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सोनम वांगचुक की सेहत पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, केंद्र और दिल्ली सरकार को भेजा नोटिस

Sonam Wangchuk hunger strike: दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को जनहित याचिका (पीआईएल) पर केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया। यह याचिका कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के बिगड़ते स्वास्थ्य को लेकर दायर की गई है, जो 28 जून से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। इस मामले की महत्वपूर्ण सुनवाई गुरुवार को होगी, जिसमें न्यायालय सरकारों से उठाए गए कदमों पर जवाब मांगेगा। दिल्ली उच्च न्यायालय ने शिक्षा सुधारक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है। सोनम वांगचुक पिछले 17 दिनों से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। न्यायालय ने दोनों सरकारों से बुधवार तक अपना जवाब दाखिल करने को कहा है।

दिल्ली हाई कोर्ट में दायर एक जनहित याचिका में मांग की गई है कि सोनम वांगचुक को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया जाए और उनकी जान बचाने के लिए आवश्यक चिकित्सा देखभाल प्रदान की जाए। याचिका में यह भी मांग की गई है कि यदि आवश्यक हो तो उन्हें जबरन भोजन कराया जाए और तरल आहार, विटामिन और अन्य आवश्यक पोषक तत्व प्रदान किए जाएं।

सामाजिक कार्यकर्ता और वकील राकेश कुमार सैनी द्वारा दायर याचिका में दावा किया गया है कि लगातार भूख हड़ताल के कारण वांगचुक की हालत तेजी से बिगड़ रही है और समय पर इलाज न मिलने पर उनकी जान को गंभीर खतरा हो सकता है। याचिका के अनुसार, सोनम वांगचुक का लगभग 8.5 किलोग्राम वजन कम हो गया है और उनका रक्तचाप 109/70 तक पहुंच गया है।याचिकाकर्ता का कहना है कि अगर उनके साथ कोई अनहोनी होती है तो यह देश और दुनिया दोनों के लिए बेहद दुखद और शर्मनाक होगा।

सोनम वांगचुक 28 जून से जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर हैं। उनका यह विरोध प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के बैनर तले हो रहा है। संगठन कथित NEET-UG परीक्षा लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, शिक्षा प्रणाली में सुधार और परीक्षा लीक से प्रभावित परिवारों के लिए न्याय की मांग कर रहा है।

पिछले कुछ दिनों से वांगचुक की कमजोर हालत की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिनमें डॉक्टर लगातार उनकी जांच करते नजर आ रहे हैं। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके का कहना है कि वांगचुक को चलने और खड़े होने में भी दिक्कत हो रही है। अब सबकी निगाहें दिल्ली उच्च न्यायालय में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं। केंद्र और दिल्ली सरकार को बुधवार तक अपने तर्क प्रस्तुत करने होंगे, जिसके बाद न्यायालय आगे की कार्रवाई तय करेगा।(एजेंसी)

 

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