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कौन हैं अरूप रॉय? जानिए TMC के नए अध्यक्ष के राजनीतिक सफर की कहानी

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में हार और सत्ता गंवाने के बाद ममता बनर्जी की TMC में राजनीतिक लड़ाई छिड़ गई है। TMC तीन गुटों में बंट गई है। एक में बागी विधायक हैं, दूसरे में बागी लोकसभा सांसद हैं और तीसरा गुट ममता बनर्जी के साथ है। अब TMC पर नियंत्रण की लड़ाई और तेज हो गई है। सोमवार को कोलकाता में बागी विधायकों के गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में TMC की नई वर्किंग कमिटी की घोषणा के लिए एक बैठक हुई। इस बैठक में ममता बनर्जी को पार्टी अध्यक्ष के पद से हटा दिया गया और उनकी जगह विधायक अरूप रॉय को नया TMC अध्यक्ष नियुक्त किया गया।

जानिए टीएमसी के नए अध्यक्ष बने अरूप रॉय कौन

16 अक्टूबर, 1956 को जन्में अरूप रॉय अभी हावड़ा मध्य सीट से विधायक हैं। वह पेशे से एक वकील हैं। वह चौथी बार विधायक बने हैं। पूर्व में वह मंत्री भी रह चुके हैं। 69 साल के अरुप रॉय 1998 में कांग्रेस छोड़कर टीएमसी से जुड़े थे। अरूप रॉय पश्चिम बंगाल सरकार में सहकारिता विभाग के कैबिनेट मंत्री का काम संभाल चुके हैं। वे पहली बार 2011 में जीते थे। इसके बाद 2016, 2021 और 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में फिर से चुने गए। वे हावड़ा में तृणमूल कांग्रेस के जिला अध्यक्ष हैं। अब वे ममता बनर्जी के वफादार सिपहसालार से प्रतिद्वंदी बन गए हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक सफ़र की शुरुआत छात्र राजनीति से की और कांग्रेस पार्टी के छात्र संगठन से जुड़े। हालाँकि, उनका असली राजनीतिक करियर 1990 के दशक में तब शुरू हुआ, जब ममता बनर्जी ने कांग्रेस से अलग होकर 1998 में ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ बनाई।

अरूप राय को संगठन का माहिर माना जाता है

अरूप रॉय अपनी सादगी, संगठन चलाने की काबिलियत और हावड़ा जिले की राजनीति पर मजबूत पकड़ के लिए जाने जाते हैं। हालांकि उन्हें ममता के करीबी नेताओं में गिना जाता है, लेकिन अब वे रिताब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी विधायकों के साथ खड़े हैं। TMC के बागी विधायकों के गुट की बैठक में उन्हें ममता बनर्जी की जगह राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया है। उन्होंने हावड़ा ज़िले के लिए तृणमूल कांग्रेस के अध्यक्ष के तौर पर भी काम किया है। 2011 में, जब पश्चिम बंगाल में वामपंथी दलों का 34 साल लंबा शासन खत्म हुआ, तो अरूप रॉय ‘हावड़ा मध्य’ निर्वाचन क्षेत्र से विधायक चुने गए। उनकी संगठनात्मक क्षमताओं को देखते हुए, ममता बनर्जी ने उन्हें अपनी पहली कैबिनेट में कृषि विपणन मंत्री नियुक्त किया। तब से उनकी हर सरकार में वे मंत्री रहे हैं।

अभिषेक बनर्जी सस्पेंड, ममता को ऑफर

अरूप रॉय लंबे समय से ममता बनर्जी के बहुत करीबी और वफादार सहयोगी रहे हैं। अरूप रॉय की अगुवाई में, बागी गुट ने 30 सदस्यों वाली एक नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति बनाई है, जिसने अभिषेक बनर्जी को महासचिव के पद से भी हटा दिया है। हालांकि, बागी गुट का कहना है कि वे अभी भी चाहते हैं कि ममता बनर्जी उनकी मुख्य सलाहकार बनी रहें।

अरूप रॉय की टीम में किसे-किसे मिली जगह

TMC के बागी गुट के विधायकों ने सोमवार को एक बैठक की और पार्टी के नए संगठनात्मक ढांचे की घोषणा की। पूर्व मंत्री अरूप रॉय को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि फिरहाद हकीम, रथिन घोष और सबीना यास्मीन को उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। रिताब्रता बनर्जी, जावेद खान और संदीपन साहा को महासचिव नियुक्त किया गया है। बागी विधायक अखरुज्जमां अंसारी को नए कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया कि बैठक पार्टी के संविधान के अनुसार हुई और वर्किंग कमेटी का गठन भी उसी तरह किया गया। चुनाव आयोग को इस बारे में जानकारी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि नई वर्किंग कमेटी जल्द ही जिला कमेटियों, राज्य इकाई और प्रवक्ताओं के नामों की घोषणा करेगी।(एजेंसी)

 

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