FSSAI Bans Dabur Products: डाबर के शहद, घी, नारियल तेल समेत कई प्रोडक्ट्स पर बैन! जानिए क्या है वजह?
142 साल पुरानी कंपनी के खिलाफ FSSAI का बड़ा एक्शन, ‘100% नेचुरल’ और ‘100% प्योरिटी गारंटेड’ जैसे दावों पर लगी रोक
FSSAI Bans Dabur Products। 142 साल पुरानी डाबर कंपनी के खिलाफ फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने बड़ा एक्शन लिया है। FSSAI ने डाबर कंपनी के कई प्रोडक्ट्स पर बैन लगा दिया है। इनमें शहद और गाय का घी भी शामिल है। ये प्रोडक्ट 100% शुद्धता के दावे के साथ बेचे जा रहे थे।
फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने इन दावों को गुमराह करने वाला बताया है। इस पर डाबर से 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगी है। FSSAI ने 3 अगस्त को सोशल मीडिया के जरिए इस बात की जानकारी दी।
किन प्रोडक्ट्स पर लगा बैन?
प्रतिबंध के आदेश में निम्नलिखित प्रोडक्ट्स शामिल हैं
- शहद (Honey)
- एप्पल साइडर विनेगर
- वर्जिन नारियल तेल
- तिल का तेल
- गाय का घी
- नारियल पानी
- नारियल का दूध
क्या हैं दावे?
FSSAI के अनुसार, कंपनी की वेबसाइट पर बेचे जा रहे खाद्य पदार्थों पर भ्रामक दावे पाए गए थे। इनमें ‘100% नेचुरल’, ‘100% प्योर’, ‘100% प्योरिटी गारंटेड’, ‘100% ऑर्गनिक’ और ‘100% टेंडर कोकोनट वॉटर’ जैसे लेबल शामिल थे।
FSSAI का कहना है कि ‘100 प्रतिशत’ दावों का यह उपयोग FSS विनियम, 2018 का उल्लंघन करता है। ये दावे अस्पष्ट, असत्यापित और उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले हैं।
पहले भी दिया गया था नोटिस
FSSAI ने बताया कि उसने पहले भी डाबर को नोटिस जारी कर ऐसे भ्रामक ‘100%’ दावों को तुरंत बंद करने का निर्देश दिया था। हालांकि, कंपनी ने कोई कदम नहीं उठाया।
इसके बाद FSSAI को यह कड़ा प्रोहिबिशन (बैन) ऑर्डर जारी करना पड़ा। अब डाबर को 15 दिनों के अंदर यह बताना होगा कि उन्होंने FSSAI के आदेश के बाद क्या कदम उठाए हैं।
डाबर ने क्या कहा?
कार्रवाई पर डाबर इंडिया ने बयान में कहा, “हमें FSSAI का नोटिस मिला है। हम अपनी वेबसाइट पर नोटिस में बताई गई जानकारी की जांच कर रहे हैं।”
‘100%’ के दावे के लिए वैज्ञानिक प्रमाण जरूरी
FSSAI के अनुसार ‘100%’ शब्द की फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (एडवरटाइजिंग एंड क्लेम्स) रेगुलेशंस, 2018 में कोई तय परिभाषा नहीं है। इसलिए ‘100% नेचुरल’, ‘100% प्योर’, ‘100% प्योरिटी गारंटीड’ और ‘100% ऑर्गेनिक’ जैसे दावे लोगों को गुमराह कर सकते हैं।
नियमों के मुताबिक किसी भी खाद्य उत्पाद पर किया गया दावा सच, स्पष्ट और वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित होना चाहिए।
फिलहाल, इस मामले में आगे की कार्रवाई FSSAI की जांच रिपोर्ट और डाबर की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगी।

