Train Vibration Electricity Technology: अब पटरियों की थरथराहट से बनेगी बिजली, ट्रेन के गुजरने से चार्ज होंगे रेलवे सेंसर्स; नई तकनीक तैयार
Train Vibration Electricity Technology: अब तक आपने ट्रेनों को बिजली से चलते हुए देखा होगा, लेकिन जल्द ही ट्रेनें बिजली बनाने का जरिया भी बनेंगी। रिसर्चर्स ने रेलवे ट्रैक पर होने वाली हलचल और थरथराहट (Vibration) से बिजली पैदा करने की एक अत्याधुनिक तकनीक तैयार कर ली है। पहियों और पटरियों के बीच पैदा होने वाली जिस भारी ऊर्जा का कंपन पहले वातावरण में गर्मी बनकर बर्बाद हो जाता था, उसे अब उपयोगी बिजली में बदला जा सकेगा।
कैसे काम करती है यह नई तकनीक?
यह सिस्टम मुख्य रूप से तीन हिस्सों में बंटा हुआ है:
- वाइब्रेशन कन्वर्जन मॉड्यूल
- जनरेटर मॉड्यूल
- पावर स्टोरेज मॉड्यूल
जब भी कोई भारी-भरकम ट्रेन पटरी के ऊपर से गुजरती है, तो ट्रैक हल्का ऊपर-नीचे होता है। इस तकनीक में इस्तेमाल होने वाला ‘सीजर लिंकेज’ और ‘स्लाइडर मैकेनिज्म’ इस अप-डाउन गति को एकतरफा रोटेशन में बदल देता है। इस रोटेशन के जरिए थ्री-फेज जनरेटर बिजली बनाता है, जिसे रेक्टिफायर्स और फिल्टर्स के बाद सुपरकैपेसिटर्स में सुरक्षित स्टोर कर लिया जाता है।
73% एफिशिएंसी और पावर आउटपुट
शोधकर्ताओं द्वारा इस तकनीक का गहन परीक्षण किया गया है, जिसमें यह सिस्टम 73.38% एफिशिएंट पाया गया। इससे 7.44 वॉट का पीक पावर आउटपुट दर्ज किया गया है, जो छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को चलाने के लिए पर्याप्त है।
कहाँ और कैसे आएगी काम?
रेलवे ट्रैक की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर नजर रखने के लिए विभिन्न लो-पावर सेंसर्स का इस्तेमाल किया जाता है। इन्हें चालू रखने के लिए या तो लंबी वायरिंग करनी पड़ती है या बार-बार बैटरियां बदलनी पड़ती हैं। यह नया सेल्फ-पावर्ड सिस्टम इन सेंसर्स को सीधे बिजली देगा, जिससे वे बिना रुके कंट्रोल रूम तक रियल-टाइम डेटा भेज सकेंगे।
सौर या पवन ऊर्जा की तरह यह तकनीक मौसम पर निर्भर नहीं है; जब तक ट्रेनें गुजरेंगी, तब तक यह कंपन के जरिए 24 घंटे बिजली बनाती रहेगी।

