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मणिपुर में हिंसा भड़की: असम राइफल्स कैंप निशाने पर, सुरक्षा बलों ने दागे आंसू गैस के गोले

मणिपुर : 14-15 जुलाई की दरमियानी रात को मणिपुर के सेनापति कस्बे में असम राइफल्स के एक शिविर पर हिंसक भीड़ ने हमला कर दिया। मंगलवार रात को बेकाबू भीड़ ने पत्थर फेंके, वाहनों में आग लगा दी और शिविर में तोड़फोड़ की। भीड़ ने वाहनों में आग लगा दी और ट्रकों को पलट दिया। सुरक्षा बलों को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हवाई फायरिंग और आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। कोहिमा और इम्फाल में रक्षा मंत्रालय के पीआरओ ने बुधवार को यह जानकारी दी। स्थानीय लोगों या सुरक्षाकर्मियों में किसी के घायल होने या हताहत होने की कोई खबर नहीं है।इसके बाद सुरक्षा बलों ने संयम बरतते हुए मणिपुर पुलिस और सीआरपीएफ के सहयोग से स्थिति को नियंत्रित किया है।

सुरक्षा बलों के अधिकारियों ने बताया कि खुफिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया पोस्टों से संकेत मिलता है कि ओकलॉन्ग में नामित एनएससीएन (आईएम) शिविर के मकुइलोंगडी क्षेत्र में सशस्त्र कैडर घूम रहे थे। वे हथियार लिए हुए थे और वर्दी पहने हुए थे, जो युद्धविराम प्रोटोकॉल का स्पष्ट उल्लंघन था। इसके बाद, युद्धविराम निगरानी समूह (सीएफएमजी) को इन उल्लंघनों की औपचारिक सूचना दी गई, जिसमें सुरक्षा संबंधी चिंताओं को उजागर किया गया और क्षेत्र में सर्च अभियान शुरू किया गया। इसी सर्च ऑपरेशन के विरोध में भड़की भीड़ ने कैंप पर हमला कर दिया। सुरक्षा बलों ने पुलिस के साथ मिलकर आंसू गैस के गोले दागे और हवाई फायरिंग कर आधी रात तक हालात पर काबू पा लिया।

बयान में कहा गया है कि युद्धविराम निगरानी समूह (सीएफएमजी) को भी उल्लंघन की रिपोर्टों और उससे जुड़ी सुरक्षा चिंताओं के बारे में औपचारिक रूप से सूचित किया गया था।बयान में कहा गया है कि संघर्ष विराम निगरानी समूह (सीएफएमजी) को भी कथित उल्लंघनों और उठाई गई सुरक्षा चिंताओं के बारे में औपचारिक रूप से सूचित किया गया था। ऑपरेशन के दौरान, माकुइलोंगडी और ओकलॉन्ग गांवों की ओर बढ़ रही असम राइफल्स की टीमों को स्थानीय निवासियों ने रोक दिया। रक्षा पीआरओ के अनुसार, टीमों ने संयम बरता और स्थानीय प्रतिनिधियों से बातचीत की, उन्हें आश्वासन दिया कि ऑपरेशन का एकमात्र उद्देश्य क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करना और शांति बनाए रखना है।

सोशल मीड‍िया पर मैसेज वायरल होने के बाद सड़को पर भीड़ जमा 

बयान में यह भी कहा गया कि सुरक्षा बल ने स्थानीय प्रतिनिधियों को आश्वासन दिया है कि उसके सैनिक अधिकारियों की अनुमति के बिना किसी भी गांव में प्रवेश नहीं करेंगे। इस बीच, स्थानीय सूत्रों के अनुसार, सेनापति कस्बे में तनाव फैल गया। यह तनाव रात करीब 9 बजे शुरू हुआ, जब सोशल मीडिया पर यह खबर फैलने लगी कि ओकलॉन्ग गांव क्षेत्र में असम राइफल्स और एनएससीएन-आईएम के हुथ्रोंग ब्रिगेड मुख्यालय के बीच टकराव की आशंका है।

कार में लगाई आग और वेट‍िंग शेड भी जलाया

खबरों के मुताबिक, इन संदेशों में लोगों से शहर के एक यातायात बिंदु पर “जरूरी कार्रवाई” के लिए इकट्ठा होने का आग्रह किया गया था। इसके चलते भारी भीड़ उमड़ पड़ी। जैसे-जैसे भीड़ बढ़ती गई, प्रदर्शनकारी असम राइफल्स के कंपनी ऑपरेटिंग बेस (सीओबी) की ओर बढ़े और मांग की कि बल ओकलॉन्ग क्षेत्र से हट जाए। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, विरोध प्रदर्शन के दौरान सीओबी गेट के बाहर खड़ी एक ऑल्टो कार में आग लगा दी गई और पास के एक वेटिंग शेड को भी जला दिया गया।

भीड़ ने पत्थरबाजी करते हुए संपत्ति को नुकसान पहुंचाया

रक्षा मंत्रालय के PRO ने बताया कि रात करीब 9 बजे सूचना मिली कि सेनापति कस्बे में भारी भीड़ जमा हो रही है और असम राइफल्स के शिविर की ओर बढ़ने की तैयारी कर रही है। असम राइफल्स के जवानों के पीछे हटने के बावजूद, रात करीब 9:30 बजे भारी भीड़ शिविर तक पहुंच गई और पत्थरबाजी करते हुए संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और आगजनी का प्रयास किया।

सुरक्षा बलों, मणिपुर पुलिस और CRPF के संयुक्‍त प्रयास से हालात पर काबू पाया

स्थिति बिगड़ने पर असम राइफल्स ने मणिपुर पुलिस के समन्वय से न्यूनतम बल का प्रयोग करते हुए भीड़ को तितर-बितर करने और स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए खाली कारतूस और आंसू गैस के गोले दागे। कानून व्यवस्था बहाल करने में सहायता के लिए मणिपुर पुलिस और सीआरपीएफ कर्मियों को तुरंत तैनात किया गया। रक्षामंत्रालय के पीआरओ ने बताया कि सुरक्षा बलों, मणिपुर पुलिस और सीआरपीएफ के संयुक्त प्रयास से स्थिति नियंत्रण में आ गई और आधी रात तक भीड़ पूरी तरह से तितर-बितर हो गई। (एजेंसी)

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