ये आरोप अप्रैल-मई 2023 में सामने आए, जब महिला पहलवानों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर बृजभूषण सिंह के यौन उत्पीड़न के आरोप में प्रदर्शन किया था। बजरंग पुनिया, अन्य शीर्ष महिला पहलवानों के साथ, इस 36 दिवसीय प्रदर्शन में एक प्रमुख चेहरा थे। (एजेंसी)

 

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