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PM Modi France Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस के लिए हुए रवाना, 36,000 करोड़ की पनडुब्बी डील और राफेल पर होगी महाचर्चा!

PM Modi France Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बेहद महत्वपूर्ण और रणनीतिक मिशन पर फ्रांस के लिए रवाना हो चुके हैं। वैश्विक स्तर पर बढ़ती सैन्य प्रतिस्पर्धा के बीच पीएम मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच होने वाली यह मुलाकात भारत की सैन्य ताकत को एक नई ऊंचाई पर ले जा सकती है। 36,000 करोड़ रुपये के 3 नए स्कॉर्पीन पनडुब्बी सौदे से लेकर भारतीय नौसेना के लिए मिलने वाले राफेल-एम (Rafale-M) विमानों तक—क्या है इस वीवीआईपी दौरे का पूरा एजेंडा और क्यों कांप रहे हैं भारत के दुश्मन? पूरी इनसाइड स्टोरी जानने के लिए पूरा आर्टिकल जरूर पढ़ें।

रक्षा सहयोग को और गहरा करने फ्रांस रवाना हुए पीएम मोदी

वैश्विक स्तर पर और खासकर महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्रों (Indo-Pacific) में बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को फ्रांस की आधिकारिक यात्रा के लिए रवाना हो गए हैं। इस हाई-प्रोफाइल यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत की सैन्य शक्ति को मजबूत करना और फ्रांस के साथ रणनीतिक व रक्षा सहयोग को और अधिक गहरा करना है।

विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव (यूरोप-पश्चिम) पीयूष श्रीवास्तव ने किसी खास रक्षा परियोजना का नाम लिए बिना कहा:

“फ्रांस रक्षा क्षेत्र में हमारा एक बेहद भरोसेमंद साझेदार है। हम रक्षा उत्पादन में अधिक स्वदेशीकरण और संयुक्त विकास (Joint Development) पर जोर दे रहे हैं। पीएम मोदी और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच होने वाली वार्ता में रक्षा सहयोग सहित सभी द्विपक्षीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी।”

₹36,000 करोड़ की 3 और स्कॉर्पीन पनडुब्बी डील पर बातचीत तेज

राजनयिक सूत्रों के अनुसार, इस दौरे के दौरान दोनों देश भारतीय नौसेना के लिए तीन और स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियां खरीदने की योजना पर बातचीत को अंतिम रूप दे सकते हैं।

मेक इन इंडिया पर जोर: इन पनडुब्बियों का निर्माण भारत की सरकारी कंपनी मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) और फ्रांस की प्रमुख रक्षा कंपनी ‘नेवल ग्रुप’ के संयुक्त सहयोग से भारत में ही किया जाएगा।

क्यों हुई देरी?: रक्षा मंत्रालय ने लगभग दो वर्ष पहले ही करीब 36,000 करोड़ रुपये के इस मेगा प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी थी, लेकिन तकनीकी और व्यावसायिक पहलुओं को अंतिम रूप देने संबंधी बातचीत के कारण इसमें देरी होती रही है, जिसे अब गति मिलने की उम्मीद है।

इससे पहले प्रोजेक्ट-75 के तहत एमडीएल ने फ्रांस के सहयोग से 6 स्कॉर्पीन पनडुब्बियों का निर्माण पहले ही कर लिया है, जिसमें से छठी पनडुब्बी जनवरी 2025 में भारतीय नौसेना में शामिल की जा चुकी है।

राफेल-एम विमानों की डिलीवरी और M88 इंजन का भारत में MRO

फ्रांस भारत को सैन्य साजो-सामान की आपूर्ति करने वाला सबसे प्रमुख देश बनकर उभरा है। दोनों देशों के बीच रक्षा औद्योगिक सहयोग तेजी से बढ़ रहा है:

26 राफेल-एम (Rafale-M) विमान: भारतीय नौसेना के लिए 26 राफेल-एम विमानों के साल 2025 के समझौते में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (Technology Transfer) और भारत में ही फ्यूजलेज उत्पादन शामिल है। इससे पहले 2022 में भारत को 36 राफेल जेट मिल चुके हैं।

सैफरन का एमआरओ सेंटर: नवंबर 2025 में हैदराबाद में फ्रांस की कंपनी ‘सैफरन’ के डीप-लेवल एयरक्राफ्ट इंजन MRO सेंटर का उद्घाटन किया गया था। अब सैफरन ने राफेल विमानों में इस्तेमाल होने वाले M88 इंजन के लिए भी एमआरओ शॉप की घोषणा की है।

हेलीकॉप्टर असेंबली लाइन: हाल ही में फरवरी 2026 में कर्नाटक में H125 हेलीकॉप्टर असेंबली लाइन का भी उद्घाटन किया गया है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ को बढ़ावा देता है।

1947 से दोस्ती और मजबूत होते सैन्य अभ्यास

भारत और फ्रांस के बीच ऐतिहासिक रिश्ते 1947 से हैं, जिन्हें 26 जनवरी 1998 को ‘रणनीतिक साझेदारी’ में बदला गया था। यह भारत की किसी पश्चिमी देश के साथ पहली ऐसी साझेदारी थी। हाल ही में 17 फरवरी 2026 को बेंगलुरु में हुई छठी वार्षिक रक्षा वार्ता में दोनों देशों ने अपने 10 साल के रक्षा सहयोग समझौते को नवीनीकृत (Renew) किया है।

दोनों देशों की सेनाएं हर साल बड़े स्तर पर युद्धाभ्यास करती हैं, जो उनके मजबूत ऑपरेशनल तालमेल को दिखाता है:

  • एक्सरसाइज शक्ति: दोनों देशों की थल सेना के बीच।
  • एक्सरसाइज गरुड़: दोनों देशों की वायु सेना के बीच।
  • एक्सरसाइज वरुण: दोनों देशों की नौसेना के बीच।

एस्टरएक्स (AsterX): फ्रांस के इस स्पेस अभ्यास में भारत की भागीदारी दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा-अंतरिक्ष सहयोग को दर्शाती है।

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