राहुल गांधी के कार्यक्रम पर नया प्रशासनिक पेंच: IDA ने जमीन तो दी लेकिन इस फैसले पर टिकी निगाहें
इंदौर। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के मध्य प्रदेश प्रवास के दौरान इंदौर में प्रस्तावित ‘छात्रों की गूंज’ संवाद कार्यक्रम को लेकर प्रशासनिक स्तर पर खींचतान देखने को मिल रही है। इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) ने कार्यक्रम के लिए 12 हजार वर्गमीटर रिक्त भूमि के उपयोग की अनुमति तो दे दी है, लेकिन इसके साथ ही 5 सख्त शर्तें भी जोड़ दी हैं। इसके बावजूद कार्यक्रम के आयोजन को लेकर असमंजस बना हुआ है, क्योंकि इंदौर पुलिस की तरफ से अब तक आयोजन की आधिकारिक अनुमति जारी नहीं की गई है।
17 से 19 सितंबर तक आवंटित किया गया मैदान
प्राधिकरण के आदेश के अनुसार, आयोजकों को 17 से 19 सितंबर तक के लिए 12 हजार वर्गमीटर रिक्त मैदान उपलब्ध कराया गया है। हालांकि, प्राधिकरण ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह महज भूमि का अस्थायी आवंटन है, न कि संपूर्ण आयोजन की अंतिम हरी झंडी।
IDA ने आयोजकों के सामने रखी हैं ये 5 अहम शर्तें:
केवल भूमि की उपलब्धता: IDA की भूमिका केवल खाली मैदान उपलब्ध कराने तक सीमित रहेगी; मंच या अन्य व्यवस्थाओं का दायित्व आयोजकों का होगा।
सुरक्षा व्यवस्था का जिम्मा: कार्यक्रम स्थल पर भीड़ प्रबंधन, बैरिकेडिंग और आंतरिक सुरक्षा की पूरी व्यवस्था आयोजकों को स्वयं करनी होगी।
अन्य विभागों की NOC अनिवार्य: बिजली, दमकल, नगर निगम सहित अन्य संबंधित विभागों से आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य होगा।
ध्वनि विस्तारक यंत्रों की अनुमति: सभा स्थल पर लाउडस्पीकर और साउंड सिस्टम के उपयोग के लिए सक्षम प्राधिकारी से अलग से मंजूरी लेनी होगी।
अतिरिक्त दिनों पर लगेगा लीज रेंट: यदि 17 से 19 सितंबर की तय अवधि से पहले तैयारी के लिए या बाद में सफाई आदि के लिए जमीन का उपयोग किया गया, तो अतिरिक्त दिनों का निर्धारित लीज रेंट आयोजकों को चुकाना होगा।
पुलिस क्लीयरेंस पर टिकी सबकी नजरें
IDA की सशर्त मंजूरी के बाद सबसे बड़ा सवाल पुलिस अनुमति को लेकर खड़ा हो गया है। वीआईपी प्रोटोकॉल और कानून-व्यवस्था के तहत बिना पुलिस कमिश्नरेट की हरी झंडी के किसी भी राजनीतिक या छात्र सभा का आयोजन संभव नहीं है।
अब कांग्रेस आयोजन समिति की नजरें पुलिस प्रशासन के फैसले पर टिकी हैं कि क्या तय समय पर इस बड़े कार्यक्रम को मंजूरी मिल पाती है या तारीखों और स्थान में बदलाव करना पड़ेगा।

