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Muzaffarpur Hospital Fire: मुजफ्फरपुर के ‘प्रसाद हॉस्पिटल’ में भीषण आग, ICU में फंसे 5 मरीजों की तड़पकर मौत, 30 झुलसे

Muzaffarpur Hospital Fire: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से एक बेहद दर्दनाक और रूह कंपा देने वाला हादसा सामने आया है। यहां के ब्रह्मपुरा इलाका स्थित ‘प्रसाद हॉस्पिटल’ में गुरुवार सुबह अचानक भीषण आग लग गई। आग अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर स्थित आईसीयू (ICU) वार्ड में लगी, जिसने देखते ही देखते कुछ ही पलों में विकराल रूप धारण कर लिया।

आग लगने के कारण पूरे अस्पताल भवन में दम घोंटने वाला घना और जहरीला धुआं फैल गया, जिससे वेंटिलेटर और बेड पर पड़े असहाय मरीजों और उनके तीमारदारों के बीच अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई। इस दर्दनाक हादसे में अब तक पांच लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 30 से अधिक मरीज गंभीर रूप से झुलस गए हैं। घायलों को तुरंत रेस्क्यू कर इलाज के लिए अन्य नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

इन मरीजों की हुई दर्दनाक मौत

अस्पताल के आईसीयू वार्ड में लगी आग की चपेट में आने से जान गंवाने वाले 5 बदकिस्मत मरीजों की पहचान हो चुकी है, जो गंभीर बीमारियों के चलते वहां भर्ती थे:

  • शशांक कुमार (औराई, मुजफ्फरपुर)
  • गीता देवी (मोतीपुर, मुजफ्फरपुर) – 1 जून को भर्ती हुई थीं, शुगर-बीपी की मरीज थीं और डायलिसिस चल रहा था।
  • उदय कुमार (तरियानी, शिवहर) – 4 दिन पहले ब्रेन सर्जरी हुई थी। हादसे के वक्त पत्नी नीलू देवी, बच्चे और साला नीतीश मिलने आए थे, पर उन्हें बचाया नहीं जा सका।
  • कृष्ण नंदन (मीनापुर, मुजफ्फरपुर) – 22 मई से फेफड़े में पानी की शिकायत के कारण भर्ती थे।
  • चंचला कुमारी

खिड़कियां और दरवाजे तोड़कर बचाई गई जान

दमकल विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, सुबह करीब तीन बजे आग लगने की सूचना प्राप्त हुई थी। जब दमकल की लगभग एक दर्जन गाड़ियां मौके पर पहुंचीं, तो पांचवीं मंजिल का आईसीयू वार्ड पूरी तरह काले जहरीले धुएं से भरा हुआ था।

अग्निशमन कर्मियों और राहत दल को मरीजों को बाहर निकालने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ी। वार्ड में विजिबिलिटी जीरो हो चुकी थी, जिसके कारण कई मरीजों को खिड़कियां और दरवाजे तोड़कर बाहर निकाला गया। इस दौरान 20 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया, लेकिन तब तक कई मरीजों की हालत बेहद चिंताजनक हो चुकी थी।

13 बेड के वार्ड में भर्ती थे 15 मरीज: प्रशासन

घटना के बाद मौके पर पहुंचे मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी (DM) सुब्रत कुमार सेन ने अस्पताल की बड़ी लापरवाही को उजागर किया। उन्होंने बताया कि अस्पताल के जिस आईसीयू वार्ड में आग लगी, वहां कुल 13 बेड स्वीकृत (लगे हुए) थे, लेकिन नियमों को ताक पर रखकर उसमें 15 मरीजों को भर्ती किया गया था। आग की इस भीषण घटना में आईसीयू वार्ड के इंचार्ज भी गंभीर रूप से झुलस गए हैं, जिन्हें इलाज के लिए बगल के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

मरीजों को तड़पता छोड़ भागे डॉक्टर और स्टाफ, परिजनों का फूटा गुस्सा

इस दर्दनाक हादसे के बाद अस्पताल प्रबंधन की संवेदनहीनता और कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मृतकों और घायलों के बिलखते परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का बड़ा आरोप लगाया है।

परिजनों का आरोप: पीड़ित स्वजनों का कहना है कि जैसे ही सुबह तड़के आग लगी और धुआं फैला, अस्पताल के डॉक्टर, नर्स और अन्य कर्मचारी मरीजों को तड़पता हुआ उनके हाल पर छोड़कर खुद जान बचाकर वहां से भाग खड़े हुए। अगर अस्पताल प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाई होती और समय पर सहायता मिलती, तो इन 5 लोगों की जान बचाई जा सकती थी। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि हादसे के बाद मृतकों के शवों की जानकारी देने में भी अस्पताल प्रबंधन कोई सहयोग नहीं कर रहा है।

शॉर्ट सर्किट बनी वजह, जांच शुरू

शुरुआती जांच और दमकल विभाग के अनुमान के मुताबिक, आग लगने की मुख्य वजह पांचवीं मंजिल पर हुआ शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। हालांकि, मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन ने अस्पताल परिसर को अपने कब्जे में ले लिया है और साक्ष्य जुटाकर घटना के वास्तविक कारणों की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।

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