Sat. Aug 29th, 2026

समय रैना के शो में ‘बिहारी-कश्मीरी’ कमेंट पर बवाल, नेताओं की एंट्री से गरमाया विवाद

Samay Raina Controversy

कॉमेडियन समय रैना का शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। शो के एक एपिसोड में समय रैना और कॉमेडियन शेरोन वर्मा के बीच हुई मजाकिया बातचीत में बिहार और कश्मीर का जिक्र हुआ। दोनों के बीच शुरू हुई यह नोकझोंक सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी और अब इस पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं।मामले में शिवसेना (UBT) नेता आनंद दुबे ने समय रैना के कॉमेडी कंटेंट पर सवाल उठाए हैं। वहीं शिवसेना नेता संजय निरुपम ने पूरे मामले को कॉमेडी के संदर्भ में देखने की बात कही, हालांकि उन्होंने संवेदनशील मुद्दों पर सावधानी बरतने की जरूरत भी बताई।

शो में क्या हुआ था?

‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ के सीजन 2 के एपिसोड में समय रैना और शेरोन वर्मा के बीच एक-दूसरे की क्षेत्रीय पृष्ठभूमि को लेकर मजाक हुआ। समय रैना ने शेरोन के बिहार से संबंध को लेकर टिप्पणी की, जिसके जवाब में शेरोन ने समय की कश्मीरी पृष्ठभूमि को लेकर पलटवार किया। बातचीत आगे बढ़ी तो दोनों की टिप्पणियों में बिहार और कश्मीर से जुड़े संदर्भ शामिल हो गए। शो की इस बातचीत का वीडियो और इससे जुड़े अंश सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद लोगों की प्रतिक्रियाएं आने लगीं। कुछ लोगों ने इसे सामान्य कॉमेडी बताया, जबकि कुछ यूजर्स ने क्षेत्रीय पहचान और कश्मीरी पंडितों से जुड़े संदर्भों को लेकर आपत्ति जताई।

आनंद दुबे ने समय रैना को घेरा

शिवसेना (UBT) नेता आनंद दुबे ने इस विवाद को लेकर समय रैना पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कॉमेडी के नाम पर किसी राज्य, जाति या धर्म को बार-बार चर्चा में लाना उचित नहीं है। दुबे ने समय रैना के पुराने विवादों का भी जिक्र करते हुए कहा कि मनोरंजन के लिए संवेदनशील विषयों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। उनके मुताबिक, कॉमेडियन को अपनी बात रखते समय यह समझना चाहिए कि किसी टिप्पणी का समाज के अलग-अलग वर्गों पर क्या असर पड़ सकता है।

संजय निरुपम बोले- कॉमेडी को कॉमेडी की तरह देखें

दूसरी ओर, शिवसेना नेता संजय निरुपम ने इस मामले पर संतुलित रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि समय रैना का शो कॉमेडी पर आधारित है और ऐसे कार्यक्रमों में कही गई बातों को उसी संदर्भ में देखना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि बिहार से जुड़ी टिप्पणी उचित नहीं थी। साथ ही कश्मीरी पंडितों के विस्थापन और उनके साथ हुई घटनाओं से जुड़े किसी भी संदर्भ को लेकर उन्होंने संवेदनशीलता बरतने की बात कही। निरुपम ने कहा कि हास्य के नाम पर अश्लीलता या गंभीर ऐतिहासिक पीड़ा का मजाक नहीं बनाया जाना चाहिए। हालांकि उन्होंने दोनों कॉमेडियनों को लेकर कठोर कार्रवाई की मांग करने के बजाय मामले को मजाक के संदर्भ में देखने की अपील की।

बिहार के शिक्षा मंत्री ने भी दी प्रतिक्रिया

विवाद पर बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी की प्रतिक्रिया भी सामने आई। उन्होंने कहा कि देश के किसी भी नागरिक या समुदाय के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी स्वीकार नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने भारत की एकता का जिक्र करते हुए कहा कि देश में क्षेत्र, जाति और धर्म के आधार पर किसी के प्रति भेदभाव नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक सार्वजनिक मंचों पर किसी भी व्यक्ति को अपनी बात रखते समय जिम्मेदारी का ध्यान रखना चाहिए।

read more: धार्मिक नगरी चित्रकूट में जल-प्रलय का तांडव: भरभराकर टूटा रामघाट का बड़ा पुल, 400 दुकानें डूबीं

कश्मीरी पंडितों के मुद्दे पर जम्मू-कश्मीर पीस फोरम की आपत्ति

जम्मू-कश्मीर पीस फोरम ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कश्मीरी पंडितों के विस्थापन का मुद्दा उठाया। संगठन ने कहा कि कॉमेडी और अभिव्यक्ति की आजादी जरूरी है, लेकिन इसके साथ जिम्मेदारी और संवेदनशीलता भी होनी चाहिए। फोरम का कहना है कि कश्मीरी पंडितों का विस्थापन केवल मनोरंजन या सोशल मीडिया कंटेंट का विषय नहीं है। समुदाय लंबे समय से विस्थापन, अपने पैतृक घरों से दूरी और उससे जुड़े सामाजिक प्रभावों का सामना करता आया है। संगठन ने साफ किया कि वह कॉमेडी पर सेंसरशिप की मांग नहीं कर रहा, बल्कि ऐतिहासिक रूप से संवेदनशील मुद्दों को लेकर जिम्मेदार रवैये की अपेक्षा कर रहा है।

समय रैना की कश्मीरी पृष्ठभूमि भी चर्चा में

विवाद के बीच समय रैना के कश्मीर से जुड़े पारिवारिक अनुभवों का भी जिक्र हो रहा है। समय पहले अपने परिवार के कश्मीर छोड़ने और विस्थापन से जुड़े अनुभवों पर सार्वजनिक रूप से बात कर चुके हैं। इसी वजह से शो में कश्मीर से संबंधित टिप्पणी को लेकर प्रतिक्रिया और ज्यादा चर्चा में आ गई। सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने शेरोन वर्मा के जवाब को समय रैना की निजी पृष्ठभूमि से जोड़कर देखा।

कॉमेडी और संवेदनशीलता पर फिर बहस

समय रैना और शेरोन वर्मा की यह नोकझोंक अब सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रही। नेताओं और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रिया के बाद एक बार फिर यह बहस शुरू हो गई है कि कॉमेडी में क्षेत्रीय पहचान, धर्म, जाति और ऐतिहासिक घटनाओं को लेकर किस हद तक मजाक किया जाना चाहिए। एक तरफ इसे कॉमेडी शो में हुई आपसी मजाकिया बातचीत माना जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ संवेदनशील सामाजिक और ऐतिहासिक संदर्भों को लेकर जिम्मेदारी की मांग उठ रही है। फिलहाल ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ का यह विवाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा में बना हुआ है।

About The Author