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18 बच्चों के बीमार होने पर सियासत गरम, सांसद हनुमान बेनीवाल ने बताई शर्मनाक लापरवाही

Jaipur Sewer Water Issue: जयपुर के गोवर्धनपुरी इलाके में सीवेज-युक्त पीने के पानी का मुद्दा अब राजनीतिक रंग ले रहा है। पिछले 25 दिनों में इलाके के ‘C’ और ‘F’ ब्लॉक में दूषित पानी की सप्लाई के कारण कम से कम 18 बच्चे उल्टी और दस्त से बीमार पड़ गए हैं। इस मामले को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के प्रमुख और नागौर के सांसद हनुमान बेनीवाल ने इस स्थिति को प्रशासन की बड़ी विफलता और लापरवाही करार दिया है।

सांसद हनुमान बेनीवाल ने बीजेपी सरकार को घेरा

सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर पोस्ट करते हुए, हनुमान बेनीवाल ने इस पूरी घटना को राज्य सरकार की “शर्मनाक लापरवाही” बताया। उन्होंने लिखा कि 25 दिनों तक लोगों को दूषित पानी की सप्लाई होना और 18 बच्चों का बीमार पड़ना बहुत गंभीर मामला है। बार-बार शिकायतें मिलने के बावजूद, न तो कॉर्पोरेशन और न ही संबंधित विभाग ने कोई कार्रवाई की।आगे उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से सवाल पूछा कि जब लोगों को स्वच्छ पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा भी नहीं मिल पा रही है, तो आखिर जिम्मेदारी किसकी है। उन्होंने PHED मंत्री की जवाबदेही तय करने की मांग भी उठाई।

उच्च स्तरीय जांच और सख्त कार्रवाई की मांग

बेनीवाल ने लिखा कि राजस्थान में खराब सिस्टम का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। इसलिए, उन्होंने मांग की है कि राज्य सरकार पूरे मामले की उच्च-स्तरीय जांच का आदेश दे और PHED तथा नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे। उन्होंने बीमार बच्चों के लिए मुफ्त और बेहतर इलाज की भी मांग की, साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पूरे राज्य में पीने के पानी की सप्लाई व्यवस्था का विशेष ऑडिट कराने को कहा।

25 दिन तक लोगों को मिलता रहा दूषित पानी

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई दिनों तक नलों से साफ पानी के बजाय सीवर मिला हुआ बदबूदार पानी आता रहा। यहां तक कि उनके घरों में लगे पानी के टैंकों से भी बदबू आने लगी थी। निवासियों का कहना है कि हालात इतने खराब हो गए थे कि कई परिवारों को पीने के पानी के लिए पानी के टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ा। उनका आरोप है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद इस समस्या का समय पर समाधान नहीं किया गया।

18 बच्चों के बीमार होने के बाद बढ़ा मामला

दूषित पानी से बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। पिछले लगभग 20 दिनों में, कम से कम 18 बच्चे उल्टी और दस्त की शिकायत के बाद बीमार पड़ गए, जिससे इलाके में चिंता का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर संबंधित विभाग ने शुरुआत में ही कार्रवाई की होती, तो बच्चे बीमार नहीं पड़ते और स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती।

PHED- कई बार दी सूचना, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई

जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) का कहना है कि शिकायत मिलने पर उनकी टीम तुरंत मौके पर पहुंची और पांच-छह संदिग्ध कनेक्शन काट दिए गए। इसके बावजूद, दूषित पानी की समस्या बनी रही। विभाग के अधिकारियों का दावा है कि नगर निगम को पत्रों और शिकायतों के जरिए सीवर लाइन के लीकेज के बारे में बार-बार सूचित किया गया था। हालांकि, समय पर मरम्मत न होने के कारण दूषित पानी पीने के पानी की सप्लाई में मिलता रहा।

नगर निगम का जवाब

शुरुआत में, नगर निगम के आदर्श नगर जोन के जूनियर इंजीनियर (JEN) ​​रवि सोनवाल ने इस मामले की शिकायत के बारे में कोई जानकारी होने से इनकार किया। हालांकि, साइट का निरीक्षण करने के बाद उन्होंने कहा कि लीकेज की सही जगह का पता लगाने के लिए पूरी सीवर लाइन की जांच करनी होगी। उनके अनुसार, इस प्रक्रिया में तीन से चार दिन लग सकते हैं। फिलहाल इस समस्या का स्थायी समाधान खोजने का काम चल रहा है। (एजेंसी)

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