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JPSC में धांधली के विरोध में उबला रांची, जयपाल सिंह स्टेडियम बना नया ‘जंतर-मंतर’

Ranchi News : झारखंड की राजधानी रांची में जयपाल सिंह स्टेडियम अब ‘दिल्ली के जंतर-मंतर’ जैसा बन गया है। झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन (JPSC) और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर सैकड़ों छात्र कई दिनों से यहां धरना दे रहे हैं। छात्रों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। गुरुवार को सैकड़ों छात्र लोक भवन के बाहर जमा हुए और जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग उठाई।

रांची में विरोध प्रदर्शन कर रहे उम्मीदवारों ने अपनी मुख्य मांगें बताईं और कहा कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो उनका धरना-प्रदर्शन अनिश्चित काल तक जारी रहेगा। आइए जानते हैं कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मांगें क्या हैं।

CBI-ED जांच और 90 दिनों में कार्रवाई की मांग

प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि TDPL एजेंसी के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी से जुड़ी सभी परीक्षाओं में भारी गड़बड़ी हुई है। इसलिए, वे PGT, सेकेंडरी टीचर और FSO जैसे पदों के लिए हुई सभी परीक्षाओं की CBI-ED से जांच कराने और फास्ट-ट्रैक कोर्ट के जरिए 90 दिनों के भीतर इन विवादित परीक्षाओं को रद्द करने की मांग कर रहे हैं।

JPSC- JSSC में ऊपर से नीचे तक के सभी अधिकारियों-कर्मचारियों का ट्रांसफर

छात्रों ने सरकार के सामने JPSC और JSSC परीक्षाओं में पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का प्रस्ताव भी रखा है। वे JPSC और JSSC में ऊपर से नीचे तक सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले की मांग कर रहे हैं। उनकी मांग है कि इन पदों पर बेदाग छवि वाले अधिकारियों को नियुक्त किया जाए, जिनका किसी भी राजनीतिक दल से कोई संबंध न हो, और उनकी जवाबदेही तय की जाए।

धरने पर बैठे उम्मीदवारों ने उम्र सीमा में छूट की भी मांग की है। उन्होंने मांग की है कि 14वीं JPSC के लिए भेजी गई मांग (रिक्विजिशन) को वापस लिया जाए और 14वीं और 15वीं JPSC परीक्षाओं के लिए जल्द ही एक संयुक्त नोटिफिकेशन जारी किया जाए। उन्होंने अनुरोध किया है कि अधिकतम उम्र सीमा की गणना 1 अगस्त, 2018 के आधार पर की जाए, ताकि छात्रों को परीक्षा में शामिल होने का मौका मिल सके।

उम्मीदवारों ने मांग की है कि OMR शीट खाली छोड़ने से जुड़ी गड़बड़ियों को रोकने के लिए ‘ऑप्शन E’ को शामिल किया जाए। छात्रों के लिए सभी बबल भरना जरूरी होना चाहिए। अगर किसी सवाल का जवाब नहीं देना है, तो ‘Not Attempted’ (ऑप्शन E) वाले बबल को भरना अनिवार्य किया जाना चाहिए।

प्रदर्शनकारी छात्रों ने कॉपियों की जांच और अपलोडिंग की भी मांग की है। छात्रों की मांग है कि जेपीएससी मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं की मैनुअल जांच हो। साथ ही, जांच की गई कॉपियों को 7 दिनों के भीतर अभ्यर्थी की OTR ID में डिजिटली अपलोड किया जाए, ताकि अभ्यर्थियों को अपनी कॉपी देखने के लिए RTI या कोर्ट के चक्कर न काटने पड़ें।

विज्ञापन या नियमों से जुड़ी किसी भी अस्पष्टता के मामले में, आयोग के संबंधित अधिकारियों को छात्रों की शंकाओं को दूर करने के लिए 24 घंटे (एक दिन) के भीतर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी चाहिए।

प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि JPSC और JSSC की सभी परीक्षाओं के लिए अनारक्षित श्रेणी की अधिकतम आयु सीमा 42 वर्ष तय की जाए। उन्होंने यह भी मांग की कि अन्य श्रेणियों को भी उसी अनुपात में आयु में छूट दी जाए।

मांगें नहीं मानते तो इस्तीफा दें सीएम

छात्र नेताओं ने कहा कि कार्मिक विभाग का प्रभार खुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पास है। इसलिए, विभाग में हुई सभी अनियमितताओं के लिए वे सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं। उन्होंने मांग की कि अगर सरकार छात्रों की मांगों पर बातचीत नहीं करती है और उन्हें पूरा नहीं करती है, तो मुख्यमंत्री को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। (एजेंसी)

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