UPI Payment New Rules: 2000 रुपये से अधिक के UPI ट्रांजेक्शन पर लगेगा चार्ज, सरकार ने संसद में पेश किया विधेयक
MDR चार्ज सिर्फ 2000 रुपये से ऊपर के व्यावसायिक लेनदेन पर लागू होगा, आम यूजर्स पर कोई असर नहीं
नई दिल्ली। ऑनलाइन ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने वाली मोदी सरकार अब उसे सरकारी तिजोरी भरने का जरिया के रूप में इस्तेमाल करने जा रही है। मोदी सरकार UPI पेमेंट के नियम में संशोधन करने जा रही है। इसके तहत 2000 रुपये से लेकर उससे अधिक के UPI ट्रांजेक्शन पर चार्ज लगेगा।
मोदी सरकार ने संसद में नया विधेयक पेश किया है, जिसके तहत MDR चार्ज की वापसी हो रही है। इसके तहत 2000 रुपये के ऊपर पेमेंट पर चार्ज देना होगा। यह फैसला देश के डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम में एक बड़ा बदलाव ला सकता है।
क्या है नया विधेयक?
वित्त मंत्रालय ने संसद में ‘भुगतान और निपटान प्रणाली (संशोधन) विधेयक, 2027’ पेश किया है। इस बिल के तहत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने की बात कही गई है। यह चार्ज 2000 रुपये से ज्यादा की लिमिट पर लागू किया जा सकता है।
हालांकि राहत वाली बात यह है कि यह सभी लोगों पर लागू नहीं होगा। आम यूजर्स पर इसका कोई असर नहीं होगा। यह चार्ज सिर्फ बड़े व्यवसाय से जुड़े लोगों पर लगेगा। दूध, सब्जियां, किराने का सामान जैसी रोजमर्रा की खरीदारी और ऑटो रिक्शा व टैक्सी के किराए पर इसका असर पड़ने की संभावना नहीं है।
MDR चार्ज क्या है?
MDR (Merchant Discount Rate) एक ऐसा शुल्क है, जो व्यवसाय, डिजिटल लेनदेन करने के लिए बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को देते हैं। इसलिए कोई भी शुल्क व्यापारियों पर लागू होगा, न कि UPI का उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं पर।
यह नियम जनवरी 2020 में शुरू होने वाला था। हालांकि मोदी सरकार ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को UPI और रुपे डेबिट कार्ड लेनदेन पर MDR चार्ज लगाने से रोक दिया था। अब सरकार इस फैसले को उलट रही है।
इन यूजर्स पर लागू होगा नियम
यह मुख्य तौर पर बैंक, UPI सर्विस प्रोवाइडर, मर्चेंट पेमेंट इकोसिस्टम, BHIM-UPI के माध्यम से छोटे भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारियों पर पड़ता है। इसका सीधा असर उन व्यापारियों पर होगा जो 2000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान स्वीकार करते हैं।
एक आंकड़े के मुताबिक, 95 फीसदी UPI ट्रांजेक्शन 2000 रुपये से कम वाले होते हैं। सिर्फ 5 फीसदी ही ट्रांजेक्शन 2000 रुपये से ज्यादा का होता है। इसका मतलब है कि इन 5 फीसदी ही मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर ये चार्ज लागू होगा।
कितना लगेगा चार्ज?
रिपोर्ट के अनुसार, 2000 रुपये से ऊपर के व्यावसायिक लेन-देन पर प्रस्तावित शुल्क 0.25% से 0.4% तक हो सकता है, और 25-30 बेसिस पॉइंट्स तक के शुल्क पर भी चर्चा चल रही है। इसके लागू होने की समयसीमा पर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है।
उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यापारी 10,000 रुपये का UPI पेमेंट स्वीकार करता है, तो उसे 0.25% यानी 25 रुपये का MDR चार्ज देना होगा। यह राशि सीधे उसके खाते से कटेगी।
क्यों ला रही है सरकार यह नियम?
सरकार का तर्क है कि UPI सेवाओं को बनाए रखने और उन्हें और बेहतर बनाने के लिए यह कदम जरूरी है। बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को UPI इंफ्रास्ट्रक्चर को मेंटेन करने में काफी खर्च आता है। अब तक सरकार इन खर्चों को सब्सिडी दे रही थी। अब सरकार चाहती है कि बड़े व्यावसायिक ट्रांजेक्शन पर लगने वाला MDR चार्ज इस खर्च को कवर करे।
हालांकि, विपक्षी दलों का कहना है कि यह फैसला छोटे व्यापारियों पर बोझ डालेगा और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की सरकार की नीति के खिलाफ है।
कांग्रेस ने साधा निशाना
सरकार की इस योजना पर कांग्रेस ने निशाना साधा है। कांग्रेस ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा:
“मोदी ने आपकी जेब काटने का प्लान बना लिया है। जल्द ही आपसे 2,000 रुपए से ज्यादा के UPI पेमेंट पर वसूली की जा सकती है। लोग पहले ही महंगाई से परेशान हैं, लेकिन नरेंद्र मोदी को उससे फर्क नहीं पड़ता। वो नए-नए प्लान लाकर आपकी पाई-पाई निचोड़ लेना चाहते हैं। मोदी का फंडा साफ है: जनता मरती रहे वसूली चलती रहे।”
विपक्षी दलों का कहना है कि यह फैसला आम जनता पर अतिरिक्त बोझ डालेगा और डिजिटल भारत के सपने को नुकसान पहुंचाएगा।
छोटे व्यापारियों पर क्या होगा असर?
छोटे व्यापारी, जो UPI के माध्यम से 2000 रुपये से अधिक के भुगतान स्वीकार करते हैं, उन्हें अब MDR चार्ज देना होगा। इससे उनकी लागत बढ़ेगी और वे अपने ग्राहकों से यह चार्ज वसूल सकते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिस्पर्धा के कारण छोटे व्यापारी इस चार्ज को ग्राहकों पर डालने से बच सकते हैं।
दूसरी ओर, बड़े व्यापारी और कॉरपोरेट इस चार्ज को आसानी से वहन कर सकते हैं। इसलिए, इस फैसले का सबसे अधिक असर मध्यम स्तर के व्यापारियों पर पड़ने की संभावना है।
क्या बदलेगा आम यूजर्स के लिए?
आम यूजर्स के लिए कुछ भी नहीं बदलेगा। वे 2000 रुपये से अधिक के भी UPI पेमेंट करते हैं, तो उन पर कोई चार्ज नहीं लगेगा। यह चार्ज सिर्फ व्यापारियों पर लागू होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कंज्यूमर टू कंज्यूमर (P2P) ट्रांजेक्शन पर कोई चार्ज नहीं होगा।
इसका मतलब है कि यदि आप किसी दोस्त या परिवार के सदस्य को पैसे भेजते हैं, तो उस पर कोई MDR चार्ज नहीं लगेगा। यह चार्ज सिर्फ कंज्यूमर टू मर्चेंट (P2M) ट्रांजेक्शन पर लागू होगा।
विधेयक पर आगे क्या?
यह विधेयक अभी संसद में पेश किया गया है। इस पर संसदीय समिति में चर्चा होगी और फिर इसे पास कराया जाएगा। सरकार का कहना है कि इसे जल्द से जल्द पास कराया जाएगा।
हालांकि, विपक्षी दलों ने इस विधेयक का विरोध करने की बात कही है। वे इसे आम जनता विरोधी बता रहे हैं। कांग्रेस ने कहा है कि वे इस विधेयक को संसद में पास नहीं होने देंगे।
फिलहाल, इस विधेयक पर संसद में चर्चा जारी है और आम जनता पर इसके प्रभाव को लेकर राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है।

