फिट और एक्टिव रहने के लिए योग दिवस पर अपनाएं ये सरल योगासन, जानें लाभ
Yoga Day 2026: आजकल ज़्यादातर लोग दिन में आठ से दस घंटे या उससे भी ज्यादा समय तक कंप्यूटर के सामने बैठकर काम करते हैं। लंबे समय तक बैठे रहने की आदत शरीर और मन दोनों पर असर डाल सकती है। इससे पीठ और गर्दन में अकड़न, कंधों में तनाव, एनर्जी का कम स्तर और शरीर की लचीलेपन में कमी जैसी समस्याएं धीरे-धीरे पैदा हो सकती हैं। ऐसे में, योग एक असरदार और प्राकृतिक उपाय के तौर पर सामने आता है, जो शरीर को सक्रिय रखने और बैठे-बैठे किए जाने वाले काम (सेडेंटरी लाइफ़स्टाइल) के बुरे असर को कम करने में मदद कर सकता है।
लंबे समय तक बैठने का शरीर पर प्रभाव
जब कोई व्यक्ति लगातार कई घंटों तक एक ही मुद्रा में बैठा रहता है, तो इससे रीढ़ की हड्डी, कंधों और कूल्हों पर बहुत ज़्यादा दबाव पड़ सकता है। इससे शरीर की मुद्रा प्रभावित हो सकती है और मांसपेशियों में अकड़न आ सकती है। मानसिक रूप से भी, लंबे समय तक स्क्रीन पर काम करने से तनाव और थकान बढ़ सकती है।
योग शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है, मांसपेशियों को सक्रिय रखता है और मांसपेशियों व हड्डियों दोनों को मज़बूत करता है। यह मन को शांत करने में भी मदद करता है। नियमित योग अभ्यास से शरीर अधिक संतुलित और ऊर्जावान महसूस करता है। इसके अलावा, योग से सेहत को कई अन्य लाभ भी मिलते हैं, जिससे आप बुढ़ापे तक शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रह सकते हैं।

1. भुजंगासन
भुजंगासन रीढ़ को पीछे की ओर खींचने में सहायता करता है, जिससे लंबे समय तक झुककर बैठने से उत्पन्न तनाव कम हो सकता है। यह छाती को खोलने और कंधों को पीछे ले जाने में भी मदद करता है।

2. मार्जरी-व्याघ्रासन
यह सरल योगासन रीढ़ की लचक को बढ़ाने और पीठ की जकड़न को कम करने में उपयोगी माना जाता है। लंबे समय तक बैठने के बाद यह शरीर को हल्का और आरामदायक महसूस करा सकता है।

3. अधोमुख श्वानासन
यह आसन पूरे शरीर को खिंचाव देता है। इससे कंधों, हैमस्ट्रिंग और पीठ की मांसपेशियों को सक्रिय करने में सहायता मिलती है, जो लंबे समय तक बैठने के कारण निष्क्रिय हो सकती हैं।

4. ताड़ासन
ताड़ासन सही शारीरिक मुद्रा विकसित करने में सहायक है। यह व्यक्ति को खड़े होने और बैठने की बेहतर आदतों के प्रति जागरूक बनाता है।
योग का करें नियमित अभ्यास
अगर आप रोजाना लगातार 10 घंटे बैठकर काम करते हैं, तो ऐसी जीवनशैली के असर को पूरी तरह नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। हालाँकि, नियमित रूप से योग करने से इन प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। अपनी दिनचर्या में भुजंगासन, मार्जारी-व्याघ्रासन, अधोमुखश्वानासन और ताड़ासन जैसे आसनों को शामिल करके, शरीर की लचीलापन, ऊर्जा और संतुलन को बेहतर बनाने की दिशा में सकारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।(एजेंसी)

