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दिमाग की सर्जरी के दौरान अनोखा मामला, मरीज देखती रही पवन कल्याण की ‘OG’

आंध्र प्रदेश : आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण की फिल्म ‘OG’ को गुंटूर में एक मरीज की ‘जागृत अवस्था में मस्तिष्क की सर्जरी’ के दौरान दिखाया गया। गुंटूर जिले के एक निजी अस्पताल में डॉक्टरों ने एक दुर्लभ और विशेष चिकित्सा प्रक्रिया में एक महिला के मस्तिष्क से ट्यूमर को सफलतापूर्वक निकाल दिया। इस प्रक्रिया के दौरान महिला जागृत अवस्था में थी और अपने पसंदीदा अभिनेता, आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण की गैंगस्टर एक्शन ड्रामा फिल्म ‘दे कॉल हिम OG’ देख रही थी।

प्रकाशम जिले के दर्शी की निवासी कोटेश्वरम्मा की अवेक ब्रेन सर्जरी सर्जरी की गई। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें मरीज पूरी तरह से बेहोश नहीं होता है। ऑपरेशन के दौरान, उन्हें शांत, सतर्क और सहयोगी बनाए रखने के लिए पवन कल्याण की फिल्म ‘OG’ के दृश्य दिखाए गए।

डॉक्टरों ने की अवेक ब्रेन सर्जरी

मेडिकल टीम के अनुसार, कोटेश्वरम्मा को ब्रेन ट्यूमर के लक्षण थे और उन्हें विशेष उपचार के लिए भेजा गया था। स्कैन और जांच के बाद, डॉक्टरों ने यह निर्धारित किया कि जागृत अवस्था में मस्तिष्क की सर्जरी सबसे सुरक्षित विकल्प होगी, क्योंकि ट्यूमर मस्तिष्क के उन हिस्सों के पास स्थित था जो बोलने और चलने-फिरने को नियंत्रित करते हैं। यह सर्जरी न्यूरोसर्जन डॉ. अरुण कुमार और डॉ. राजशेखर ने एनेस्थेटिस्ट, नर्सों और टेक्नीशियन की एक टीम के साथ मिलकर की।

ऑपरेशन के दौरान महिला करती रही बात

डॉ. अरुण कुमार ने कहा, “जागृत अवस्था में की जाने वाली मस्तिष्क सर्जरी के दौरान, मरीज प्रक्रिया के कुछ हिस्से में होश में रहता है, जिससे हम उसकी बोलने की क्षमता, याददाश्त और शारीरिक क्रियाओं पर लगातार नज़र रख सकते हैं। इससे हमें मस्तिष्क के महत्वपूर्ण हिस्सों को सुरक्षित रखते हुए ट्यूमर को अधिक सुरक्षित तरीके से हटाने में मदद मिलती है।” डॉक्टरों ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान मरीज सवालों के जवाब देने, मेडिकल टीम से बात करने और फिल्में देखने में सक्षम थी।

हॉस्पिटल के अधिकारियों ने इस प्रक्रिया को एक बड़ी सफलता बताया , बिना किसी परेशानी के ट्यूमर को हटा दिया गया और मरीज़ की हालत में सुधार हो रहा है और वह निगरानी में हैं।चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि जटिल मस्तिष्क ट्यूमर के उपचार में ‘जागृत अवस्था में की जाने वाली क्रैनियोटॉमी’ प्रक्रियाएं तेजी से महत्वपूर्ण होती जा रही हैं क्योंकि ये सर्जनों को ट्यूमर के जितना संभव हो उतना हिस्सा हटाने की अनुमति देती हैं, साथ ही मस्तिष्क के महत्वपूर्ण कार्यों को नुकसान पहुंचने के जोखिम को भी कम करती हैं। (एजेंसी)

 

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