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अयोध्या से दिल्ली तक गूंजा चढ़ावा विवाद, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

वीरेंद्र सिंह ने हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में जांच और श्वेत पत्र जारी करने की मांग की

 

अयोध्या। श्रीराम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन के आरोपों को लेकर समाजवादी पार्टी के चंदौली सांसद वीरेंद्र सिंह ने मंदिर को सूचना का अधिकार (RTI) के दायरे में लाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में कराई जानी चाहिए और इस संबंध में एक श्वेत पत्र भी जारी किया जाना चाहिए। सांसद ने देश के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों को भी आरटीआई के दायरे में लाने की वकालत की है।

 

इसी बीच इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक प्रस्तुतीकरण (Representation) भी दाखिल किया गया है। इसमें कथित गबन के मामले में एफआईआर दर्ज करने और न्यायालय की निगरानी में जांच कराने का निर्देश देने की मांग की गई है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति सूर्यकांत को संबोधित यह प्रस्तुतीकरण एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड अनूप प्रकाश अवस्थी द्वारा सौंपा गया है।

 

प्रस्तुतीकरण में कहा गया है कि भगवान श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम माने जाते हैं और न्याय, जवाबदेही तथा नैतिक शासन के प्रतीक हैं। ऐसे में उनके जन्मस्थान पर श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान से जुड़े किसी भी आरोप का महत्व सामान्य आपराधिक मामलों से कहीं अधिक है।

 

याचिका में कहा गया है कि जिन मामलों में संस्थाओं पर जनता का विश्वास दांव पर लगा हो, वहां पारदर्शी, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता होती है। इसमें यह भी कहा गया है कि लाखों श्रद्धालुओं का भरोसा तभी कायम रह सकता है, जब जांच प्रक्रिया पूरी तरह प्रभाव, दबाव और हितों के टकराव से मुक्त हो।

 

प्रस्तुतीकरण में यह भी उल्लेख किया गया है कि राज्य सरकार द्वारा विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है, लेकिन अब तक औपचारिक आपराधिक मामला दर्ज नहीं होने और एफआईआर न होने के कारण सरकारी कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। याचिकाकर्ता ने स्पष्ट किया कि उनका किसी व्यक्ति, संस्था या ट्रस्ट पर पूर्वाग्रह या अविश्वास का इरादा नहीं है, बल्कि आरोपों की गंभीरता और संस्था की संवेदनशीलता को देखते हुए अधिक पारदर्शिता और विश्वसनीय जांच की आवश्यकता है।

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